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मुहम्मद कैफ ने के एल राहुल से कीपिंग करवाने पर जो कहा है, वो शायद इंडियन फैन्स को पसंद न आए

साल 1999 में कुछ समय के लिए पहली बार राहुल द्रविड़ को आनन-फानन में विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई. लेकिन असल में सौरव गांगुली ने साल 2002 में राहुल द्रविड़ को ज़बरदस्ती विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी थी. तब द्रविड़ ने दादा को ये कहकर कीपिंग करने से इंकार किया था कि आखिरी बार उन्होंने 15 साल की उम्र में विकेटकीपिंग की थी. लेकिन गांगुली को भरोसा था कि द्रविड़ ये कर जाएंगे. गांगुली को टीम में एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ खिलाना था. जो कि बाद में मोहम्मद कैफ हुए जिन्होंने साल 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी भी जितवाई.

2002 में मिली इस ज़िम्मेदारी को निभाते-निभाते द्रविड़ एक पार्ट टाइम कीपर के रूप में ही वर्ल्डकप भी खेल गए. वो जैसे तैसे 2004 तक टीम इंडिया की नैय्या खींचते रहे. इन तीन सालों में उन्होंने टीम इंडिया के लिए बेहतरीन काम किया और विकेट के पीछे कुल 63 शिकार कर डाले. खैर ये बात फिर कभी करेंगे.

एक बार फिर से टीम इंडिया के कप्तान के सामने ऐसी ही परेशानी खड़ी है. टीम का सबसे सफल विकेटकीपर शायद अपने करियर के आखिरी दिनों में है. उनके विकल्प के रूप में ऋषभ पंत और संजू सैमसन कुछ खास नहीं कर पाए हैं. ऐसे में टीम इंडिया को एक राहुल नाम का ही खिलाड़ी है, जिस पर मैनेजमेंट को भरोसा है. टीम को लगता है कि कोई नहीं तो राहुल तो हैं ही.

Dravid Keeping
कीपिंग करते हुए राहुल द्रविड़.

लेकिन 2002 में जिस खिलाड़ी को टीम में शामिल करवाने के लिए द्रविड़ ने कीपिंग की थी. उसने ही मौजूदा समय में टीम इंडिया की इस सोच पर सवाल उठाया है. मोहम्मद कैफ ने कहा है कि राहुल को सिर्फ बैकअप विकेटकीपर के तौर पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है. जिससे कि खिलाड़ियों पर से वर्कलोड को मैनेज किया जा सके. लेकिन स्पेशलिस्ट कीपर के रूप में खिलाना खतरनाक हो सकता है

कैफ ने कहा,

”लोग सोचते हैं कि राहुल भविष्य में हमारे मेन विकेटकीपर बन सकते हैं. लेकिन मैं ये सोचता हूं कि राहुल को सिर्फ एक बैक-अप विकेटकीपर के तौर पर ही इस्तेमाल करना चाहिए. अगर कभी मेन विकेटकीपर चोटिल हो या फिर टीम के साथ ना हो ऐसे में राहुल की मदद ली जा सके. लेकिन अगर आप उनपर एक मेन विकेटकीपर की तरह भरोसा करेंगे तो फिर काम के प्रेशर के साथ-साथ उनके चोटिल होने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी.”

Dhoni Cskk
CSK कैम्प में एमएस धोनी. फोटो: CSK

हो सकता है कि कैफ की ये बात शायद इंडियन क्रिकेट फैन्स को पसंद न आए. इधर पिछले कुछ दिनों से के एल राहुल की इमेज ‘हर काम में फिट बैठने वाला खिलाड़ी’ की तरह बन रही है. लोगों को भरोसा है कि वो जो करेंगे, अच्छा ही करेंगे.

कैफ ने ये साफ किया है कि धोनी को टी20 विश्वकप में खिलाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता तो ये उनके साथ जायज़ नहीं होगा. उन्होंने कहा,

”लोगों की नज़र इस पर है कि धोनी आईपीएल में कैसा खेलते हैं. फिर टी20 विश्वकप को लेकर बात की जाएगी. लेकिन मेरी सोच उससे अलग है. मैं धोनी को उनकी आईपीएल फॉर्म के आधार पर जज नहीं करूंगा. वो एक शानदार बल्लेबाज़ हैं और वो पूरी तरह से फिट भी हैं. वो आईपीएल खेलना चाहते हैं, कप्तानी कर रहे हैं. ऐसे में वो खेलने के लिए उपलब्ध हैं. उनके पास जीत की एक सोच है और वो ये अच्छे से जानते हैं कि प्रेशर से मैच को कैसे जीता जाता है. इसलिए मैं समझता हूं कि उन्हें टीम से बाहर रखना बिल्कुल भी जायज़ नहीं होगा.”

टीम इंडिया के लिए 2003 विश्वकप खेले मोहम्मद कैफ को लगता है कि धोनी को टी20 विश्वकप खेलना चाहिए. लेकिन इस बात पर से पर्दा सिर्फ एमएस धोनी या टीम मैनेजमेंट ही उठा सकते हैं. अगर कोरोना वायरस संक्रमण और लॉकडाउन का असर नहीं हुआ तो 18 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच टी20 विश्वकप खेला जाएगा.


तो, IPL नहीं होने से 16 बरस से खेल रहे क्रिकेटरों का करियर खत्म हो जाएगा! 

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