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कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने के नियमों में क्या बड़ा बदलाव हुआ है?

कोरोनावायरस (coronavirus) के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों को भर्ती करने की पॉलिसी में बदलाव किया है. अब कोविड सेंटर में भर्ती होने के लिए मरीजों को कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट दिखाना जरूरी नहीं है. कोरोना के संदिग्ध मरीजों को कोविड केयर सेंटर, डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर या डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल के सस्पेक्ट वॉर्ड में भर्ती किया जा सकेगा.

राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी कोविड संदिग्ध रोगियों को भर्ती किया जाए. COVID-19 के संदिग्ध मरीजों को संदिग्ध वार्ड में भर्ती किया जा सकता है.  स्वास्थ्य मंत्रालय की नई नीति के मुताबि​क किसी भी मरीज को ऑक्सीजन और दवा देने से मना नहीं किया जा सकता, भले ही वह अलग शहर का ही क्यों न हो. किसी भी मरीज को इस आधार पर भर्ती करने से मना नहीं किया जा सकेगा कि उसके पास उस शहर या जिले का वैध पहचान पत्र नहीं है, जिस जिले या शहर में अस्पताल है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कहा है कि किसी भी मरीज को जरूरत के हिसाब से हॉस्पिटल में भर्ती किया जाए. इसके साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाए कि हॉस्पिटल के बेड ऐसे लोगों द्वारा तो नहीं घेरे गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता ही नहीं है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तीन दिन के अंदर इन निर्देशों को शामिल करते हुए आवश्यक आदेश और पत्र जारी करने की सलाह दी है.

कोरोना से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजन को राहत देने के लिए सरकार ने शुक्रवार को एक और फैसला लिया. कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे अस्पताल, डिस्पेंसरी और कोविड केयर सेंटर्स अब दो लाख रुपए से ज्यादा का पेमेंट भी कैश ले सकेंगे. यह छूट 31 मई तक रहेगी. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि इस तरह के इंस्टीट्यूट को मरीज और पेमेंट करने वाले का पैन या आधार कार्ड लेना होगा. साथ ही मरीज और पेमेंट करने वाले के बीच रिश्ते की जानकारी भी लेनी होगी.


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