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ओ तेरी! तेलंगाना में विधायक की ही नागरिकता चली गई है

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रमेश चेन्नामनेनी. विधायक हैं. तेलंगाना की वेमुलावाड़ा सीट से. तेलंगाना राष्ट्र समिति यानी TRS पार्टी के हैं. अब ये भारत के नागरिक नहीं रहे. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इनकी नागरिकता रद्द कर दी है.

दरअसल, चेन्नामनेनी को 2009 में भारत की नागरिकता मिली थी. कानून के मुताबिक, जो व्यक्ति भारत की नागरिकता हासिल करना चाहता है, उसके लिए जरूरी है कि आवेदन करने से पहले वह 365 दिन लगातार भारत में रहा हो. चेन्नामनेनी पर आरोप है कि वो उस दौरान 365 दिन लगातार भारत में नहीं रहे. गृह मंत्रालय में जांच में पाया कि उन्होंने उस दौरान अपने विदेश दौरों की जानकारी छिपाई.

अपने 13 पन्नों के आदेश में गृह मंत्रालय ने कहा,

“उन्होंने तथ्यों को गलत तरह से पेश किया/ छिपाया. इससे सरकार गुमराह हुई और शुरुआत में उसने गलत फैसला लिया. अगर उन्होंने यह बात साफ की होती कि आवेदन से पहले वह एक साल भारत में नहीं रहे हैं, तो मंत्रालय की अथॉरिटी ने उन्हें नागरिकता नहीं दी होती.”

आदेश में यह भी लिखा है कि मंत्रालय को ये लगता है कि चेन्नामनेनी का भारतीय बने रहना जनता हित में नहीं होगा. क्योंकि वो एक जन प्रतिनिधि हैं और उनका कोई भी कदम उन लाखों लोगों को प्रभावित करता है जो उन्हें फॉलो करते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, रमेश 1993 में जर्मनी चले गए थे. वहां उन्होंने एक जर्मन महिला से शादी की. जर्मनी की नागरिकता मिलने के बाद उन्होंने भारत की नागरिकता छोड़ दी. चेन्नामनेनी कहते हैं कि वह 2009 में भारत आए, उन्होंने नागरिकता के लिए आवेदन किया और फरवरी 2009 में उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई. तब आंध्र प्रदेश विभाजित नहीं हुआ था. उसी साल उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा. तेलुगु देशम पार्टी के टिकट पर. चुनाव जीत गए. हालांकि, कुछ समय बाद ही उन्होंने टीडीपी छोड़ दी. तेलंगाना राज्य की मांग बुलंद करने के लिए तेलंगाना राष्ट्र समिति में शामिल हो गए. उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर 2010 में उपचुनाव हुए. जिसमें वह जीत गए. वह 2014 और 2018 में तेलंगाना विधानसभा के सदस्य चुने गए.

2009 से जारी है नागरिकता पर बवाल

2009 में भारत की नागरिकता मिलने के बाद चेन्नामनेनी ने विधानसभा चुनाव लड़ा. तेलुगु देशम पार्टी की टिकट पर. ये चुनाव वो जीत गए. उन्होंने कांग्रेस के आदि श्रीनिवास को हराया था. चुनाव हारने के बाद श्रीनिवास ने दावा किया कि चेन्नामनेनी ने चुनाव में फर्जी एफिडेविट दिया.

2017 में भी गृह मंत्रालय ने जारी किया था ऐसा ही ऑर्डर

गृह मंत्रालय ने 2017 में चेन्नामनेनी की नागरिकता रद्द की थी. इस आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के आदेश पर स्टे लगाया था. इस साल जुलाई में हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया था कि इस मामले में चेन्नामनेनी का पक्ष नए सिरे से सुना जाए.

अब क्या करेंगे चेन्नामनेनी ?

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद रमेश चेन्नामनेनी ने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन गृह मंत्रालय ने उसे दरकिनार करते हुए आदेश जारी किया. उन्होंने कहा, ‘अपनी नागरिकता की रक्षा के लिए मैं एक बार फिर हाई कोर्ट जाउंगा.’ इससे पहले सितंबर में चेन्नामनेनी ने कहा था कि कानून में 365 दिन ‘लगातार’ वाला हिस्सा 2009 के बाद जोड़ा गया. तब तक उन्हें भारत की नागरिकता मिल चुकी थी.

बता दें कि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है. साथ ही, ‘रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट’ के तहत कोई ऐसा व्यक्ति जो भारत का नागरिक न हो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है.


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