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मालेगांव धमाके की कहानी, जिसमें कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर आरोप तय किए हैं

एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित समेत कुल सात लोगों पर आतंकवाद की साजिश रचने का आरोप तय किया है. ये आरोप 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए बम धमाके के मामले में तय किए गए हैं. इस बम धमाके में सात लोगों की मौत हो गई थी कोर्ट ने आरोपियों पर हत्या और अन्य अपराध का आरोप भी दर्ज किया है. इन आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के अलावा रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और अजय राहिरकर शामिल हैं.

क्या हुआ था 29 सितंबर, 2008 को

मालेगांव में हुए बम धमाके में सात लोग मारे गए थे.
मालेगांव में हुए बम धमाके में सात लोग मारे गए थे.

आगरा से मुंबई जाने वाली मशहूर एबी रोड पर पड़ने वाला मालेगांव एक साधारण सा कस्बा है. यहां लोग हफ्ते में छह दिन पावरलूम पर काम करते हैं और एक दिन फिल्म देखते हैं. कई बार ये फिल्में हिट फिल्मों की पैरोडी होती हैं, जिन्हें मालेगांव में रहने वाले ही बनाते हैं. लेकिन अनुपात की दृष्टि से यहां की ‘बड़ी’ मुस्लिम आबादी इसे एक ‘संवेदनशील’ जगह बना देती है. 29 सितंबर को शुक्रवार की नमाज़ के बाद इसी मालेगांव में भिक्कू चौक पर एक मोटरसाइकिल पर लगे बम में धमाका हो गया. सात लोगों की जान गई और सौ से ज़्यादा लोगों को चोट पहुंची. एक और बम गुजरात के मोदासा में फटा, जिसमें एक लड़के की जान गई. इसके ठीक तीन दिन पहले दिल्ली में भी इसी तरह के बम ब्लास्ट हुए थे. 2006 में भी शब-ए-बारात के दिन यहां सीरियल ब्लास्ट हुए थे, जिनमें 37 लोग मारे गए थे. इसलिए 29 सितंबर, 2008 के बम ब्लास्ट को गंभीरता से लिया गया. महाराष्ट्र पुलिस के आतंक विरोधी दस्ते (एटीएस) को जांच की ज़िम्मेदारी दी गई. इसके चीफ थे हेमंत करकरे. करकरे की अगुआई में ये जांच तब तक चली, जब तक 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमलों में उनकी जान नहीं चली गई.

24 अक्टूबर से शुरू हुईं गिरफ्तारियां

सबसे पहली गिरफ्तारी साध्वी प्रज्ञा की हुई थी, क्योंकि धमाके में इस्तेमाल की गई बाइक की मालिक साध्वी प्रज्ञा ही थीं.
सबसे पहली गिरफ्तारी साध्वी प्रज्ञा की हुई थी, क्योंकि धमाके में इस्तेमाल की गई बाइक की मालिक साध्वी प्रज्ञा ही थीं.

शुरुआत में धमाकों का शक मुस्लिम चरमपंथियों पर किया गया. लेकिन जब जांच हुई तो पता चला कि धमाके के लिए जिस बाइक का इस्तेमाल किया गया है, वो साध्वी प्रज्ञा की है. इसके बाद तो पुलिस साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर तक पहुंच गई. 24 अक्टूबर, 2008 को प्रज्ञा के साथ ही नारायण गोपाल सिंह कलसंघरा और श्याम भंवरलाल साहू को गिरफ्तार कर लिया गया. इन्होंने पूछताछ में राष्ट्रीय जागरण मंच, शारदा सर्वज्ञ पीठ, हिंदू राष्ट्र सेना और अभिनव भारत जैसे संगठनों का नाम लिया. अभिनव भारत ही वो नाम था, जिसने इस केस में एक और नायाब संभावना की ओर इशारा किया कि फौज का भी एक अफसर आतंकी गतिविधि में शामिल है.

अभिनव भारत का नाम आया और गिरफ्तार हो गए कर्नल पुरोहित

साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद कर्नल पुरोहित का नाम सामने आया और पुरोहित गिरफ्तार हो गए.
साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद कर्नल पुरोहित का नाम सामने आया और पुरोहित गिरफ्तार हो गए.

देवलाली में एक रिटायर्ड मेजर थे. नाम था रमेश उपाध्याय. उन्होंने एक संगठन बनाया था, जिसका नाम था अभिनव भारत. देवलाली में पोस्टिंग के दौरान सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित भी अभिनव भारत से जुड़ गए थे. कहा गया था कि अभिनव भारत के जरिए इकट्ठा किए गए पैसों से हथियार और गोला बारूद खरीदे गए, जिनका इस्तेमाल मालेगांव धमाकों में हुआ. इसके बाद एटीएस ने 4 नवंबर 2008 को लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया. पुरोहित पर सेना से 60 किलो आरडीएक्स चुराने का इल्ज़ाम भी लगा. जिस वक्त एटीएस ने पुरोहित को गिरफ्तार किया, वो आर्मी एजुकेशन कोर ट्रेनिंग कॉलेज एंड सेंटर, पचमढ़ी में अरबी सीख रहे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मालेगांव ब्लास्ट के बाद पुरोहित ने कुछ SMS उपाध्याय को भेजे थे. इन्हीं को डिकोड करने पर पुलिस का शक पक्का हुआ और पुरोहित को गिरफ्तार किया गया. पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और बाकियों पर मकोका के तहत केस चलाया गया.

हेमंत करकरे की हत्या और जांच गई एनआईए के पास

मुंबई बम धमाके के दौरान हेमंत करकरे शहीद हो गए. इस हमले के बाद ही एक नई जांच एजेंसी बनी NIA और मालेगांव धमाके की जांच भी इसी के पास आ गई.
मुंबई बम धमाके के दौरान हेमंत करकरे शहीद हो गए. इस हमले के बाद ही एक नई जांच एजेंसी बनी NIA और मालेगांव धमाके की जांच भी इसी के पास आ गई.

इस केस की जांच महाराष्ट्र एटीएस के मुखिया हेमंत करकरे कर रहे थे. मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में हेमंत करकरे शहीद हो गए. इसके बाद इस केस को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी को सौंप दिया गया. जब जांच एनआईए को मिली तो उसने केस हाथ में लेते ही सभी के खिलाफ मकोका लगा दिया. आरोपियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में मकोका को चुनौती दी, लेकिन जुलाई 2010 में हाई कोर्ट ने मकोका के तहत केस चलाने का आदेश दिया.

मई 2016 में एनआईए ने दाखिल की चार्जशीट

जांच के आठ साल के बाद NIA ने चार्जशीट दाखिल की थी.

एनआईए ने 31 मई 2016 को स्पेशल एनआईए कोर्ट में चार्जशीट फाइल की. इस चार्जशीट में एनआईए ने कहा कि रमेश शिवाजी उपाध्याय, समीर शरद कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावड़े, जगदीश महात्रे, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी दयानंद पांडे सुधाकर चतुर्वेदी, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे के खिलाफ सबूत हैं. वहीं एनआईए की ओर से कहा गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शिव नारायण कालसांगरा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा, धानसिंह चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं हैं. इसके बाद मई 2016 में ही कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कई अन्य आरोपियों ने खुद को इस मामले से बरी करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की. इसके बाद 25 अप्रैल, 2017 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सशर्त जमानत दे दी. इसके तीन महीने बाद ही 23 अगस्त 2017 को कर्नल पुरोहित को भी जमानत मिल गई और वो जेल से बाहर आ गए. इसके बाद 27 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया और सभी आरोपियों पर से मकोका हटाने का निर्देश दिया.

30 अक्टूबर 2018 को क्या हुआ?

10 साल पहले हुए बम धमाके में अब अदालत ने कुल सात लोगों पर आरोप तय कर दिए हैं.
10 साल पहले हुए बम धमाके में अब अदालत ने कुल सात लोगों पर आरोप तय कर दिए हैं.

जमानत मिलने के बाद साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सभी आरोपी जेल से बाहर आ गए. इसके बाद कर्नल पुरोहित ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा कि निचली अदालत उनके खिलाफ आरोप तय न करे. लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2018 को कर्नल पुरोहित की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद 30 अक्टूबर 2018 को स्पेशल कोर्ट ने सात लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए. इसमें यूएपीए की धारा 18 और 16, आईपीसी की धारा 120 बी, 302, 307, 324,326,427,153 ए और विस्फोटक कानून की धारा 3,4,5 और 6 के तहत आरोप तय किए गए हैं. यूएपीए की धाराएं आतंकवादद से जुड़ी हैं, वहीं धारा 302 हत्या, 120 बी साजिश रचने और 307 हत्या की कोशिश करने के लिए लगाई गई है. अपने फैसले में सेशन जज वीएस पडलकर ने कहा कि सभी आरोपियों पर अभिनव भारत संस्था बनाने और 2008 में मालेगांव धमाका करने का आरोप लगाया जाता है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी.


 

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