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देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के CM पद से इस्तीफ़े का ऐलान किया

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देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के सीएम पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि वो इस्तीफा देने जा रहे हैं. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस्तीफे का ऐलान किया. फडणवीस दूसरी बार सीएम बने थे. पहली बार वो पांच साल के लिए राज्य के सीएम रहे थे. दूसरी बार करीब 80 घंटों के लिए. फडणवीस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,

‘चुनाव में लोगों ने महायुति को बहुमत दिया. हमें 105 सीटें मिलीं. हमने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन ये जो जनादेश दिया गया वो बीजेपी को मिला, क्योंकि हमने 70 फीसद सीट पर कब्जा किया. हमने कभी ढाई-ढाई साल के सीएम का वादा नहीं किया था. हमने शिवसेना का काफी इंतज़ार किया. शिवसेना ने हमसे चर्चा के बजाए कांग्रेस, एनसीपी से चर्चा की. शिवसेना ने अपना ही मजाक बना लिया. हमारे पास बहुमत के लिए जितने विधायक चाहिए, उतने नहीं है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मैं खुद राज्यपाल के पास जाने वाला हूं और इस्तीफा देने वाला हूं. हमारे ऊपर हॉर्स ट्रेडिंग का जो आरोप लगा रहे है, उन्होंने तो सत्ता के लिए पूरा का पूरा अस्तबल खरीद लिया. मुझे लगता है कि जो तीन पार्टियां साथ में सरकार बनाने की प्लानिंग कर रही है, मुझे लगता है कि ये सरकार खुद अपने बोझ तले दबेगी. क्योंकि इसका पहिया एकसाथ नहीं चल सकता. हमने बीजेपी के रूप में तय किया है कि हम विपक्ष में बैठेंगे. जनता की आवाज़ बनेंगे. किसानों, गरीबों की समस्या सरकार तक ले जाएंगे. जो काम हमने महाराष्ट्र में शुरू किया है, वो आगे चले, इसके लिए हम काम करेंगे. पिछले पांच साल महाराष्ट्र की जनता ने जैसा प्यार हमें दिया मैं उससे खुश हूं. उनका आभार व्यक्त करना चाहता हूं. हमने जो काम किया, पांच साल तक, हर काम हमने बहुत प्रमाणिक तरीके से किया. ईमानदारी से किया. इसी के चलते महाराष्ट्र की जनता का आशिर्वाद भी मिला. हम सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरे.’

उनके इस्तीफे के कुछ ही देर पहले अजित पवार ने भी डिप्टी सीएम के पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद संजय राउत ने कहा था कि वो उनके साथ हैं. और उद्धव ठाकरे अगले 5 साल के लिए महाराष्ट्र के सीएम होंगे.

सीएम और डिप्टी सीएम, दोनों के इस्तीफे के कुछ ही घंटों पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था. कोर्ट ने आदेश दिया था कि महाराष्ट्र की नई नवेली सरकार को 27 नवंबर के दिन शाम 5 बजे से पहले फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा. विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा. इस आदेश के कुछ ही घंटों के बाद दोनों इस्तीफे आ गए.

महाराष्ट्र के ड्रामे की पूरी कहानी-

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही जमकर बवाल मचा हुआ है. चुनाव के पहले कहा गया था कि शिवसेना और बीजेपी साथ मिलकर सरकार बनाएगी. लेकिन नतीजे आने के बाद सीएम पद की दावेदारी को लेकर दोनों पार्टियों में तनाव आ गया. शिवसेना ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया. एनसीपी और कांग्रेस के पास पहुंची. खबरें आईं कि तीनों पार्टियां मिलकर सरकार बनाएगी. चुनाव के नतीजे आए 15 दिन से ज्यादा का समय बीत गया था. लेकिन राज्य को सीएम ही नहीं मिला था, फिर लग गया राष्ट्रपति शासन. शिवसेना, कांग्रेस और NCP ने विरोध किया. कहा कि उन्हें सरकार बनाने का मौका नहीं मिला. बीजेपी की तरफ से कहा गया कि जिसके पास बहुमत है वो सरकार बनाए.

इधर लोगों का ध्यान शिवसेना, NCP और कांग्रेस के विधायकों पर था, और उधर 23 नवंबर के दिन देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली. वहीं एनसीपी के अजित पवार ने भी मंत्री के तौर पर शपथ ली. उन्हें BJP की ओर से डिप्टी सीएम का पद ऑफर किया गया था. सरकार बन गई. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने इस सरकार का विरोध किया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने 26 नवंबर को आदेश दिया कि 27 नवंबर को फ्लोर टेस्ट किया जाए. इसके एक दिन पहले शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के 162 विधायकों की एक मीटिंग हुई. मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में. सभी विधायकों ने शपथ ली. कहा कि पार्टी के लिए ईमानदार रहेंगे, किसी प्रलोभन के आगे नहीं झुकेंगे. साथ ही तीनों पार्टियों के नेताओं ने कहा कि उनके पास बहुमत है. 162 विधायकों का साथ है.

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