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चिराग पासवान ने 'बंगले' पर दावा किया था, चाचा पशुपति पारस ने जब्त करवा दिया!

चुनाव आयोग ने ‘बंगले’ पर कब्जे के लिए चाचा-भतीजे के बीच हो रही खींचतान पर विराम लगा दिया है. ‘बंगला’ यानी लोक जनशक्ति पार्टी का चुनाव चिन्ह. चाचा यानी पशुपति पारस और भतीजे मतलब चिराग पासवान. लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों गुटों को अब अलग-अलग नाम और निशान दे दिया गया है. चिराग पासवान की पार्टी का नाम है लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) और चुनाव चिन्ह है हेलिकॉप्टर. जबकि पशुपति पारस की पार्टी, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नाम से जानी जाएगी और इसे चुनाव चिन्ह मिला है सिलाई मशीन.

पशुपति ने चुनाव आयोग से की थी अपील

इससे पहले चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी के चुनाव चिन्ह बंगला पर अपना दावा किया था. 30 अक्टूबर को दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव का हवाला भी दिया था. इसके बाद केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया कि मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में बंगला चुनाव चिन्ह किसी को भी आवंटित न किया जाए. पारस की अपील के बाद 2 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी का चुनाव चिन्ह बंगला फ्रीज कर दिया था.

इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से अपनी-अपनी पसंद और प्राथमिकता बताने के लिए कहा. 4 अक्टूबर को दोनों ने अपना जवाब दाखिल किया, और 5 अक्टूर को आयोग ने नया नाम और नया निशान जारी कर दिया.

अपने नए चुनाव निशान के साथ पशुपति पारस (PTI)
अपने नए चुनाव चिन्ह के साथ पशुपति पारस (PTI)

इस तरह महीने के आखिर में होने वाले उपचुनाव में दोनों पार्टियां नए नाम और नए निशान के साथ आमने-सामने आ सकती हैं. चुनाव आयोग के फैसले पर पशुपति पारस ने खुशी जताई. कहा कि हमने सिलाई मशीन को अपनी प्राथमिकता बताई थी और हमें ये आवंटित हुआ है.

चिराग पासवान ने बंगला चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जताते हुए उपचुनाव में उतरने की बात कही थी. ( फाइल फोटो- PTI)
चिराग पासवान ने बंगला चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जताते हुए उपचुनाव में उतरने की बात कही थी. ( फाइल फोटो- PTI)

क्या है चाचा-भतीजे का विवाद?

रामविलास पासवान की बनाई लोक जनशक्ति पार्टी उनके निधन के बाद दो गुटों में बंट गई. एक गुट उनके भाई पशुपति पारस का है और दूसरा उनके बेटे चिराग पासवान का. दोनों के बीच विवाद तब शुरू हुआ, जब पार्टी के तमाम सांसद चिराग से अलग होकर पशुपति पारस के समर्थन में आ गए. पहले पारस को संसदीय दल का नेता और फिर पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी पशुपति पारस को ही लोक जनशक्ति पार्टी के नेता के तौर पर मान्यता दी. पारस को लोकसभा में पार्टी का नेता चुने जाने का चिराग पासवान ने विरोध किया और मामला कोर्ट तक ले गए. अब चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और निशान आवंटित कर दिया है.


चिराग की तेजस्वी से दोस्ती, चाचा की बगावत के साथ राजनीतिक बवंडर समझाने वाला इंटरव्यू

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