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क्या गलवान में भारतीय सेना के जवान बिना हथियारों के थे? विदेश मंत्री ने साफ कर दिया है

लद्दाख के गलवान क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए. कहा जा रहा है कि चीन की ओर से भी करीब 40 सैनिक हताहत हुए. हालांकि चीन सरकार ने इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है. भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद सोशल मीडिया पर ऐसा लिखा जा रहा था कि भारतीय सैनिक बिना हथियार के चीनी पक्ष से मसले को सुलझाने गए थे. कई न्यूज़ वेबसाइट ने भी ‘सूत्रों के हवाले से’ ऐसा चलाया. अब इस पूरे मामले में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीजें साफ़ की हैं.

एस. जयशंकर ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक ट्वीट का जवाब देते हुए कहा-

हमें फैक्ट को सही से समझना चाहिए. बॉर्डर ड्यूटी पर सभी सैनिक हर वक्त हथियार के साथ होते हैं. खासकर पोस्ट से निकलते वक्त. 15 जून को गलवान में ड्यूटी पर तैनात सैनिक भी हथियार से लैस थे. 1996 और 2005 के समझौतों के तहत फेस-ऑफ के वक्त हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने की लंबी परंपरा रही है.

राहुल गांधी ने इससे पहले ट्वीट कर सवाल पूछा था कि चीन ने हमारे निहत्थे सैनिकों को मारने की हिम्मत कैसे की? हमारे सैनिकों को शहादत के लिए निहत्था क्यों भेजा गया?

क्या हुआ था 15 जून को?

झड़प के पहले से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) में तनाव पसरा हुआ था. भारत और चीन की सेना आमने-सामने थी. कई बार दोनों देशों के बीच कई स्तरों की बातचीत हुई थी. खबर आई थी कि दोनों सेना पीछे हटने को तैयार हो गई थीं, लेकिन चीन की सेना ने दोबारा गलवान घाटी पर अपने कैंप लगा लिए थे. इनका ही जायजा लेने और चीन की सेना को हटाने के लिए कर्नल बी. संतोष बाबू भारतीय जवानों के साथ कैंप के पास पहुंचे थे, तभी चीनी सेना ने उन पर हमला किया था.

चीन अभी भी पीछे नहीं हटा

इसी बीच, गलवान घाटी में लड़ाई के बाद भी चीन पीछे नहीं हटा है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने अपनी मौजूदगी और मजबूत की है. गलवान घाटी में चीन के 200 के करीब ट्रक और कई सारे टेंट नज़र आ रहे हैं. साथ ही उसने अपने इलाके में भी सैनिकों की संख्या बढ़ाई है, जबकि भारत की ओर से कहा गया था कि 15 जून को झड़प के बाद डिसएंगेजमेंट हो रहा है.

पीएम मोदी ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

सीमा पर अब भी तनाव है. हालांकि बातचीत भी चल रही है. इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने 19 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. 17 जून को पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा-

हमारे लिए भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है. इसकी रक्षा करने से हमें कोई भी रोक नहीं सकता. इस बारे में किसी को भी जरा भी भ्रम या संदेह नहीं होना चाहिए. भारत शांति चाहता है. लेकिन भारत को उकसाने पर हर हाल में निर्णायक जवाब भी दिया जाएगा. 


विडियो- चीन-भारत के बीच हिंसक झड़प में शहीद हुए संतोष बाबू की मां ने कहा- मुझे गर्व है

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