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कुछ लोगों को फ्री, तो कुछ को 2400 से भी महंगी पड़ेगी कोविड वैक्सीन, जानिए पूरा हिसाब-किताब

देश में कोरोना वायरस लगभग बेकाबू है. हर राज्य और हर शहर से कोविड-19 को लेकर खबरें आ रही हैं. कहीं ऑक्सीजन की कमी है, तो कहीं एंबुलेंस की. कहीं दवाईयों की कमी हो रही है, तो कहीं अस्पतालों में बेड्स नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कार्यक्रम भी चलाना है, वो भी उस स्थिति में जब स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं और हेल्थवर्कर्स कोविड मरीजों को बचाने के लिए दिनरात एक किए हुए हैं. ये बात भी किसी से छिपी नहीं है कि वैक्सीन को लेकर देश की जनता के दिल में भी तमाम सवाल हैं. वहीं दूसरी तरफ केंद्र व राज्यों के बीच वैक्सीन की सप्लाई और दामों को लेकर भी रस्साकशी जारी है. ऐसे में पूरे देश में वैक्सीनेशन कार्यक्रम कैसे होगा? और केंद्र और राज्यों के बीच वैक्सीनेशन को लेकर इस तनातनी का क्या कारण है? आइये समझने की कोशिश करते हैं.

केंद्र का वैक्सीन पर क्या कहना है?

25 अप्रैल की रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने 4 पन्नों का एक बयान ट्वीट किया. इस बयान में उन्होंने कहा,

केंद्र सरकार, जनता को वैक्सीन देने के लिए प्रतिबद्ध है. राज्यों को फ्री वैक्सीन मुहैया कराई गई हैं और आगे भी ऐसा होता रहेगा. राज्यों के कहने पर ही 18 से 45 साल वालों को वैक्सीन देने का फैसला लिया गया. 1 मई से शुरू होने वाले कोविड-19 वैक्सीनेशन फेज़ के बारे में गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने अपने बयान में आगे कहा,

अभी तक 14 करोड़ डोज राज्यों को दी गई हैं. कुछ करोड़ वैक्सीन अभी स्टॉक में हैं. राज्यों को ये वैक्सीन फ्री दी गई हैं. आगे भी 50 प्रतिशत वैक्सीन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाती रहेंगी. बची 50 प्रतिशत कॉर्पोरेट और प्राईवेट सेक्टर को दी जाएंगे ताकि वैक्सीनेशन का काम तेजी से हो सके. मुझे राज्यों द्वारा शिकायत किए जाने का अब कोई कारण नहीं दिखता.

राज्यों का क्या कहना है?

वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार के अपने दावे हैं, लेकिन गैर बीजेपी शासन वाले राज्यों का कहना है कि वो 1 मई से 18 से 45 साल वालों को वैक्सीन लगाना शुरू नहीं कर सकते है, क्योंकि वैक्सीन है ही नहीं. 25 अप्रैल को छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और झारखंड के स्वास्थ्य मंत्रियों ने एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस की, जिसमें केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए गए.

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि उन्होंने वैक्सीन को लेकर सीरम इंस्टीट्यूट से बात की थी. उनके मुताबिक उन्हें ये बताया गया कि 15 मई से पहले वैक्सीन नहीं मिल पाएगी. आजतक की खबर के मुताबिक झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का कहना है कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन उत्पादन को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया है. हम लोग उनसे वैक्सीन नहीं खरीद सकते. इसके बावजूद कि हम पे (Pay) करने को तैयार हैं.

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वैक्सीन लगाने की तैयारी करता एक हेल्थ वर्कर. फोटो- PTI

राज्यों को महंगी मिल रही है वैक्सीन?

वैक्सीनेशन को लेकर एक पेंच और भी है. राज्यों को जो वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक से मिलेगी, उसकी कीमत काफी अधिक है. राज्यों को सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन यानी कोविशील्ड के लिए 400 रुपये चुकाने होंगे और भारत बायोटेक की वैक्सीन के लिए 600 रुपये देने होंगे. ये कीमत केवल 1 डोज की है. यानी राज्यों को एक शख्स की दोनों डोज के लिए 800 से लेकर 1200 रुपए तक अदा करने होंगे.

सीरम इंस्टीट्यूट केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति डोज के हिसाब से वैक्सीन दे रहा है. हालांकि सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने कहा है कि फिलहाल ये शुरुआती कीमत है. यानी ऐसा संभव है कि आने वाले वक्त में सीरम इंस्टीट्यूट केंद्र और राज्यों से 400 रुपये प्रति डोज ही वसूल करे. कंपनी द्वारा 21 अप्रैल को किए गए इस ट्वीट को देखिए. इसमें राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को किस दर वैक्सीन मिलेगी इसकी कीमत साफ साफ लिखी है.

वहीं कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक भी इस बात को साफ कर चुकी है कि राज्य सरकारों को वैक्सीन की एक डोज 600 रुपये की मिलेगी, वहीं प्राईवेट अस्पतालों को इसकी एक डोज 1200 रुपये की मिलेगी. निर्यात के लिए 15 से 20 डॉलर यानि करीब 1495 रुपये प्रति डोज तय किए गए हैं.

वैक्सीन को लेकर तस्वीर साफ क्यों नहीं?

दरअसल अभी देश में 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है. ये वैक्सीन, केंद्र द्वारा राज्यों को दी जा रही है. अब 18 से 45 की उम्र के लोगों को जो वैक्सीन लगाई जाएगी, उसकी व्यवस्था राज्यों को खुद से करनी होगी. समझने वाली बात ये भी है कि सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक के द्वारा जो वैक्सीन बनाई जाएगी, उसका 50 प्रतिशत, केंद्र सरकार ले लेगी. बचे 50 प्रतिशत में से राज्य और निजी कंपनियों को वैक्सीन दी जाएगी.

1 मई से 18 से 45 साल वाले लोगों को वैक्सीन दी जानी है. अगर इस संख्या को 80 करोड़ मान लिया जाए तो करीब 160 करोड़ डोज की जरूरत होगी, क्योंकि एक शख्स को वैक्सीन की 2 डोज दी जाती हैं. फिलहाल इतनी संख्या में उत्पादन करना काफी कठिन है. दूसरी बात ये भी है कि कुछ अन्य राज्यों ने भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को वैक्सीन का ऑर्डर दे दिया है और कंपनियां पहले उन्हें वैक्सीन मुहैया कराएंगी.

पूरे देश में वैक्सीन का एक जैसा दाम क्यों नहीं?

20 अप्रैल को कांग्रेस के नेताओं ने एक ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश की सरकार ‘एक देश एक टैक्स’ और ‘एक देश एक चुनाव’ में यकीन करती है, लेकिन उसे एक देश, एक दाम में उसका भरोसा नहीं है. कांग्रेस की मांग है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां अगर केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति डोज दे रही हैं, तो राज्य सरकारों को भी 150 रुपये के हिसाब से ही वैक्सीन मिलनी चाहिए.

आपको बता दें कि फिलहाल सीरम इंस्टीट्यूट हर महीने के हिसाब से 6.5 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन कर रही है. कंपनी का अनुमान है कि जुलाई तक यह उत्पादन 10 करोड़ डोज प्रति माह तक हो जाएगी. भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की संख्या देश में मौजूद वैक्सीन की करीब 10 फीसदी है. अमेरिका से वैक्सीन निर्माण के लिए आने वाली वस्तुओं पर भी रोक थी, जिसे भारी विरोध के बाद अब खत्म किया गया है.

अब इस बात को समझिए कि 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लग रही वैक्सीन की कीमत 150 रुपये प्रति डोज होगी, 18 से 45 साल वालों के लिए कोविशील्ड की कीमत 400 रुपये प्रति डोज और कोवैक्सीन की कीमत 600 रुपये प्रति डोज होगी. इसके अलावा प्राईवेट अस्पतालों को कोविशील्ड 600 रुपये डोज और कोवैक्सीन 1200 रुपये प्रति डोज पड़ेगी. प्राईवेट अस्पताल इन वैक्सीन्स को किस रेट में देंगे ये देखने वाली बात होगी.


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