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कठुआ केस में फैसला आ गया है, एक बरी, छह दोषी करार

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कठुआ रेप और मर्डर केस का फैसला आ गया. सात में से छह आरोपी दोषी करार दिए गए हैं. एक आरोपी- विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया गया है. दोषियों के नाम हैं- सांजी राम, दीपक, आनंद दत्ता, तिलक राज, प्रवेश और सुरेंद्र. जनवरी 2018 में हुए इस अपराध का केस पठानकोट के जिला और सेशन्स कोर्ट में चल रहा था. इन-कैमरा ट्रायल 3 जून को खत्म हुआ. उसी दिन फैसले के लिए 10 जून की तारीख तय की गई थी.

घटना की टाइमलाइन: 

10 जनवरी, 2018: जब बच्ची लापता हुई
इस अपराध की शुरुआत हुई थी 10 जनवरी, 2018 को. जम्मू के कठुआ में रसाना नाम का गांव है. रहने वाली आठ साल की एक बच्ची घोड़ों को चराने जंगल गई. घोड़े शाम को घर लौट आए, लेकिन बच्ची नहीं आई. बहुत तलाश किया गया, मगर वो मिली नहीं. बच्ची बकरवाल समुदाय की थी. ये घुमंतु चरवाहों की कम्यूनिटी है. 12 जनवरी को बच्ची के पिता ने नजदीकी हीरानगर पुलिस थाने में बच्ची की गुमशुदगी की FIR दर्ज़ कराई.

ये दीपक खजूरिया है. स्पेशल पुलिस ऑफिसर. अदासत ने इसे भी दोषी माना है (फोटो: रॉयटर्स)
ये दीपक खजूरिया है, स्पेशल पुलिस ऑफिसर. अदालत ने इसे भी दोषी माना है (फोटो: रॉयटर्स)

17 जनवरी को पास के जंगल में बच्ची की लाश मिली
ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला कि हत्या किए जाने से पहले उसके साथ गैंगरेप हुआ था. 22 जनवरी को ये मामला जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. फरवरी 2018 में एक कट्टरपंथी समूह ने जम्मू में आरोपियों का समर्थन करते हुए एक जुलूस निकाला. मार्च के महीने में बीजेपी के दो नेता- चौधरी लाल सिंह और चंदर प्रकाश गंगा, जो तत्कालीन राज्य सरकार में मंत्री भी थे, ने एक रैली में हिस्सा लिया. ये रैली आयोजित की थी हिंदू एकता मंच ने. इसमें हीरानगर और कठुआ विधानसभा सीटों के बीजेपी विधायक राजीव जसरोतिया और कुलदीप राज भी मौजूद थे. इस रैली में मामला CBI को सौंपे जाने की बात हुई.

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, इसी मंदिर के अंदर रखकर बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया(फोटो: रॉयटर्स)
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, इसी मंदिर के अंदर रखकर बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया (फोटो: रॉयटर्स)

मार्च 2018 में आठ आरोपियों की गिरफ़्तारी हुई
इनमें चार पुलिसकर्मी भी थे. इनके ऊपर सबूत मिटाने के आरोप थे. एक आरोपी नाबालिग के नाबालिग होने की बात थी. बाद में जांच हुई, तो उसकी उम्र 19 बरस निकली. जांच से पता चला कि बच्ची को अगवा करके गांव के एक मंदिर में रखा गया था. वहीं उसे नशीली दवाएं खिलाकर टॉर्चर किया गया. उसके साथ गैंगरेप किया गया और फिर पहले गला दबाकर और फिर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी गई. बाद में उसकी लाश फेंक दी गई. चार्जशीट के मुताबिक, बलात्कार इसलिए किया गया ताकि स्थानीय बकरवाल समुदाय को सबक सिखाया जाए. वो डरकर इलाका छोड़ दें. इस बात पर बहुत सांप्रदायिक प्रदर्शन भी हुए. मामला सुर्खियों में आया. इसके बाद बीजेपी के दोनों मंत्री, जिन्होंने आरोपियों के समर्थन में आयोजित रैली में हिस्सा लिया था, को इस्तीफ़ा देना पड़ा.

केस जम्मू से पठानकोट शिफ्ट कर दिया गया
कठुआ में वकीलों ने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को चार्जशीट फाइल करने से रोकने की कोशिश भी की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकारा. जम्मू के अंदर इस केस को लेकर जैसा माहौल था और जिस तरह से आरोपियों के पक्ष में समर्थन दिख रहा था, उसे देखते हुए वहां इस मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल उठ रहे थे. फिर मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ये केस जम्मू-कश्मीर से पठानकोट शिफ्ट कर दिया.

दोषियों में कौन क्या था? 
गांव का मुखिया सांजी राम इस मामले का मास्टरमाइंड था. वो उस मंदिर का भी पुजारी थी, जहां बच्ची को रखकर बलात्कार किया गया. दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा, ये दोनों स्पेशल पुलिस ऑफिसर थे. तिलक राज हेड कॉन्स्टेबल था. इन सबको अदालत ने दोषी माना है. सांजी राम का बेटा विशाल भी आरोपी था. मगर परिवार और उनके वकील का कहना था कि वारदात के समय विशाल मेरठ के अपने कॉलेज में परीक्षा दे रहा था. इस पर कई अपडेट्स भी आईं. बताया गया कि उसने अपनी जगह अपने दोस्त को परीक्षा देने बिठाया था. खुद वो कठुआ में मौजूद था. बाद में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स आईं, जिसके मुताबिक एक CCTV फुटेज में विशाल परीक्षा हॉल के अंदर दिख रहा था. अब अदालत ने विशाल को बरी कर दिया है. सातों आरोपियों में वो अकेला है, जिसे बरी किया गया है.


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