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दिल्ली दंगा केस: जमानत के 2 दिन बाद भी रिहाई का इंतजार कर रहे स्टूडेंट्स को कोर्ट ने बड़ी राहत दी है

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने नताशा नरवल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को ज़मानत पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इसकी कॉपी तिहाड़ जेल को भेजी जा रही है. संभावना है कि जल्द ही तीनों जेल से बाहर आ सकते हैं.

नताशा, देवांगना और आसिफ 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े केस में एक साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं. इन पर UAPA के तहत आरोप हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 जून को तीनों की ज़मानत स्वीकार कर ली थी. लेकिन 2 दिन बाद भी इनकी रिहाई नहीं हुई. इस पर तीनों के वकील ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, और तत्काल ज़मानत पर रिहा करने का आदेश जारी करने की गुहार लगाई. हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब ये केस सुप्रीम कोर्ट और ट्रायल कोर्ट में है तो हाईकोर्ट क्यों आए. हाईकोर्ट ने ये कहकर मामला कड़कड़डूमा कोर्ट में भेज दिया.

इसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई हुई. एडिशनल सेशन जज रविंदर बेदी की अदालत ने तीनों को तत्काल रिहा किए जाने का आदेश जारी किया. कोर्ट ने कहा कि रिहाई का आदेश तिहाड़ जेल को भेजा जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि जहां तक ए़ड्रेस के पुलिस वेरिफिकेशन का सवाल है तो वो इनकी रिहाई के बाद भी हो सकता है. कोर्ट ने वेरिफिकेशन की रिपोर्ट 23 जून तक पेश करने का भी निर्देश दिया.

बता दें कि नताशा और देवांगना JNU की छात्राएं हैं, जबकि आसिफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की डिविज़न बेंच ने 15 जून को इनकी ज़मानत पर फ़ैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि ये बात समझना ज़रूरी है कि विरोध करना ग़ैर-कानूनी नहीं हो सकता. विरोध के अधिकार को UAPA के तहत आतंकवादी गतिविधि नहीं कहा जा सकता.

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि इस मामले में अभियोजन पक्ष के कुल 740 गवाह हैं. उनकी अभी जांच होनी है. इस आधार पर दिल्ली पुलिस ने इनकी बेल का विरोध किया था. लेकिन कोर्ट ने इस पर पुलिस को फटकार लगते हुए कहा कि

“कोर्ट कब तक इंतज़ार करे? आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित ट्रायल का अधिकार है.”

हाईकोर्ट ने तीनों की जमानत मंजूर कर ली, तो उसके खिलाफ दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. पुलिस की ओर से याचिका में आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट में मामला जमानत का था, लेकिन उसने मिनी ट्रायल कर दिया. UAPA के प्रावधानों को सिरे से नजरअंदाज कर दिया. इसका असर आने वाले समय में NIA की ओर से दर्ज सभी केसों पर पड़ सकता है.

दिल्ली पुलिस ने तीनों स्टूडेंट्स के पते-ठिकाने और मुचलकों के वेरिफिकेशन के लिए 21 जून तक का समय मांगा. कहा कि तीनों दिल्ली के बाहर रहने वाले हैं. समय की कमी के कारण इनके परमानेंट एड्रेस का वेरिफिकेशन नहीं हो पाया. पुलिस ने बताया कि उसने UIDAI से आरोपियों की आधार डिटेल्स भी मांगी गई हैं.

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन लगाई है. बता दें कि स्पेशल लीव पिटीशन ये अधिकार देती है कि यदि किसी स्थिति में कानून की व्याख्या या किसी संदेह का प्रश्न उठता है, तो भारत के किसी भी अदालत में चल रहे मामले या सुनाए गए फ़ैसले को लेकर सीधा सुप्रीम कोर्ट में जाया जा सकता है.


दिल्ली दंगों के मामले में नताशा, देवांगना और आसिफ को बेल देते हुए हाई कोर्ट ने क्या बड़ी बात कह दी?

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