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करण जौहर ने जो वजह बताई, उसके बावज़ूद भी ‘गुड न्यूज़’ में एक एक्स्ट्रा W लगाना ग़लत ही है

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करण जौहर. अपनी पहली ही फिल्म से धूम मचा चुके डायरेक्टर. बाद में प्रोडक्शन, शो होस्टिंग, एक्टिंग और कॉस्ट्यूम डिज़ाइनिंग में भी अपना हाथ आजमाया. ‘बॉम्बे वेलवेट’ जैसे इक्का दुक्का प्रोजेक्ट्स छोड़ दें तो कमोबेश हर प्रोजेक्ट में सफलता पाई. सफलता ऐसी कि उनके बारे में हर कोई जानता है- जो कोई भी बॉलीवुड के बारे में जानता है, जो कोई भी बॉलीवुड के बारे में नहीं जानता है, जो कोई भी फिल्मों के बारे में जानता है, जो कोई भी फिल्मों के बारे में नहीं जानता है.

# हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी-

करण जौहर. जो अपने को री-इन्वेंट करते रहते हैं. अपने को ‘करेक्ट’ करते रहते हैं. शबाना आज़मी के एक कॉल के बाद उनको एहसास हुआ कि ‘कुछ कुछ होता है’ एक पॉलिटिकली करेक्ट मूवी नहीं थी. खासतौर पर महिलाओं के चित्रण को लेकर. उनकी इस स्वीकार्यता की चारों तरफ तारीफ़ हुई थी. तब जबकि ये स्वीकार करते-करते उन्हें दशकों लग गए.

हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी.

बहरहाल, देर आए दुरुस्त आए. और अपनी इस स्वीकार्यता से केवल वो ही भार मुक्त नहीं हुए बल्कि औरों के लिए भी एक मिसाल बनी. फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए. उनके फैंस के लिए. बॉलीवुड फॉलो करने वाले हम जैसे आम लोगों के लिए. (याद रखिए कि लोग स्टार्स को बहुत फॉलो करते हैं, इसलिए उनका एक कदम मिसाल बन सकता है फिर चाहे वो अच्छी हो या बुरी.)

अपने इसके बाद, जैसा उन्होंने कहा कि उन्होंने बड़े मजबूत किरदार लिखे, ऐसे जिनमें इमोशनल डेप्थ होती है. निजी तौर पर ‘मुझे ए दिल है मुश्किल’ देखकर काफी हद तक ‘डेप्थ’ वाली बात नज़र आई. तब तो और भी अच्छा लगा जब गुड न्यूज़ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान करीना को अपने प्रोडक्शन हाउस की ‘अनऑफिशियल ब्रांड एम्बेसेडर’ घोषित करते हुए उन्होंने बोला- ज़ल्द ही एक्ट्रेसेज़ को ‘प्रोडक्शन क्रेडिट’ दिया जाने लगेगा. तो क्या करण बदल चुके हैं? शायद. लेकिन…

[आगे की कहानी पढ़ने से पहले ट्रेलर भी देख ही लीजिए]-

# कल हो न हो-

अगर इंसान बेहतरी के लिए बदल सकता है तो उसके लिए यू-टर्न लेना भी उतना ही आसान है. किरदारों का ये दोहरापन किसी एक इंडस्ट्री, किसी एक प्रफेशन तक सीमित नहीं हैं.

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि इसी ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान उन्होंने गुड न्यूज़ (Good Newws) मूवी के टाइटल में एक एक्स्ट्रा W डालने के लिए राज मेहता, और उनके ‘वहम’ को दोषी ठहरा दिया. अब देखिए राज मेहता है इस मूवी के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर हैं करण जौहर. और हम सब जानते हैं कि बात इसकी उलटी भी होती, तो भी वीटो पावर करण जौहर के पास ही होती.

तो कहने का मतलब ये कि अगर करण जौहर चाहते तो इस एक एक्स्ट्रा W को आसानी से हटा सकते थे. और बात केवल अंधविश्वास को बढ़ावा देने की ही नहीं, अपने वादे अपने स्टेंड से पलट जाने की भी है.

कैसे? चलिए शुरू से शुरू करते हैं. ये इत्तेफाक नहीं था कि करण जौहर की प्रोड्यूस या डायरेक्ट की हुई पहली पांच फिल्मों के नाम K से शुरू होते थे. क्यूंकि करण जौहर को तब लगता था कि K से मूवी का नाम शुरू होने से ‘कृपा’ बरसेगी. जैसा एकता कपूर को लगता है, जैसा राकेश रोशन को लगता है. ये सिलसिला 2006 तक चला.

लेकिन फिर उन्होंने ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ देखी, उसे देखकर बड़े प्रभावित हुए. उसमें कुलभूषण खरबंदा का करैक्टर तो याद होगा न आपको. अरे, खुराना (Kkhurana) जो अपने पंडित बटुक महाराज से कंसल्ट किए बिना कोई काम नहीं करता. बस, उधर मूवी में खुराना ने अपने नाम से एक एक्स्ट्रा K हटाया, इधर करण ने अहद ले लिया- नो मोर के. नो मोर सुपरस्टीशन. उसके बाद करण की अलगी मूवी का नाम था दोस्ताना. टाइम लाइन देख लीजिए 2006 तक की 6 मूवीज़-

Kuch Kuch Hota Hai (1998)
Kabhi Khushi Kabhie Gham (2001)
Kal Ho Naa Ho (2003)
Kaal (2005)
Kabhi Alvida Naa Kehna (2006)

कट टू 2008- Dostana. >> गुड मूव

कट टू 2019- Good Newws >> यू टर्न


वीडियो देखें:

मरजावां: मूवी रिव्यू-

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