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तालिबान से डर के बीच काबुल में प्रोटेस्ट करतीं ये औरतें उम्मीद की पहली किरण हैं

अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से कब्जा हो चुका है. लोग 1996 से 2001 के दौर को दोबारा जीना नहीं चाहते. ऐसे में कई लोग देश छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है. तालिबान की वापसी से सबसे ज्यादा असुरक्षित अफगानिस्तान की महिलाएं फील कर रही हैं. महिलाओं पर अत्याचार, उन्हें बुर्के और घर की चारदीवारी में बांध देने की खबरें हमारे सामने लगातार आ रही हैं.

तालिबान दावे कर रहा है कि वो बदल चुका है. वो इस बार प्रोग्रेसिव रुख अपनाएगा. खबर है कि तालिबान ने कहा है कि महिलाएं अपने काम जारी रख सकती हैं. लेकिन एक बार बुरा दौर देख चुकी महिलाओं को तालिबान के इन वादों और दावों पर भरोसा नहीं है. 17 अगस्त को महिलाओं ने काबुल में तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन किया. ये पहली बार था जब अफगानिस्तान की महिलाओं ने तालिबान के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. अफगानिस्तान की न्यूज़ एजेंसी Pajhwok Afghan News ने इस प्रदर्शन का वीडियो जारी किया है.

 

ये वीडियो डॉयचे विले की पत्रकार शकीला एब्राहिमखिल ने ट्वीट किया. उनके वीडियो को अल जजीरा के अफगानिस्तान करेस्पॉन्डेंट हमीद मोहम्मद शाह ने रीट्वीट किया. साथ में उन्होंने जो लिखा उसका मोटा-माटी हिंदी मतलब था-

काबुल में तालिबान के आने के बाद महिलाओं का प्रदर्शन.
हमें अधिकार चाहिए
हमें सोशल सिक्योरिटी चाहिए.
हमारे पास शिक्षा का, राजनीति में हिस्सेदारी का अधिकार है

खास बात ये है कि इस वीडियो में तालिबानी लड़ाका भी है जो उन महिलाओं को शांत कराने की कोशिश करता दिख रहा है. लेकिन उन पर बल का प्रयोग नहीं कर रहा है. हो सकता है कि ये तालिबान की नई रणणीति का नतीजा हो, जिसके तहत वो एक बर्बर संगठन की अपनी छवि को धोने की कोशिश कर रहा है.

अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के साथ ही देशभर से महिलाओं के नज़रबंद होने, उन्हें काम पर नहीं जाने देने, लड़कियों को स्कूल नहीं जाने देने की खबरें लगातार आ रही हैं. एक दिन पहले ही CNN की पत्रकार क्लैरिसा बुर्का पहनकर रिपोर्ट करती दिखी थीं. इसे लेकर भी कई लोगों ने लिखा कि ये तालिबान के आतंक को दिखाता है कि एक विदेशी पत्रकार को भी जान बचाने के लिए हिजाब का सहारा लेना पड़ रहा है.

अफगानिस्तान की अधिकांश महिलाएं तालिबान के शासन से डरी हुई हैं. सोशल मीडिया ऐसी महिलाओं के अकाउंट्स से भरा पड़ा है. कई महिलाओं ने अपनी पहचान छुपाकर अपना दर्द जाहिर किया है. ऐसे में इस वीडियो का सामने आना ऐसी कई महिलाओं के लिए हिम्मत देने वाला होगा जो खुद को घर में बंद रखने को मजबूर हैं.

क्या होंगे महिलाओं के अधिकार

17 अगस्त को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान की ओर से कहा गया कि वो महिलाओं को शरिया कानून के तहत अधिकार और आजादी देंगे. उन्होंने कहा कि महिलाएं हेल्थ सेक्टर और स्कूलों में काम कर सकेंगी. मीडिया में महिलाओं के काम करने के सवाल पर तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि जब तालिबान सरकार बन जाएगी तब साफ-साफ बताया जाएगा कि शरिया कानून के हिसाब से महिलाओं को क्या-क्या छूट मिलेगी.


वीडियो- अफ़ग़ानिस्तान में मुस्लिमों के शरिया कानून का हवाला देकर कैसे धोखा देता रहा तालिबान?

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