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शहाबुद्दीन का इतना खौफ कि जज ने करा लिया ट्रांसफर!

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शहाबुद्दीन को पहले बिहार जानता था. अब 11 साल बाद जेल से छूटने पर देश का बच्चा-बच्चा जानने लगा है. RJD का पूर्व सांसद शहाबुद्दीन बिहार में डर का दूसरा नाम है. इसी डर से सीवान से एक जज ने अपना ट्रांसफर करा लिया. यही जज 2014 में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाइस था. दो भाइयों को तेजाब से नहलाने के जुर्म में.

जुर्म के दस साल बाद मिली थी सजा

मामला 16 अगस्त 2004 का. सीवान के बिजनेसमैन चंदा बाबू के दो बेटे. सतीश राज और गिरीश राज. इनको तेजाब से नहलाकर मर्डर करने का मेन मुजरिम था शहाबुद्दीन. इसका अकेला गवाह था इनका एक और भाई राजीव रोशन. 16 जून सन 14 को उसका भी मर्डर हो गया. सीवान कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रहे थे जज अजय कुमार श्रीवास्तव. 11 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

उधर रिहाई इधर तबादला

बीती 7 सितंबर को शहाबुद्दीन की रिहाई हुई. 9 तारीख को अजय ने अपना ट्रांसफर पटना कोर्ट में करने के लिए अप्लाई कर दिया. पटना हाईकोर्ट ने फुल सीरियसली लिया एप्लीकेशन और ऑर्डर आगे बढ़ा दिया. अभी 3 साल पूरे नहीं हुए थे इनको सीवान कोर्ट में आए. जब शहाबुद्दीन पर फैसला सुनाया तो बड़ी वाहवाही हुई थी. अब भागे जा रहे हैं. भैया कउन मुश्किल मोल ले. घर परिवार बाल बच्चे वाले आदमी.

कानून जानने वाले इसको रूटीन बता रहे हैं पब्लिक में. लेकिन अंदर की बात तो आप भी समझ ही गए होंगे, हां कि न!

बिहार सरकार ने उसके खिलाफ कमजोर वकील लगाया है!

हम नहीं, सुशील मोदी कहे हैं. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सुशील मोदी. बता रहे हैं कि बिहार सरकार ने शहाबुद्दीन की बेल रद्द करने के लिए जो अर्जी सुप्रीम कोर्ट में डाली है. उसकी सुनवाई के लिए गोपाल सिंह जैसा कमजोर वकील लगा रखा है. पहिली ही बहस में उसकी फूंक सरक जाएगी.

तुम्हारे कान में बात डाल दे रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में दो अर्जी पड़ी हैं ऐसी. एक तो चंद्रकेश्वर प्रसाद माने चंदा बाबू ने, और दूसरी बिहार सरकार ने.


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Judge in Bihar who sentenced Shahabuddin seeks transfer

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