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जम्मू-कश्मीर: पासपोर्ट नियमों में क्या बदलाव हुए कि सरकारी कर्मचारियों ने सिर पकड़ लिया?

एक नए सरकारी आदेश ने जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. गुरुवार, 16 सितंबर को केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों के लिए सर्कुलर के जरिये ये आदेश जारी किया गया. इसके मुताबिक अब जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों को पासपोर्ट हासिल करने के लिए विजिलेंस क्लियरेंस लेना होगा. इसके लिए उनका वेरिफिकेशन जिन नियमों के तहत किए जाएगा, उनमें कुछ नई बातें जोड़ी गई हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसी ने कर्मचारियों को परेशान कर दिया है.

दरअसल, अब समय-समय पर जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों के कैरेक्टर और उनकी पिछली जिंदगी के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी. अगर इस रिपोर्ट में गंभीर कमी या खामी निकल गई तो कर्मचारी को पासपोर्ट नहीं मिलेगा और नौकरी जाने की भी नौबत आ सकती है.

किस आधार पर बनेगी कैरेक्टर रिपोर्ट?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नए आदेश के अनुसार जम्मू कश्मीर के सभी सरकारी कर्मचारियों को पासपोर्ट के लिए विजिलेंस क्लियरेंस हासिल करना होगा. इसके लिए उनकी कैरेक्टर और एंटीसीडेंट (यानी नौकरी से पहले की जिंदगी से जुड़ी) रिपोर्ट बेदाग होनी चाहिए.

बेदाग से मतलब?

मतलब ये रिपोर्ट कर्मचारियों को तभी मिलेगी जब वे गैरकानूनी, देश-विरोधी, असंवैधानिक या अन्य प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल नहीं पाए जाएंगे. मिसाल के लिए तोड़फोड़, जासूसी, राजद्रोह, आतंकवाद, देशद्रोह/अलगाववाद , विदेशी हस्तक्षेप, हिंसा के लिए उकसाना आदि में शामिल नहीं होना है. अगर कोई कर्मचारी इन गैरकानूनी कामों में शामिल पाया जाएगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. उसे कैरेक्टर रिपोर्ट से भी वंचित किया जा सकता है. फिर पासपोर्ट मिलना तो दूर नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है.

कौन से बदलाव बने चिंता के कारण?

आदेश के तहत ‘जम्मू और कश्मीर सिविल सेवा (चरित्र और पूर्ववृत्त) निर्देश, 1997’ में हाल ही में कुछ नए नियम जोड़े गए हैं. इन नियमों को संविधान के आर्टिकल 311 (2) के खंड (क) के प्रावधानों के तहत पारित किया गया है. ये प्रशासन को सुरक्षा के आधार पर कर्मचारी के खिलाफ जांच गठित किए बिना ही उसे बर्खास्त करने की शक्ति देता है.

इन नियमों में कहा गया है,

“अगर किसी सरकारी कर्मचारी का कोई रिश्तेदार या परिवार का कोई सदस्य तोड़फोड़, जासूसी, राजद्रोह, आतंकवाद, देशद्रोह/अलगाववाद, विदेशी हस्तक्षेप, हिंसा के लिए उकसाना या किसी अन्य असंवैधानिक काम में शामिल है, और इस बात की जानकारी उस सरकारी कर्मचारी को है तो उसे तुरंत ही पुलिस को इसके बारे में बताना होगा.

यही नहीं, अगर सरकारी कर्मचारी ने इस तरह के गैरकानूनी काम और उसे करने वाले के प्रति सहानुभूति दिखाई है या पुलिस को जानकारी नहीं दी, तो उस स्थिति में उस पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. ऐसे कर्मचारी की नौकरी भी जा सकती है. “

रुक सकता है प्रमोशन

इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि नियमों के तहत समय-समय पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी. प्रतिकूल, या कहें खराब रिपोर्ट वाले कर्मचारियों की सूची प्रशासनिक विभागों को भेजी जाएगी. वहां उनका सारा रिकॉर्ड रखा जाएगा. इससे क्या होगा? अगर किसी कर्मचारी का प्रमोशन होना है और उसकी कैरेक्टर रिपोर्ट में कुछ खामियां हैं तो उसका प्रमोशन उसी वक्त रोका जा सकता है.

स्क्रीनिंग कमेटी के हाथ में सारी पावर

नए नियमों में ये भी कहा गया है कि विजिलेंस क्लियरेंस के संबंध में एक केंद्रशासित प्रदेश स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी बनाए जाएगी. यही कमेटी तय करेगी कि गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल या इसके आरोपित सरकारी कर्मचारी पर क्या फैसला करना है. बताया गया है कि यूटी लेवल की इस स्क्रीनिंग कमेटी के हेड प्रधान गृह सचिव होंगे. इस कमेटी के हाथ में कर्मचारी को सस्पेंड और नौकरी से बर्खास्त करने की पावर भी होगी.

(आपके लिए ये स्टोरी हमारे साथी आयूष ने लिखी है.)


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