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क्या झांसी के पुष्पेंद्र यादव का एनकाउंटर कर खुद ही फंस गई है यूपी पुलिस!

यूं तो उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के पुलिस एनकाउंटर पर सवाल हमेशा से उठते रहे हैं. लेकिन इस बार मामला और पेचीदा हो गया है. ये मामला झांसी के मोंठ इलाके में हुए एनकाउंटर से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि एनकाउंटर में मारा गया पुष्पेंद्र लुटेरा था और उसने पुलिस इंस्पेक्टर पर हमला करके कार लूट ली थी. वहीं पुष्पेंद्र के घरवाले और गांववाले इस एनकाउंटर को फर्जी करार देकर पिछले दो दिनों से धरने पर बैठे हैं.

क्या है पुलिस का दावा?

झांसी की मोंठ पुलिस के मुताबिक 5 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे मोंठ इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान पर बदमाशों ने बमरौली बाइपास तिराहे के पास फायरिंग की और उनकी कार लूटकर फरार हो गए. घायल इंस्पेक्टर को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया. इस मामले में इंस्पेक्टर धर्मेंद्र की तहरीर पर एरच के करगुंवा गांव के रहने वाले विपिन, पुष्पेंद्र और रविंद्र के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. पुलिस के मुताबिक 5 अक्टूबर की ही देर रात करीब 2.30 बजे फरीदा गांव के पास सड़क पर कार आती दिखी. पुलिस ने कार को रोकने की कोशिश की, तो कार सवारों ने गोली चला दी. पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें पुष्पेंद्र को सिर में गोली लग गई और उसकी मौत हो गई. वहीं उसके दो साथी फरार हो गए.

क्या है पुष्पेंद्र के घरवालों का दावा?

गांववालों ने झांसी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनकी मांग है कि झांसी के एसएसपी और मोंठ इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाए.
गांववालों ने झांसी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनकी मांग है कि झांसी के एसएसपी और मोंठ इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाए. (फोटो : सोशल मीडिया)

पुष्पेंद्र झांसी के करगुआं गांव का रहने वाला था. उसके पिता सीआईएसएफ में थे. पिता की मौत के बाद पुष्पेंद्र के बड़े भाई रवींद्र को उनकी जगह नौकरी मिल गई थी, जबकि पुष्पेंद्र का एक और भाई दिल्ली मेट्रो में नौकरी करता है. घरवालों के मुताबिक पुष्पेंद्र के पास दो ट्रक थे, जिनसे वो बालू और गिट्टी की ढुलाई करता था. पुलिस ने पहले तो उसके खिलाफ फर्जी केस किया और फिर एनकाउंटर में उसे मार दिया. घरवालों के के मुताबिक पुष्पेंद्र का जो भाई दिल्ली मेट्रो में नौकरी करता था, पुलिस ने उसके खिलाफ भी हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया है. और उसे इस बात का पता तब चला, जब वो अपने भाई की मौत की खबर सुनकर झांसी आया था.

गांववालों का क्या कहना है?

करगुआं गांव के रहने वाले लोग अब पुष्पेंद्र के समर्थन में आ गए हैं. गांववालों का कहना है कि एसएसपी और मोठ कोतवाल रिश्तेदार हैं और दोनों ने मिलकर पुष्पेंद्र की हत्या की है. गांववालों का कहना है कि जब तक झांसी एसएसपी ओपी सिंह और इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा जाता, वो पुष्पेंद्र का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. 7 अक्टूबर की शाम को जब डीएस शिवसहाय अवस्थी, एसएसपी ओपी सिंह और एडीजी प्रेम प्रकाश गांव पहुंचे और घरवालों को पुलिसवालों के खिलाफ केस दर्ज करने का आश्वासन दिया, तब जाकर पुष्पेंद्र का अंतिम संस्कार हो पाया.

प्रशासन क्या कह रहा है?

प्रशासन अब इस एनकाउंटर की जांच की बात कह रहा है. झांसी के डीएम शिवसहाय अवस्थी ने इस मामले की मैजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं. वहीं एडीजी प्रेम प्रकाश ने कहा है कि इस मामले की जांच में अगर पुलिसवाले दोषी पाए जाएंगे, तो उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा. उन्होंने गांववालों को ये भी आश्वासन दिया कि गांववाले जहां चाहें, जांच करवा सकते हैं. वहीं पुलिस के खिलाफ गांववालों की तहरीर को भी डीआईजी सुभाष सिंह ने पढ़कर सुनाया, जिसके बाद गांववालों ने अपना धरना खत्म कर दिया.

और शुरू हो गई राजनीति

पुष्पेंद्र यादव अपराधी था या नहीं, पुष्पेंद्र की मौत हत्या है या एनकाउंटर अब इस पर राजनीति शुरू हो गई है. राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह यादव ने इसे हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि मोठ पुलिस ने पुष्पेंद्र का ट्रक पकड़ लिया था और पैसे के लेनदेन के विवाद में उसकी हत्या कर दी. चंद्रपाल सिंह ने कहा कि पुलिस ने कार लेकर भागने की मनगढंत कहानी रची है. रास्ते में इतने थाने पड़ते हैं, लेकिन उसे कहीं रोका क्यों नहीं गया था. वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए बीजेपी और योगी सरकार पर निशाना साधा है.

वहीं योगी सरकार में मंत्री और पार्टी के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है पुष्पेंद्र खनन माफिया था और अब समाजवादी पार्टी खनन माफिया के साथ खड़ी दिख रही है.

शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने भी इस मामले में योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग अब इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े कर रहे हैं.


 

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