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लद्दाख और सियाचिन में तैनात जवानों को खाने की जरूरी चीजें भी नहीं मिल रहीं

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के रक्षा सेवा और सेना से जुड़ी रिपोर्ट में गंभीर बातें सामने आई हैं. ट्रिब्यून इंडिया ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है. इसमें लिखा है कि सियाचीन और लद्दाख जैसे मुश्किल पोस्ट्स पर तैनात जवानों की बुनियादी जरूरतों को भी सरकार पूरा नहीं कर पा रही है.

इन जवानों को अपनी खुराक से समझौता करना पड़ रहा है. पर्याप्त राशन उन्हें नहीं मिल रहा है, खाने में जितनी कैलोरी (ऊर्जा) की जरूरत होती है वो भी उन्हें नहीं मिल पा रही है. न ही बर्फीले इलाकों के लिए जिस क्वॉलिटी के बूट्स की जरूरत होती है वो उनके पास हैं. इसके अलावा भारी बर्फबारी से बचाव के लिए पहना जाने वाला स्पेशल चश्मा यानी स्नोगॉगल्स भी उनके पास नहीं हैं.

हाई अल्टिट्यूड पर रहने वाले जवानों के लिए स्पेशल राशन की व्यवस्था है.
हाई अल्टिट्यूड पर रहने वाले जवानों के लिए स्पेशल राशन की व्यवस्था है.

दरअसल, हाई ऑल्टिट्यूड पर रहने वाले जवानों को जितनी एनर्जी की जरूरत होती है, उसे देखते हुए उन्हें अलग किस्म के भोजन की जरूरत होती है. लेकिन उसके बदले में उन्हें मूल्य के आधार पर वैकल्पिक प्रोडक्ट दिए जा रहे हैं. खाने की क्वांटिटी और क्वॉलिटी दोनों में कमी आई है. जवानों के खाने की कैलोरी में 82 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है. इसके अलावा, लेह स्टेशन पर जवानों को जो स्पेशल राशन दिए गए, उनकी असली रसीद ही नहीं थी.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्नोगॉगल्स में 62 से 98 प्रतिशत की कमी है. जिसकी वजह से भारी बर्फबारी में भी जवानों का चेहरा खुला रहता है. लद्दाख और सियाचिन जैसे इलाकों में. जवानों को सालों पुराने मल्टी-पर्पज जूतों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है.

नवंबर, 2015 से सितंबर, 2016 के बीच जवानों को नए जूते नहीं मिले हैं. स्थिति काफी नाजुक है. सूत्रों के मुताबिक, जवानों को पुराने फेस मास्क, पुराने जैकेट और पुराने स्लीपिंग बैग दिए जा रहे हैं. उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों से वंचित रखा गया है.

रिपोर्ट में ये बात भी कही गई है कि सेना के अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में ठीक से काम नहीं हो रहा है. इस वजह से सेना को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. CAG की ये रिपोर्ट राज्यसभा के पटल पर रखी जा चुकी है. लेकिन लोकसभा में इसे अभी तक पेश नहीं किया जा सका है. इस वजह से CAG राजीव महर्षि इसे अभी तक रिलीज नहीं कर पाए हैं.

प्रधानमंत्री मोदी सियाचिन और लद्दाख जाकर जवानों का मनोबल बढ़ाते रहे हैं.
प्रधानमंत्री मोदी सियाचिन और लद्दाख जाकर जवानों का मनोबल बढ़ाते रहे हैं.

आप चैन से सो पाते हैं क्योंकि सीमाओं पर सेना के जवान आपकी सुरक्षा के लिए जगते हैं. सरकार जवानों की वीरता के दम पर जनता का विश्वास जीतती है. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक का दम भरती है. लेकिन उस बीच अगर ऐसी खबर आए कि हमारी सुरक्षा के लिए सीमाै पर तैनात जवानों को पर्याप्त खाना तक नहीं मिल पा रहा है तो ये चिंता की बात है.


वीडियो : जानिए सियाचिन ग्लेशियर में कैसे आता है हिमस्खलन, जिसके बीच इंडियन आर्मी के जवान ड्यूटी करते हैं?

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