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पाकिस्तान उच्चायोग में काम कर रहे थे ISI के जासूस, उनके पास से कई सीक्रेट डॉक्यूमेंट मिले हैं

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान हाई कमीशन के दो वीजा सहायकों को हिरासत में लिया है. दोनों पर जासूसी करने का आरोप है. ये दोनों आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं की जासूसी कर रहे थे. इनके साथ इनके एक ड्राइवर को भी पकड़ा गया था.

इन लोगों पर पहले से शक था

42 वर्षीय आबिद हुसैन और 44 वर्षीय ताहिर खान (क्लर्क) वीज़ा डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं. वहीं इनके ड्राइवर का नाम जावेद हुसैन है. इन तीनों पर पिछले कुछ महीनों से निगरानी रखी जा रही थी. दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारियों ने गुमनामी की शर्त पर बताया कि इन लोगों को रंगे हाथ पकड़ा गया है. एक अधिकारी ने बताया,

“उन्हें इंडियन सिक्योरिटी एस्टैबलिशमेंट के एक भारतीय नागरिक से कुछ कागज़ात लेते हुए, और उसे नकदी और एक आईफ़ोन देते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया.”

मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम से लगातार इनपुट मिल रहा था कि पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले आबिद और ताहिर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों टारगेट करते हैं. खुद को इंडियन बताकर उनसे दोस्ती करते थे. इसके बाद उनसे खुफिया जानकारी निकालने की कोशिश करते हैं. सूत्रों की मानें तो ISI बकायदा इनको लिस्ट देती थी की किन लोगों को टारगेट करना है.

पकड़े जाने के बाद इन तीनों ने दावा किया कि वे इंडियन थे, और इन्होंने जाली आधार कार्ड भी दिखाए. आबिद के पास से नासिर गौतम नाम का एक आधार कार्ड मिला है. जिसपर दिल्ली के गीता कॉलोनी का पता लिखा हुआ है. फिलहाल इस आधार कार्ड की जांच की जा रही है.
इनके पास मिले सीक्रेट दस्तावेज़

पुलिस ने इनके पास से कुछ दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है. स्पेशल सेल की टीम इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इन्होंने आाखिरकार ये दस्तावेज किससे हासिल किए थे. और इसके लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया था. इन लोगों ने डिफेंस से जुड़े किन-किन लोगों को अपने झांसे में लिया इसका पता लगाया जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि उनके खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके साथ ही कहा कि ये गिरफ़्तारी दिल्ली पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस के एक जॉइंट ऑपरेशन के आधार पर हुई. उनके द्वारा यह सूचना विदेश मंत्रालय को दी गई.

24 घंटे में देश छोड़कर जाने के लिए कहा गया  

विदेश मंत्रालय ने इस मामले में एक प्रेस रिलीज़ जारी की है. बताया है कि सरकार ने पाकिस्तानी हाई कमीशन के दोनों कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है, क्योंकि वे एक डिप्लोमैटिक मिशन के तहत भारत में थे, और अपने स्टेटस के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त थे. इन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़कर जाने के लिए कहा गया है. ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ का मतलब है कोई ऐसा विदेशी शख्स जिसके किसी देश में आने या रहने पर वहां की सरकार ने रोक लगा दी हो.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त को एक ‘डेमार्श’ जारी किया गया, जिसमें पाकिस्तान हाई कमीशन के इन कर्मचारियों की गतिविधियों को लेकर कड़ा विरोध प्रकट किया गया. साथ ही उच्चायुक्त को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि उनके डिप्लोमैटिक मिशन का कोई सदस्य भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल न हो.


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