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BJP नेता की प्रेस में छपती थीं NCERT की नकली किताबें, ऐसे होता था करोड़ों का फर्जीवाड़ा

उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर. 21 अगस्त के दिन यहां किताबों के एक गोदाम में यूपी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. टीम को गोदाम से करीब 35 करोड़ की कीमत वाली नकली किताबें मिलीं. ये सारी किताबें NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) के वॉटरमार्क का इस्तेमाल करके छापी गई थीं. जांच हुई, तो NCERT की इन डुप्लिकेट किताबों को छापने वाली प्रिटिंग प्रेस के बारे में भी पता चला. अमरोहा ज़िले में भी इस तरह का एक गोदाम मिला. इसमें भी करीब 15 करोड़ रुपए की कीमत वाली NCERT की फर्ज़ी किताबें मिलीं. पुलिस ने एक्शन लिया. आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया. चार आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. चार फरार हैं. इन आरोपियों में एक BJP नेता संजीव गुप्ता का नाम भी शामिल है. हालांकि खबर सामने आने के बाद पार्टी से उन्हें निलंबित कर दिया गया है. पता चला है कि ये नकली किताबें यूपी ही नहीं, देश के कई इलाकों में सप्लाई की जाती थीं.

क्या है पूरा मामला?

‘इंडिया टुडे’ से जुड़े उस्मान चौधरी ने इस मामले में ज्यादा जानकारी दी. उन्होंने FIR की कॉपी भी मुहैया कराई. FIR के मुताबिक, STF की टीम को मेरठ के परतापुर इलाके में अछरोडा-काशीपुर रोड पर अवैध किताबों के गोदाम होने की जानकारी मिली थी. STF और पुलिस की टीम वहां पहुंची तो देखा कि कई विषयों की स्कूली किताबें वहां रखी थीं. सभी पर NCERT का लोगो बना हुआ था. चार वर्कर इन किताबों के बंडल बना रहे थे. वे सभी 400 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मज़दूरी करते थे.

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गोदाम में किताबों का भंडार. (फोटो- उस्मान चौधरी)

गोदाम के अंदर एक ऑफिस था. उसमें सुपरवाइज़र सुनील कुमार मौजूद था. पुलिस ने उससे पूछताछ की. पता चला कि गोदाम संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता का है. दोनों की दिल्ली रोड पर मोहकमपुर एन्क्लेव में एक प्रिटिंग प्रेस थी, TNHK प्रिंटर एंड पब्लिकेशन नाम से. आरोप है कि इस प्रिंटिंग प्रेस में NCERT की किताबों की डुप्लिकेट कॉपी छापी जाती थीं. बाद में उन्हें गोदाम भेज दिया जाता था. इस गोदाम से ये किताबें यूपी समेत देश के अन्य राज्यों के दुकानदारों तक पहुंचाई जाती थीं.

पूछताछ में ये भी पता चला कि अमरोहा के गजरौला में भी संजीव और सचिन की एक प्रिंटिंग प्रेस है. वहां भी डुप्लिकेट किताबें छपती हैं. पुलिस ने मेरठ वाले गोदाम और प्रिंटिंग प्रेस को सील कर दिया. फिर 22 अगस्त की रात अमरोहा में भी छापेमारी कर उन्हें भी सील कर दिया.

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पुलिस ने बताया कि ये काम पिछले आठ साल से चल रहा था. (फोटो- उस्मान चौधरी)

संजीव गुप्ता BJP से जुड़ा हुआ था.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ की जिस प्रिंटिंग प्रेस में छापेमारी हुई, वहां संजीव गुप्ता का एक बोर्ड लगा हुआ था. उस पर नाम के नीचे लिखा था, मेरठ महानगर BJP उपाध्यक्ष. इसके अलावा बिल्डिंग के अंदर BJP के झंडे भी मिले. छापेमारी और NCERT की फर्जी किताबों की बरामदगी की खबर जब सामने आई, तो संजीव को पार्टी से निलंबित कर दिया गया. मेरठ के BJP अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने एक स्टेटमेंट जारी किया. कहा,

“संजीव गुप्ता, मेरठ महानगर BJP उपाध्यक्ष के प्रतिष्ठान पर पुलिस प्रशासन द्वारा छापेमारी करके NCERT की पुस्तकें बरामद करने की जानकारी मिली. समाचार पत्रों में भी ये छपा. इससे पार्टी की छवि खराब हुई. मेरे द्वारा प्रदेश अध्यक्ष जी को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है. पार्टी की छवि को ध्यान में रखते हुए संजीव गुप्ता को तत्काल प्रभाव से पार्टी के समस्त दायित्वों से निलंबित किया जाता है.”

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बीजेपी का बयान. निलंबित संजीव गुप्ता. (फोटो- उस्मान चौधरी)

आरोपियों में एक नाम सचिन गुप्ता का भी है. वह संजीव गुप्ता का भतीजा है. पुलिस ने दर्ज FIR में बताया कि गोदाम में जब किताबों के बारे में जानकारी मिली तो सचिन गुप्ता को कॉल किया गया. उससे कहा गया कि वो मौजूदा किताबों और प्रिटिंग प्रेस से जुड़े सभी ज़रूरी कागज़ात लेकर गोदाम पहुंचे. लेकिन बहुत वक्त बीतने के बाद भी वो नहीं आया. बाद में उसका फोन स्विच ऑफ हो गया. संजीव गुप्ता का नंबर भी स्विच ऑफ आया. इसके बाद पुलिस को विश्वास हो गया कि किताबें गलत तरीके से छापी गई हैं.

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में NCERT को भी जानकारी दे दी गई है. मेरठ के SSP (सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) अजय साहनी ने 22 अगस्त को मीडिया को बताया था कि NCERT की विजिलेंस टीम भी इस मामले की जांच कर रही है. उन्होंने कहा था,

“भारी मात्रा में बरामदगी हुई है. दोनों स्थानों से मिलाकर करीब 50 करोड़ या उससे अधिक की किताबों की रिकवरी हुई है. सभी की लिस्ट बन रही है. NCERT की टीम भी आई है. चूंकि सारी किताबें NCERT की थीं, इसलिए उनसे कहा गया है कि उनकी जो भी विजिलेंस टीम है, वो हमें लिखकर दें कि क्या चीज़ें इसमें चल रही थीं. और इतनी भारी मात्रा में किताबें मार्केट में कैसे आ गईं?”

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मेरठ के  SSP अजय साहनी. (फोटो- उस्मान चौधरी)

कैसे और कितने साल से काम कर रहा था ये गिरोह?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इस मामले में NCERT की टीम को लग रहा है कि कोई अंदर का व्यक्ति भी इसमें शामिल हो सकता है. ‘दी लल्लनटॉप’ ने परतापुर थाना प्रभारी आनंद प्रकाश मिश्रा से इसे लेकर सवाल किया. उन्होंने बताया कि करीब आठ साल से ये अवैध प्रिंटिंग चल रही थी. उन्होंने आगे बताया-

“अंदर से कोई नहीं मिला है. वो तो NCERT खुद पब्लिश करती थी. उनकी अपनी बहुत बड़ी प्रिंटिंग प्रेस है. उनका अपना सेटअप है. इस मामले की जांच के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित होगी, वो आगे जांच करेगी. काफी सारे लोग इसमें शामिल हो सकते हैं.”

इन किताबों पर NCERT का वॉटरमार्क भी लगा था. इस पर जब SHO से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा,

“हां, ओरिजिनल वॉटरमार्क लगा हुआ था. कहां से आया इनके पास? किसने दिया? इसकी भी जांच की जा रही है.”

SHO ने ये भी कहा कि इस गिरोह की ऐसी और भी प्रिंटिंग प्रेस मिल सकती हैं. उन्होंने आगे कहा,

“इस पर टीमें काम कर रही हैं. चांस है कि आगे और प्रिंटिंग प्रेस मिलें. हिंदी भाषी जितने राज्य हैं, जहां हिंदी भाषा प्रयोग होती है, उन राज्यों में ये अपनी किताबें ट्रांसपोर्ट करते थे. जैसा एक ओरिजिनल NCERT की किताबों में छपा होता था, वो सब ये कॉपी करते थे. रेट भी. बस कम दामों में ये किताबें दुकानदारों को देते थे. इससे उन्हें मार्जिन ज्यादा मिलता था.”

जब SHO से पूछा गया कि क्या इनमें दुकानदार भी लिप्त होंगे, तो उन्होंने कहा,

“हां बिल्कुल होंगे. जो इनसे किताबें लेकर डिस्ट्रिब्यूट करते होंगे, उनके एजेंट होंगे. वो निश्चित ही इसमें उत्तरदायी हैं.”

संजीव गुप्ता के नाम पर SHO ने कन्फर्म किया कि ये BJP वाले संजीव गुप्ता ही हैं. आगे कहा,

“लेकिन हम लोग किसी पार्टी की तो जांच कर नहीं रहे. हम लोग NCERT की किताबों की जांच कर रहे हैं. कौन इसको पब्लिश कराता था? कौन इसको प्रिंट करता था? कौन इसका दोषी होता है? वह कोई भी हो, उसे सज़ा मिलेगी.”

SHO ने बताया कि सारे कम्प्यूटर सीज़ किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि ये जांच बहुत लंबी चलने वाली है. ये पता लगाया जाएगा कि पेपर्स कहां से आ रहे थे? कहां से ज़रूरी सामान आ रहा था? इसे खरीदने वाले एजेंट्स कौन थे? इनके बाइंडर्स कौन थे? ये सब जांच होगी. बहुत कुछ निकलकर आएगा.

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कक्षा 9वीं की अंग्रेज़ी की पाइरेटेड किताब. (फोटो- उस्मान चौधरी)

कौन गिरफ्तार, कौन फरार?

आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. इनमें शिवम, राहुल, आकाश, सुनील नाम के चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. संजीव गुप्ता, सचिन गुप्ता, विकास त्यागी और नफीस ये चार आरोपी फरार हैं.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फरार होने से पहले संजीव गुप्ता ने फोन पर हुई बातचीत में दावा किया था कि उनके पास सारे ज़रूरी दस्तावेज़ हैं. उन्होंने कहा था-

“मैं सामने आऊंगा. इन किताबों को छापने के लिए NCERT द्वारा अधिकृत वैध दस्तावेजों के साथ आऊंगा. मैं पार्टी की अंदरूनी राजनीति का विक्टिम बना हूं.”

खैर, अभी संजीव गुप्ता फरार हैं. उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. पुलिस की बात की जाए, तो सभी फरार आरोपियों को खोजा जा रहा है.


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