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कश्मीर : हथियारों के फर्जी लाइसेंस बनवाने वाला IAS अधिकारी कैसे धरा गया?

एक IAS अफसर की गिरफ्तारी हो गयी. किसकी? कश्मीर काडर के 2010 बैच के आईएएस राजीव रंजन की. कहां से? चंडीगढ़ से. किसने की? CBI ने. साथ में एक और आदमी गिरफ्तारी हुई? कौन? जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अधिकारी इतरत हुसैन रफ़ीकी की. क्या आरोप थे? दोनों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गैर प्रांतीय लोगों को असलहों के लाइसेंस जारी करने का आरोप. कितने लोगों को? तकरीबन 56 लोगों को. कुपवाड़ा जिले के जिला मजिस्ट्रेट रहते हुए.

मामला जानिये

रफ़ीकी 2013-2015 तक कुपवाड़ा के जिलाधिकारी थे. 2015-16 तक इस पद पर थे राजीव रंजन. अमर उजाला में छपी खबर की मानें तो इस दौरान 4.29 लाख आर्म्स लाइसेंस जारी किये गए. और इनमें से 90 फीसद लाइसेंस जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोगों को दिए गए. कुपवाड़ा, बारामुला, शोपियां, राजोरी, उधमपुर, डोडा और रामबन जिले में सबसे अधिक लाइसेंस जारी किये गए. डोडा, रामबन और उधमपुर जिले से जारी 1 लाख 43 हजार 13 लाइसेंस में से 1 लाख 32 हजार 321 लाइसेंस दूसरे राज्यों में रहने वालों को जारी किये गए.

हालांकि कुपवाड़ा जिले में – जहां इन दो अफसरों की तैनाती रही – लाइसेंस से जुड़ी कोई फाइल भी नहीं मिली. खबरें मिलती हैं कि क्रिकेटर और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी यहां से लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिसे रद्द कर दिया गया था. राजीव रंजन की गिरफ्तारी से जुडी खबरों की मानें तो कुपवाड़ा जिले में लाइसेंस मामले से जुडी कोई भी फ़ाइल नहीं मिली है.

कैसे खुला मामला?

दरअसल मामला जम्मू-कश्मीर से निकलकर पहुंच गया राजस्थान. पुलिस ने राजीव रंजन के भाई ज्योति रंजन को गिरफ्तार किया 2017 में. ज्योति रंजन के पास से फर्जी आर्म्स लाइसेंस की बरामदगी हुई. इस समय राजस्थान के डीजीपी थे ओपी मल्होत्रा. उन्होंने शक जताया कि इसमें राजीव रंजन का भी हाथ हो सकता है.

इसके पहले 2007 में श्रीगंगानगर में फर्जी लाइसेंस के काफी मामले प्रकाश में आये थे. लगभग आधा दर्जन. 2-3 IAS अधिकारियों का नाम जांच के रडार में आया. कई आर्मी अधिकारी भी लिप्त माने गए. ये आशंका ज़ाहिर की गयी कि जम्मू से लोगों ने राजस्थान आकर लाइसेंस बनवाए थे. क्यों? क्योंकि जम्मू-कश्मीर में तैनात आर्मी के  मामला खिंचता गया. राजस्थान एटीएस ने 2017 में तत्कालीन मुख्य सचिव बीबी व्यास को इस रैकेट के बारे में पत्र भेजकर सूचना दी थी. राज्यपाल एनएन वोहरा के पास बात गयी.

एटीएस ने जांच शुरू की. खबरें बताती हैं कि इस ऑपरेशन को एटीएस ने ज़ुबैदा कोडनेम दिया. जांच में 50 से अधिक लोगों के पास जम्मू-कश्मीर से जारी गन लाइसेंस मिले थे. जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए थे. इसी दौरान ज्योति रंजन की गिरफ्तारी हुई. 3367 सुरक्षाकर्मियों का भी नाम आया, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से फर्जी लाइसेंस हासिल किये थे.

मई 2018 में पूरी मामले की जांच सीबीआई को दे दी गयी. सीबीआई ने पता लगाया कि अपनी एक साल की तैनाती के दौरान लगभग 30 हज़ार हथियारों के लाइसेंस इशू किये. हरेक लाइसेंस 8-10 लाख रूपए लिए. कश्मीरियों के अलावा चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के लोगों फर्जी कागजों पर लाइसेंस दिए गए. आशंका जताई जा रही है कि ज़्यादातर लाइसेंस अपराधियों ने बनवाये, ताकि वे बिना रोकटोक कहीं भी हथियार लेकर आवाजाही कर सकें.

चूंकि राजीव रंजन कश्मीर काडर के अधिकारी हैं, इसलिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन से इजाज़त लेनी पड़ी. और फिर चंडीगढ़ से हो गयी गिरफ्तारी.


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