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मलेरिया वाली जिस दवा को कोरोना में जान बचाने के लिए इस्तेमाल कर रहे, वो उल्टा काम कर रही है?

23 मार्च. इंडियन काउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च. ICMR. यहां के निदेशक बलराम भार्गव ने प्रेस को सम्बोधित किया. कहा कि Covid-19 की रोकथाम के लिए गठित नेशनल टास्क फ़ोर्स ने रेकमेंड किया कि मलेरिया और गठिया के रोग में दी जाने वाली दवा Hydroxychloroquine (HCQ) का इस्तेमाल डॉक्टर, नर्स या स्वास्थ्यकर्मी कर सकते हैं. ख़ुद पर. कोरोना से ख़ुद को बचाने कि लिए. साथ कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ के घरवालों और रिश्तेदारों, जिनमें कोरोना से संक्रमित होने के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए, उन्हें भी HCQ का इस्तेमाल करने की सलाह दी. इसे Prophylaxis ट्रीटमेंट कहा गया. मतलब दवा देने या खाने का वो तरीका, जिसमें आप ख़ुद को रोग से बचाने के लिए दवा खाते हैं. रोग के इलाज के लिए नहीं. ICMR का कहना था कि HCQ के इस्तेमाल से कोरोना के संक्रमण को बचाया जा सकता है.

लेकिन भारतीय डॉक्टरों की टीम का एक रिसर्च सामने आया है. ये रिसर्च दावा करती है कि HCQ के इस्तेमाल से कोरोना की रोकथाम में कोई मदद नहीं मिल सकती है. अलबत्ता, जिन लोगों को HCQ खिलाया जा रहा है, उनमें कोरोना का संक्रमण होने का ख़तरा आम लोगों की तुलना में ज़्यादा है.

कहां छपी है रिसर्च? Journal of The Association of Physicians of India (JAPI) में. दिल्ली के मैक्स हेल्थकेयर के डॉक्टरों की टीम की रिसर्च है. जिस दिन, यानी 23 मार्च को, ICMR ने स्वास्थ्यकर्मियों को HCQ खाने की सलाह दी, उसी दिन इस टीम ने एक प्रश्नावली बनाई. इसमें कोविड और फ़्लू के लक्षण, देश-विदेश की यात्रा के विवरण, काम करने की जगह और HCQ खाते हैं या नहीं, जैसे प्रश्न थे. 30 अप्रैल तक इस प्रश्नावली के माध्यम से सर्वे किया गया. दिल्ली के पांच और मुंबई के एक अस्पताल को मिलाकर इसमें कुल 4403 स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने जवाब दिए.

इस 4403 में से 3667 स्वास्थ्यकर्मियों के बारे में पूरी जानकारी प्रश्नावली के माध्यम से उपलब्ध थी. इनमें से कुल 1113 लोगों की कोरोना की जांच हुई. इन 1113 स्वास्थ्यकर्मियों में 755 ऐसे थे, जो ICMR के निर्देश आने के बाद लगातार HCQ ले रहे थे.

अब धमाके की बात. 1113 लोगों में से कुल 20 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए. और इन 20 में से 14 HCQ लेने वाले स्वास्थ्यकर्मी थे. यानी इंफ़ेक्ट हुए लोगों में 70 प्रतिशत लोग HCQ ले रहे थे.

तो क्या HCQ खाने से कोरोना तेज़ी से हो रहा है?

नहीं. ऐसा सीधे नहीं कहा जा सकता है. लेकिन इतना ज़रूर है कि जिन लोगों ने HCQ लिया है, उनमें कोरोना से इंफ़ेक्ट होने की दर ज़्यादा है. रिसर्च करने वाली डॉक्टरों की टीम का कहना है कि HCQ खिलाने से स्वास्थ्यकर्मियों को बहुत लाभ नहीं मिलने वाला है. PPE किट का इस्तेमाल ज़रूरी है. डॉक्टरों ने ये भी कहा है कि HCQ कोरोना से बचाव में कितना कारगर है, इसको लेकर अभी तक कोई भी रिसर्च सामने नहीं आई है.

लेकिन जिस समय ये रिसर्च सामने आ रही है, उसी समय गुजरात के डॉक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी ये दावा कर रहे हैं कि उन्हें HCQ के इस्तेमाल से कोरोना के केसों को कंटेन करने में मदद मिली है. वहां कंटेनमेंट ज़ोन में मरीज़ों के घरवालों को HCQ खिलाया जा रहा है, जिसके बाद उनके पॉज़िटिव होने की रेट में गिरावट आई है. लेकिन गुजरात से आ रहे इस दावे में इस बात का ज़िक्र नहीं है कि HCQ के साथ मरीज़ों के परिजनों ने और क्या सावधानियां बरतीं. इसके अलावा यूके और अमेरिका में फिर से HCQ के ट्रायल की जुगत शुरू हो चुकी है. और एक है ये रिसर्च, जो कह रही है कि PPE किट दो, HCQ नहीं.   


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