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कैसे आती हैं ये सैटेलाइट तस्वीरें, जिन्होंने गलवान घाटी के हालात समझने में मदद की

15 जून की रात लद्दाख में भारत की सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बीच लड़ाई हुई. ये हिंसक झड़प लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास गलवान घाटी पर हुई. PLA के सैनिकों ने LAC पर भारत के इलाके में आकर अपना कैंप लगाया था. भारतीय जवान इसी कैंप को हटवाने के लिए पहुंचे थे, तभी चीन के सैनिकों ने भारतीय जवानों के ऊपर हमला कर दिया. इसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए. इस पूरी लड़ाई के दौरान गलवान घाटी में दोनों सेनाओं की क्या स्थिति थी, इसे दिखाने के लिए ‘इंडिया टुडे’ ने सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया था. अमेरिका की प्लैनेट लैब्स कंपनी ने ये तस्वीरें मुहैया कराई थीं.

दुनिया की सरकारें कई सालों से स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती आई हैं, लेकिन अब कमर्शियल सैटेलाइट की तस्वीरों का भी काफी इस्तेमाल हो रहा है. सैटेलाइट इमेजेस के ज़रिए बॉर्डर के हालात को समझा जा रहा है.

सैटेलाइट क्या है?

कोई छोटा ऑब्जेक्ट (वस्तु), जो अपने से साइज़ में बहुत बड़े किसी ऑब्जेक्ट का चक्कर लगा रहा हो, सैटेलाइट होता है. जैसे पृथ्वी के चक्कर चंदा मामा लगाते हैं न, वैसे ही. चांद, पृथ्वी का नेचुरल सैटेलाइट है, नेचुरल इसलिए क्योंकि उसे हमने बनाया नहीं, वो पहले से हमारे लिए था, प्राकृतिक तौर पर. इसके अलावा पृथ्वी के पास कई सारे आर्टिफिशिल सैटेलाइट्स भी हैं, जिन्हें धरतीवाले कई साल से अंतरिक्ष में भेज रहे हैं, और ये पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं.

धरती में कई सारे देश हैं, इनकी स्पेस एजेंसियां हैं, जैसे इंडिया में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन (ISRO) है, अमेरिका में नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) है, ये एजेंसियां वक्त-वक्त पर सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजती हैं. इसके अलावा कई सारी प्राइवेट कंपनियां भी अपने सैटेलाइट्स भेज रही हैं, और उनसे मिलने वाली जानकारी वो लाइसेंस के ज़रिए किसी दूसरी प्राइवेट कंपनियों और सरकारों को मुहैया कराती हैं.

क्या है सैटेलाइट इमेजेस?

इन सैटेलाइट्स में लगे होते हैं कैमरे. बहुत हाईफाई कैमरे, जो धरती के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें खींचते रहते हैं. ये तस्वीरें आती हैं स्पेस एजेंसी या उस कंपनी के पास, जिसकी वो सैटेलाइट है. इन तस्वीरों को ही कहते हैं सैटेलाइट इमेजेस.

ये तस्वीरें क्या काम आती हैं?

मौसम का हाल पता चलता है, समुद्र, जंगल, किसी इलाके की ज़मीन में क्या हो रहा है, देश की सीमाओं के क्या हाल हैं, ये सब पता चलता है. देशों की आर्मी के लिए सैटेलाइट इमेजेस बेहद अहम हैं.

भारतीय सेना की मदद के लिए सैटेलाइट्स

‘इंडिया टुडे’ से जुड़े अंकित कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन (ISRO) भारतीय सेना की मदद के लिए बहुत से सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है. इनमें से एक रडार इमेजिंग सेटेलाइट-2 (RISAT-2) है, ये RISAT सीरीज़ का हिस्सा है. ये सैटेलाइट इंटेलिजेंस यूनिट और सेना की मदद के लिए लॉन्च किया गया था. इसके अलावा ISRO ने सेना की मदद के लिए सैटेलाइट माइक्रोसेट-R (Microsat-R) भी लॉन्च किया था. सैटेलाइट GSAT-7A को भी इसरो ने खासतौर पर इंडियन एयरफोर्स और इंडियन आर्मी की मदद के लिए लॉन्च किया था.

कमर्शियल सैटेलाइट्स

कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जो प्राइवेट सेक्टर्स को धरती की हाई रेजोल्यूशन वाली, यानी बहुत ही क्लीयर और शानदार सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराती हैं. इनमें अमेरिका बेस्ड मेक्सर टेक्नोलॉजी (Maxar Technologies), प्लानेट लैब्स काफी अहम हैं. यूरोप बेस्ड एयरबस भी इस लिस्ट में शामिल है.

प्लानेट लैब्स का दावा है कि वो दूसरी कंपनियों और सरकार के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज़ी से सैटेलाइट्स डिजाइन करता है, बनाता है और उन्हें लॉन्च करता है, वो भी कम कॉस्ट पर. ‘इंडिया टुडे’ के पास गलवान घाटी की जो तस्वीरें आई हैं, वो प्लानेट लैब्स के सैटेलाइट की ही हैं.

मेक्सर टेक्नोलॉजी का कहना है कि वो रोज़ाना 30 लाख वर्ग किलोमीटर के इमेज कलेक्ट करते हैं. ये कंपनी NASA को भी उसके स्पेस मिशन में हेल्प करती है. यूरोप की एयरबस कंपनी के पास करीब 50 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट सिस्टम्स हैं.

कैमरे कैसे होते हैं?

बहुत हाईफाई कैमरे होते हैं. अपने फोन में जो कैमरे होते हैं, भले ही उसे हम कितना ही देख-परख कर, कैमरे की क्वालिटी की ढेर सारी तारीफ सुनकर खरीदे हों, लेकिन उनसे कुछ मीटर की दूरी तक की ही साफ तस्वीरें ली जा सकती हैं. लेकिन सैटेलाइट कैमरे, धरती से सैंकड़ों, हज़ारों किलोमीटर दूर होने के बाद भी तस्वीरें लेते हैं. और जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी डेवलप हो रही है, सैटेलाइट इमेजेस की क्वालिटी भी बेहतर हो रही है. यही कारण है कि प्लैनेट लैब्स ने गलवान घाटी की जो तस्वीरें मुहैया कराई हैं, वो बेहद साफ हैं. हाई रेजॉल्यूशन वाली. उनमें काफी कुछ समझ आ रहा है.


वीडियो देखें: भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पता चला कि गलवान घाटी में कई सालों से क्या हो रहा था?

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