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क्या क्रिप्टो करंसी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं ? छह महीने में आधी हो गईं कीमतें

महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी से सकते में आए कई वित्तीय बाजारों के साथ क्रिप्टोकरंसी के बाजार में भी हलचल मच गई है. पिछले कई दिनों से जारी बिकवाली सोमवार को फ्रीफॉल में बदल गई. चंद घंटों के भीतर ही सभी क्रिप्टो करंसीज की कीमतें चंद घंटों के भीतर ही 10 से 20 फीसदी तक टूट गईं. दुनिया की सबसे बड़ी और पॉपुलर क्रिप्टो करंसी बिटकॉइन की कीमत 30,000 डॉलर से नीचे आ गई, जो छह महीने पहले तक इसका दोगुना हुआ करती थी. एक हफ्ते में ही यह करीब 20 फीसदी टूटा है. Coinmarketcap के आंकड़ों की मानें तो ग्लोबल क्रिप्टोकरेंसी का मार्केट कैप घटकर 1.42 ट्रिलियन डॉलर यानी डेढ़ लाख करोड़ डॉलर से भी कम रह गया है. बिटकॉइन के बाद दूसरी सबसे बड़ी करंसी इथेरियम की कीमत भी घटकर 2,330 डॉलर हो गई है. यह भी पिछले एक हफ्ते में 18 फीसदी तक गिरा है. डॉजकॉइन, शिबा जैसी क्रिप्टो करंसी में भी पिछले कुछ घंटों में 10-15 फीसदी की गिरावट आई है.

साल 2022 में बिटकॉइन की कीमत 33 फीसदी तक गिरी है. 1 जनवरी 2022 को इसकी वैल्यू 46,726 डॉलर पर थी, मगर सोमवार 9 मई को 30,000 डॉलर से नीचे जाने के बाद आज भी यह 31,000 डॉलर के आसपास ही है. इससे पहले 20 अगस्त 2020 को बिटकॉइन ने 30 हजार डॉलर से भी नीचे जाकर 29,807 डॉलर तक ट्रेड किया था. हालांकि उस गिरावट के बाद बिटकॉइन ने जबरदस्त तेजी दिखाई और 8 नवंबर 2021 को यह 67,000 डॉलर तक पहुंच गया था.
फिलहाल एक हफ्ते के भीतर ही सभी बड़ी क्रिप्टो करंसीज की कीमतों में 30 फीसदी तक गिरावट आई है. इनमें Avalanche-28.32%, Shiba-25.34%, Solana, -24.03%, Cardano-19.81%, Dogecoin-16% TRON -10.39%, भी शामिल हैं. इस गिरावट के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. जहां एक ओर बढ़ती ब्याज दरों के चलते इनवेस्टर रिस्की एसेट्स से पैसे निकाल रहे हैं, वहीं भारत सहित कई देशों में क्रिप्टो पर भारी भरकम टैक्स लगाया जा रहा है.

क्यों टूट रहीं कीमतें

जुलाई 2021 के बाद क्रिप्टो करंसी में जिस तेजी का दौर शुरू हुआ, वो नवंबर आते-आते रिकॉर्ड बुलंदी पर था. यही वो दौर था, जब भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी तेजी आई और ज्यादातर इंडेक्स पीक पर थे. वजह बताई गई कि महंगाई के चलते लोगों का रिस्क एपेटाइट बढ़ रहा है और वो रिस्की एसेट्स में पैसा लगा रहे हैं. लेकिन दिसंबर में जैसे ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाने का प्लान पेश किया, दुनिया भर के बाजार टूटने लगे. इस बीच यूक्रेन वॉर छिड़ा, जिसने आग में घी का काम किया. फिर फेड ने ब्याज भी बढ़ा दिया. वो भी महीने भर के भीतर दो बार. नतीजतन शेयर मार्केट में बिकवाली तेज हो गई. आज शेयर तो गिर ही रहे हैं, क्रिप्टो में मची भगदड़ ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया भर के निवेशक जबर्दस्त दबाव और तनाव में हैं. मौजूदा आर्थिक हालात पर भरोसा तो घटा ही है, क्रिप्टो को लेकर संशय बढ़ रहा है.
1 फरवरी 2022 को केंद्रीय बजट में क्रिप्टो पर 30 फीसदी इनकम टैक्स का ऐलान करने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने अमेरिका यात्रा के दौरान में यहां तक कह दिया कि क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का जरिया बन गया है और यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है. इस बयान का कई देशों ने समर्थन भी किया और यहां क्रिप्टो को दूसरा सबसे बड़ा झटका लगा. वित्त मंत्री ने एक बार फिस साफ किया है कि क्रिप्टो करंसी पर टैक्स लगाने का मतलब उसे कानूनी दर्जा देना नहीं है. भारत क्रिप्टो करंसी का सबसे उभरता बाजार था, लेकिन यहां सरकार के रुख ने इसके भविष्य पर सवालिया निशान तो लगा ही दिया है. अब बढ़ती ब्याज दरों और दुनिया भर की इकॉनमी पर मंदी के मंडराते संकट ने भी क्रिप्टो निवेशकों के हौसले पस्त कर दिए हैं. जानकारों का यह भी कहना है कि जब जब ब्याज दरें बढ़ाने और महंगाई कंट्रोल करने की बात होती है, निवेशकों का रुझान रिस्की और स्पेकुलेटिव एसेट्स की ओर कम होने लगता है.

28% जीएसटी की तैयारी

क्रिप्टो करंसी पर 30 पर्सेंट इनकम टैक्स की बात तो आप सुन ही चुके हैं. आज कई अखबारों में यह सुर्खी है कि जीएसटी काउंसिल अपनी आगामी बैठक में क्रिप्टो पर 28 पर्सेंट जीएसटी लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है. सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट तो यह भी कहती है कि जीएसटी काउंसिल की एक कमेटी ने क्रिप्टो पर 28 पर्सेंट जीएसटी लगाने की सिफारिश भी कर दी है. डबल टैक्स लगा तो पहले से भारत में क्रिप्टो का भविष्य क्या होगा, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं. हमने जीएसटी एक्सपर्ट से जानना चाहा कि इसकी कितनी संभावनाएं हैं और करीब 60 पर्सेंट टैक्स के बाद भी क्या क्रिप्टो करंसी अपने निवेशकों को बंपर कमाई के सब्जबाग दिखा सकेगी. साथ ही यह सवाल अब भी लोगों को जेहन में तैर रहा है कि जब सरकार क्रिप्टो को गैरकानूनी मानती आ रही है और यहां तक कि इसे आतंकवाद और मनी लॉन्डरिंग का स्रोत बताने लगी है, तो फिर वह इस पर टैक्स लगाकर अपनी कमाई की कोशिश क्यों कर रही है?. देखिए एक्सपर्ट ने क्या कहा ( खर्चा-पानी: छह महीने में ही आधी क्यों हो गईं क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें ?-एपिसोड : 325 ) 


 

वीडियो : छह महीने में ही आधी क्यों हो गईं क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें ?

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