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कोंगु नाडु: मोदी कैबिनेट का विस्तार तमिलनाडु के विभाजन से जुड़े इस पुराने मुद्दे को कैसे हवा दे गया?

तमिलनाडु. भारत के उन दक्षिण राज्यों में से एक, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ राजनीतिक घटनाओं के लिए भी हमेशा चर्चा में रहते हैं. इन दिनों तमिल मीडिया के एक तबके में तमिलनाडु के विभाजन का मुद्दा गर्माया हुआ है. वहां प्रकाशित हुई कुछ खबरों में ऐसा कहा गया है कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को दो हिस्सों में बांट सकती है. बताया गया है कि ये एक केंद्र शासित प्रदेश होगा जिसका नाम होगा- कोंगु नाडु.

क्यों छिड़ गई बहस?

ये पूरा मामला शुरू हुआ मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से. बीती 7 जुलाई को हुए इस कैबिनेट विस्तार से पहले 12 मंत्रियों के इस्तीफे हुए और शाम को 43 मंत्रियों का शपथग्रहण. इनमें अधिकतर मंत्री नए थे. दिल्ली का मीडिया इस बहस में लगा था कि किस नेता को मंत्री पद दिया गया या किसे मंत्री पद से हटाया गया.

लेकिन तमिलनाडु में एक अलग ही डिबेट शुरू हो गई थी. कैबिनेट विस्तार के बाद वहां के लोगों का एक धड़ा जल्दी ही नया राज्य बनने की खुशी मनाने लगा. वहीं, दूसरा धड़ा इसका विरोध कर रहा था. सोशल मीडिया पर मीम वॉर शुरू हो चुका था. अब भी तमिलनाडु में इसे लेकर बहस चल रही है. राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है. और एक धड़ा ये प्रचार करने में लगा है कि अब बस तमिलनाडु के टुकड़े होने ही वाले हैं और जल्दी ही कोंगु नाडु के रूप में नए राज्य की स्थापना हो जाएगी.

एल मुरुगन क्यों बने इस बहस की वजह?

दरअसल हुआ यूं कि पीएम मोदी के नए मंत्रियों वाली लिस्ट में एक नाम शामिल था- एल मुरुगन. तमिलनाडु से आने वाले बीजेपी नेता. मंत्री बनने से पहले एल मुरुगन तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष थे. अब उन्हें केंद्र के दो मंत्रालयों में राज्यमंत्री बनाया गया है. एक है सूचना और प्रसारण मंत्रालय. दूसरा है मत्स्यपालन और पशुपालन मंत्रालय. यहां तक मामला ठीक था. लेकिन कोंगु नाडु वाली बहस की शुरुआत हुई मुरुगन की प्रोफाइल से. मंत्रिमंडल विस्तार के बाद 7 जुलाई को ही बीजेपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से हर मंत्री की प्रोफाइल साझा की थी. इनमें एल मुरुगन की हिंदी वाली प्रोफाइल में तो सब ठीक था, लेकिन अंग्रेजी वाली प्रोफाइल में उनके नाम के नीचे कोंगु नाडु का जिक्र किया गया था.

एल मुरुगन के प्रोफाइल में कोंगु नाडु लिखा देख तमिलनाडु में बहस छिड़ गई. ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक DMK नेता कनिमोझी ने पत्रकारों से कहा,

“तमिलनाडु को कोई नहीं बांट सकता और इस चीज का कोई सपना तक नहीं देख सकता. चिन्ता ना करें.”

वहीं तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केएस अलागिरी ने कहा कि ये रिपोर्ट्स बीजेपी की तरकीब है ताकि लोग उसकी असफलता की बात ना करें, बल्कि इस चर्चा में उलझ जाएं. उन्होंने कहा,

“ये तेलंगाना जैसा नहीं है. कोई तमिलनाडु का बंटवारा नहीं चाहता. तेलंगाना रीजन में विकास नहीं हुआ था, लेकिन कोंगु नाडु इलाके में खासा विकास हुआ है. ऐसे में कोई बंटवारे की मांग क्यों करेगा.”

बीजेपी ने क्या कहा?

दूसरी ओर इस मामले पर प्रदेश बीजेपी के महासचिव के नागराजन ने कहा कि कोंगु नाडु का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और कोंगु क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि ये बने (कोंगु नाडु). उन्होंने कहा कि कोंगु नाडु देसिया मक्कल काची जैसी पार्टियों के अलावा पीएमके नेता एस रामादौस भी इस बारे में कह चुके हैं. नागराजन ने कहा कि सरकार को लोगों की इच्छा देखनी चाहिए और उसे पूरी करनी चाहिए.

अखबार के मुताबिक, बीजेपी के एक और नेता नैनार नागेंद्रन कहते हैं,

“DMK कोंगु नाडु की चर्चा से क्यों पीछे हट रही है. ये सब तमिलनाडु ही है. चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन ये याद रखने वाली बात है कि आंध्र और यूपी का विभाजन हुआ था. आखिर में जनता की ही इच्छा पर सब निर्भर करता है. अगर जनता चाहती है तो उसे पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है.”

पुराने मुद्दे को हवा देने की कोशिश?

दक्षिण भारत को कवर करने वाली न्यूज वेबसाइट द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोंगु नाडु तमिलनाडु के पश्चिमी इलाके को कहते हैं. इसमें कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोडे, नीलगिरीज़, सालेम, कृष्णागिरी और धर्मापुरी जैसे जिले आते हैं. इन जिलों में 57 विधानसभा सीटें हैं. AIADMK-BJP गठबंधन इनमें से 53 सीटों पर संयुक्त रूप से जीतने में कामयाब रहा था. कोंगु क्षेत्र को AIADMK के प्रभाव वाला इलाका माना जाता है, जबकि DMK को यहां वोट के लिए संघर्ष करना पड़ता है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोंगु नाडु प्राचीन तमिलनाडु के 5 हिस्सों में से एक है. तमिलनाडु से जुड़े प्राचीन संगम साहित्य में इसे एक अलग हिस्से के रूप में बताया गया है. इस क्षेत्र में ओबीसी समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा है.

अखबार ने बताया कि तेलंगाना या उत्तराखंड की तरह कोंगु नाडु को तमिलनाडु से अलग करने की मांग कभी भी नहीं उठी थी. एक पूर्व AIADMK मंत्री ने अखबार से कहा,

“मुझे नहीं लगता कि ऐसा तुरंत करने की कोई योजना है. वे असल में इस मुद्दे को हवा देने के लिए एक बीज बो रहे हैं. हालांकि इसके बाद भी कोंगु नाडु कोई नया मुद्दा नहीं होगा.”

मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय नेताओं के बयानों से यही पता चलता है कि कोंगु नाडु, तमिलनाडु में एक मुद्दा जरूर है लेकिन फिलहाल इसे लेकर कोई बड़ा आंदोलन वहां नहीं चल रहा. केवल एक मंत्री के प्रोफाइल में कोंगु नाडु का जिक्र होने के चलते कुछ लोग इसे बड़ा बनाने की कोशिश जरूर कर रहे हैं. यहां एक दिलचस्प बात बताएं. जिन एल मुरुगन की प्रोफाइल में बीजेपी ने कोंगु नाडु का जिक्र किया, वे खुद इस इलाके से नहीं आते. उनका होमटाउन तो तमिलनाडु का नामक्कल जिला है.


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