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गूगल प्ले स्टोर ने मनमानी करने वाले लोन ऐप्स की छुट्टी कर दी!

इंडिया में पर्सनल लोन देने वाले ऐप्स की मनमानी और आंय-बांय-सांय रवैये को लेकर काफ़ी वक़्त से चिंताएं जताई जा रही हैं. अब गूगल ने इस ओर क़दम बढ़ाते हुए अपने प्ले स्टोर से उन सभी ऐप्स को हटा दिया है जो नियम और कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे.

गूगल इंडिया ने एक ब्लॉग पोस्ट डालकर बताया कि इसने ऐसे हजारों पर्सनल लोन ऐप्स का रिव्यू किया है जिनको सरकार और यूजर ने मार्क किया था. गूगल प्रोडक्ट, एंड्रॉयड सिक्योरिटी और प्राइवेसी की वाइस-प्रेसीडेंट सुज़ैन फ्रे कहती हैं:

“हमने उन सभी ऐप्स को प्ले स्टोर से फौरन ही हटा दिया है जो हमारी यूजर सेफ़्टी पॉलिसी को भंग कर रही थीं. हमने बाकी के लोन ऐप्स के डेवलपर को ये बताया है कि वो इस बात कि पुष्टि करें कि वो स्थानीय कानून और रेग्युलेशन के तहत काम कर रहे हैं. जो ऐप्स ऐसा करने में असफल रहेंगे उन्हें बिना कोई नोटिस दिए प्ले स्टोर से हटा दिया जाएगा.”

सुज़ैन कहती हैं कि इस मामले में गूगल जांच एजेंसियों की तफतीश में मदद करता रहेगा. इस ब्लॉग पोस्ट में ये आगे बताती हैं कि प्ले स्टोर पर सभी डेवलपर्स को गूगल प्ले डेवलपर अग्रीमन्ट मानना होता है जिसके तहत ये बात आती है कि इनके ऐप्स नियम और कानूनों के हिसाब से चलेंगे. फाइनैन्शल सर्विस वाले ऐप्स जैसे पर्सनल लोन ऐप्स को कुछ खास जानकारी मुहैया करनी होती है जिसमें शामिल है– लोन चुकाने की न्यूनतम और अधिकतम अवधि और अधिकतम सालाना ब्याज दर. सुज़ैन कहती हैं:

“इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि यूजर सही चुनाव कर रहे हैं, हम सिर्फ़ उन्हीं पर्सनल लोन ऐप को मंजूरी देते हैं जो लोन की पूरी रकम चुकाने के लिए कमज़ कम 60 दिन का वक़्त देते हों.”

गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे बहुत से ऐप पड़े हुए थे जो पैसे की वसूली महज एक हफ़्ते के वक़्त में ही करने लगते थे. कुछ का ब्याज दर तो 60% तक था और कुछ ऐप तो 10,000 रुपए के लोन पर 2,000 रुपए प्रोसेसिंग फ़ी के नाम पर काट लिया करते थे. इन ऐप्स के मुकाबले बैंक एक साल का वक़्त देकर 10% से 20% तक का ब्याज लगाते हैं. मगर जहां बैंक से लोन मिलना मुश्किल होता है, ये लोन वाले ऐप मिनटों में पैसे उधार दे देते हैं.

इसी वजह से बहुत सारे लोग गलत लोन ऐप्स के चंगुल में फंस गए जो इंसान को लूट तो रहे ही हैं, रकम की अदायगी न हो पाने पर धमकाने और परिजनों के संग ग्रुप बनाकर बदनाम करने तक का काम करते हैं. डिजिटल लेंडिंग प्रैक्टिस जैसे ऑनलाइन प्लैट्फॉर्म और मोबाइल ऐप्स को स्टडी करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक वर्किंग ग्रुप बनाया है. ये रेग्युलेटेड फाइनैन्शल सेक्टर के साथ अनरेग्युलेटेड प्लेयर के काम की भी जांच करेगा.

बहरहाल इस पूरे मामले में गूगल ने ये नहीं बताया है कि इसने कुल कितने लोन ऐप को प्ले स्टोर से हटाया है और न ही इस बारे में कोई बात की है इतने सारे ऐप इनकी पॉलिसी को ठेंगा दिखाकर इतने टाइम से प्लैट्फॉर्म पर कैसे बैठे थे. गूगल प्ले स्टोर की ढीली व्यवस्था की वजह से ही बहुत सारे गलत ऐप यहां पर पाए जाते हैं. इनके मुकाबले ऐपल ऐप स्टोर की पॉलिसी बहुत सख्त हैं और इसलिए इस टाइप का कचरा वहां देखने को नहीं मिलता.


वीडियो: इंटरनेट प्राइवेसी क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों है?

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