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क्या किसानों ने वाकई गाजीपुर बॉर्डर खाली करना शुरू कर दिया है?

सोशल मीडिया पर राकेश टिकैत (Rakesh tikait) और उनके साथियों का गाजीपुर बॉर्डर (Gazipur border) की सर्विस लेन से तंबू हटाते हुए का वीडियो वायरल हो रहा है. इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत का एक वीडियो भी आया है, जिसमें वो कह रहे हैं कि रास्ता किसानों ने नहीं, पुलिस ने बंद किया था. अब हम दिल्ली जा रहे हैं. हालांकि किसान संगठन गाजीपुर बॉर्डर को खाली करने और आंदोलन के धीमा पड़ने की चर्चाओं को खारिज कर रहे हैं.

गाजीपुर बॉर्डर पर इस घटनाक्रम से कुछ ही देर पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर किसान संगठनों को रास्ते जाम करने को लेकर फटकार लगाई थी. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि विरोध-प्रदर्शन किसानों का अधिकार है, लेकिन सड़कों को हमेशा के लिए बंद नहीं किया जा सकता है, और इस संबंध में कोई संदेह नहीं होना चाहिए.

इसी के बाद गाजीपुर से राकेश टिकैत का अवरोध हटाते हुए वीडियो सामने आया.

टिकैत ने टेंट हटाने पर क्या कहा?

भारतीय किसान यूनियन के नेताओं को कहते सुना जा सकता है कि कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए हम रास्ता बना रहे हैं. जब किसान नेता राकेश टिकैत से पूछा गया कि क्‍या सब कुछ हटा देंगे? तब उन्‍होंने कहा कि,

“हां सब हटा देंगे. इसके बाद हम दिल्ली जा रहे हैं और पार्लियामेंट पर बैठेंगे, जहां यह कानून बनाया गया है. हमें तो दिल्ली जाना है.”

खबर लिखे जाने तक गाजीपुर बॉर्डर पर काफी संख्‍या में किसान मौजूद थे. सर्विस रोड पर लगे टैंट और दूसरे सामान को हटाने का काम चल रहा था. दिल्ली पुलिस भी गाजीपुर बॉर्डर पहुंच गई.

किसान नेता रास्ता जरूर खोल रहे हैं, लेकिन इस बात से उन्होंने इंकार किया है कि गाजीपुर बॉर्डर को खाली किया जा रहा है. उन्होंने एक ट्वीट के जरिए बताया कि,

“किसानों भाइयो यह अफवाह फैलाई जा रही हैं कि गाज़ीपुर बॉर्डर खाली किया जा रहा है. यह पूर्णतया निराधार है. हम यह दिखा रहे है कि रास्ता किसानों ने नहीं, दिल्ली पुलिस ने बन्द किया है.”

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

इससे पहले, गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन के चलते बंद सड़कों को खुलवाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन से जुड़े संगठनों को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि,

“आप किसी भी तरह विरोध करिए, लेकिन इस तरह सड़क रोककर नहीं. कानून पहले से तय है. हमें क्या बार-बार ये ही बताना होगा. सड़कें साफ होनी चाहिए. हम बार-बार कानून तय करते नहीं रह सकते. आपको आंदोलन करने का अधिकार है लेकिन सड़क जाम नहीं कर सकते. अब कुछ समाधान निकालना होगा.”

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि हम किसी बड़े मुद्दे में नहीं जाएंगे. ये मामला सड़क खुलवाने से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि सड़क को पुलिस ने बंद किया है. हमने (किसानों ने) नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने दवे से पूछा कि आपकी दलील ये है कि सड़क से ना हटाया जाए, या फिर ये कि सड़क को पुलिस ने ब्लॉक किया है, आपने नहीं. जस्टिस एसके कौल ने कहा कि सड़कें साफ होनी चाहिए. उन सड़कों पर लोगों को आना-जाना पड़ता है. हमें सड़क जाम के मुद्दे से समस्या है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 26 जनवरी को लाल किले पर हिंसा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कभी-कभी आंदोलन वास्तविक कारण के लिए नहीं बल्कि अन्य कारणों के लिए होते हैं. कृषि कानूनों पर तो सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में 43 किसान संगठनों को नोटिस भेजा गया था. लेकिन भारतीय किसान यूनियन समेत सिर्फ 4 यूनियनों ने उपस्थिति दर्ज कराई है. जस्टिस कौल ने कहा कि हम किसी को यहां आने के लिए मजबूर नहीं कर सकते. सॉलिसिटर जनरल का कहना था कि कुछ संगठन अदालत में आने को तैयार हैं. हम चर्चा करना चाहते हैं. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने सड़क से हटने को लेकर किसान संगठनों को जवाब दाखिल करने के लिए 7 दिसंबर तक का समय दिया है. अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी.


वीडियो – सिंघु बॉर्डर पर युवक का शव मिला तो संयुक्त किसान मोर्चा ने क्या दावा किया?

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