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फ्रांस ने राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार की जांच शुरू की

फ्रांस ने भारत के साथ हुए 36 राफेल की डील में कथित भ्रष्टाचार और पक्षपात की जांच शुरू कर दी है. इसके लिए फ्रांस में एक जज की नियुक्ति की गई है. फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच ने इस जांच की जानकारी दी है.

इंडिया टुडे ने फ्रेंच पब्लिकेशन मेडियापार्ट (Mediapart) के हवाले से लिखा है कि आपराधिक जांच का नेतृत्व एक स्वतंत्र मैजिस्ट्रेट की ओर से किया जाएगा. जो अन्य मामलों के अलावा, पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कार्यों के आसपास उठे सवालों की जांच करेगा. ओलांद उस समय पद पर थे जब राफेल सौदा हुआ था. जबकि वर्तमान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उस समय वित्त मंत्री थे.

डसॉल्ट ने क्या कहा?

फ्रांस की पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज की फाइनेंशियल क्राइम ब्रांच (PNF) ने कहा है कि भारत सरकार और फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट के बीच 36 लड़ाकू विमानों के समझौते में कथित भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों की जांच होगी.

फ्रेंच एनजीओ शेरपा (Shrepa) ने मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. शेरपा ने इसी तरह की शिकायत पहले भी दर्ज कराई थी, लेकिन तब यानी 2018 में PNF ने इसे खारिज कर दिया था.

मेडियापार्ट ने अप्रैल 2021 में राफेल सौदे में कथित अनियमितताओं पर कई रिपोर्टें प्रकाशित की थीं. एक रिपोर्ट में, मेडियापार्ट ने दावा किया कि पीएनएफ के पूर्व प्रमुख इलियाने हाउलेट ने साथियों के आपत्ति के बावजूद राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के कथित सबूतों की जांच को स्थगित कर दिया.

डसॉल्ट एविएशन ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. इससे पहले इसने भारत-फ्रांस सौदे में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था.

126 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को शामिल करने वाला मूल अनुबंध डसॉल्ट द्वारा जीता गया था, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत टूट गई.

विपक्ष ने लगाए थे आरोप

नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में फ्रांस के साथ 36 लड़ाकू विमान राफेल की डील की थी. राहुल गांधी समेत विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर बनाया गया, जबकि उसके पास इस तरह का कोई अनुभव नहीं था. तकरीबन 60 हज़ार करोड़ के रफाल सौदे में शर्त थी कि आधी रकम का निवेश भारत में होगा. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इसका सबसे ज़्यादा फायदा अनिल अंबानी को होगा. इसे लेकर विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी और अनिल अंबानी के बीच नज़दीकी के आरोप भी लगाए थे.

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने यूपीए शासन के दौरान डील की तुलना में बहुत अधिक कीमत पर फ्रांस के साथ डील किया. राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने मांग की कि थी कि सरकार को राफेल की कीमत का खुलासा करना चाहिए. सरकार ने मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि कीमत का खुलासा सौदे की गोपनीयता के तहत आता है. राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्हें फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा “व्यक्तिगत रूप से” बताया गया था कि मोदी सरकार रक्षा सौदे को खतरे में डाले बिना राफेल की कीमत का खुलासा कर सकती है.

केंद्र को पहला झटका तब लगा जब फ्रांसीसी प्रकाशन मेडियापार्ट ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद का इंटरव्यू लिया जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पास भारतीय ऑफसेट पार्टनर चुनने का कोई विकल्प नहीं था और रिलायंस का नाम भारतीय पक्ष ने दिया था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सौदे पर एक जनहित मामले की सुनवाई की और कहा कि उसने इसमें कुछ भी गलत नहीं पाया.

कांग्रेस ने सरकार को घेरा

फ्रांस में राफेल डील की जांच के आदेश दिए गए हैं. खबर सामने आने के बाद, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि राफेल डील में गड़बड़ी हुई है. इस मामले की जांच के बाद राफेल डील का सच सामने आ गया है. कांग्रेस ने एक बार फिर कहा कि राफेल डील में घूस दी गई है. कांग्रेस ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि अनिल अंबानी की कंपनी को डील में साझेदार बनाने के फैसला भारत सरकार का था.

BJP ने पलटवार किया

कांग्रेस के बाद बीजेपी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि फ्रांस में एक NGO ने राफेल को लेकर शिकायत की है और उसके लिए वहां एक मजिस्ट्रेट अपॉइंट किया गया है. इसे भ्रष्टाचार के रूप में देखने की जरूरत नहीं है. कांग्रेस और राहुल गांधी इसे लेकर भ्रम फैला रहे हैं. राहुल गांधी जिस तरह से व्यवहार कर रहे हैं उससे लगता है कि वह कंपनियों की कठपुतली की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं. संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और CAG के फैसले को जनता ने देखा है. लोकसभा चुनाव में राहुल ने भ्रम फैलाया लेकिन जनता ने उसे नहीं और हमें मैंडेट दिया.


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