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नागपुर में डॉक्टर ने कोरोना मरीज़ से लाखों रुपये ठग लिए?

कोरोना वायरस से देश का बुरा हाल है. हर दिन लाखों लोग संक्रमित हो रहे हैं और हज़ारों लोगों की मौत हो रही है. ऑक्सीजन, दवाइयां और हॉस्पिटल में बेड्स की किल्लत देखी जा रही है. ऐसे में ऑक्सीजन और बेड्स को लेकर कई फ्रॉड की रिपोर्ट भी सामने आ रही है. कई प्रदेशों की पुलिस इस महामारी के दौरान हो रहे मेडिकल फ्रॉड को लेकर कड़ी कारवाई कर रही है. महाराष्ट्र के नागपुर से भी ऐसी बातें सामने आ रही हैं.

नागपुर के VIMS हॉस्पिटल के डॉक्टर राजेश सिंघानिया पर लाखों रुपये ठगने के आरोप लगाए गए हैं. मरीज़ किशोर साखरकर के बेटे जयेश साखरकर का आरोप है कि डॉक्टर राजेश सिंघानिया ने उनसे इलाज़ के नाम पर 4.5 लाख रुपये ले लिए और अब न ही बिल दे रहे हैं और न ही पैसे लौटा रहे हैं. इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी वायरल है. पूरा मामला क्या है, आइए जानते हैं.

दी लल्लनटॉप से बात करते हुए जयेश ने बताया है कि उनके पिता कोरोना से पीड़ित थे और नागपुर के कोविड केयर सेंटर में  22 अप्रैल से उनका इलाज़ चल रहा था. लेकिन 25 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़ गई. ऐसे में उन्हें सेंटर के डॉक्टर्स ने बताया कि मरीज़ को किसी बेहतर हॉस्पिटल में शिफ्ट कर लीजिए क्योंकि उन्हें वेंटीलेटर और आईसीयू बेड आदि की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में उन्हें VIMS यानी विदर्भ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के बारे में पता चला. जयेश ने आगे कहा,

मुझे बताया गया कि अगर आप एडवांस 5 लाख रुपये कैश जमा कर देते हैं तो हम मरीज़ को एडमिट कर लेंगे. मैं 4.5 लाख रुपये जमा कर पाया. उन्होंने पिता को एडमिट कर लिया लेकिन उन्होंने उस वक्त बिल देने से इंकार कर दिया. कहा कि आख़िरी में हिसाब किया जाएगा. मुझे बताया गया कि अगर जमा किए गए पैसों में से पैसे बच जाएंगे तो उन्हें लौटा दिया जाएगा और अगर अधिक पैसे लगते हैं तो आपको जमा करने होंगे.

Rajesh Singhania
डॉक्टर राजेश पर आरोप है कि उन्होंने कोरोना मरीज़ से ठगी की है.

जयेश ने मामले को लेकर आगे बताया कि,

इसके बाद पापा का इलाज़ शुरू हुआ. उन्हें वेंटीलेटर की ज़रूरत नहीं पड़ी. वह 4 दिन आईसीयू वार्ड में रहे और फिर 2 दिन जनरल वार्ड में. कुल 6 दिन वह हॉस्पिटल में रहे. सातवें दिन वह डिस्चार्ज हो गए. इन दिनों में 4.5 लाख जमा किए जाने के अतिरिक्त 1.2 लाख रुपये दवाइयों के लिए. मुझे 1.2 लाख रुपये के बिल दिए गए लेकिन बाकी के 4.5 लाख रुपये का बिल देने या पैसे वापस करने से हॉस्पिटल और डॉक्टर सिंघानिया ने इनकार कर दिया.

इस घटना में अमर अग्रवाल का क्या रोल है?

जयेश ने दी लल्लनटॉप से बात करते हुए बताया कि अमर अग्रवाल नाम के शख्स ने उन्हें उनके पिता को बेड दिलावाने में मदद की थी. आगे उन्होंने बताया कि,

इनके संगठन से जुड़े लोग लगातार 5-6 हॉस्पिटल में खाली बेड की जानकारी साझा कर रहे हैं जबकि सरकार वेबसाइट पर कोई भी बेड खाली नहीं दिखता.

ऐसे में हमने अमर अग्रवाल से भी बात की. उन्होंने बताया-

हमलोग इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया, नागपुर चैप्टर से जुड़े हुए हैं. हम 2 महीने से नागपुर में कोरोना से पीड़ित लोगों के लिए काम कर रहे हैं. लोगों को हॉस्पिटल के खाली बेड के बारे में बता रहे हैं. जयेश के साथ हुई धोखाधड़ी को लेकर कोई जानकारी नहीं है.

मामले को लेकर हॉस्पिटल और डॉक्टर का क्या कहना है?

सबसे पहले हमने VIMS को कॉल किया और हॉस्पिटल का पक्ष जानना चाहा. रिसेप्शन पर जिस आदमी ने कॉल उठाया शुरुआत में वह अपना नाम तक बताने से इनकार कर रहा था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम बताया और कहा कि हम आपको डायरेक्टर सर से बात करके बताते हैं. कुछ देर के बाद उन्होंने बताया कि डॉक्टर राजेश सिंघानिया से संपर्क नहीं हो रहा है. इसके बाद हमने डॉक्टर राजेश से बात की. उन्होंने इस मामले पर किसी भी तरह का कोई भी बयान देने से साफ़ इंकार कर दिया.

प्रशासन क्या कर रहा?

टीवी9 मराठी की एक रिपोर्ट मुताबिक़ मामले को लेकर जयेश साखकर ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और स्थानीय सदर पुलिस थाने के साथ डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. डॉक्टर के साथ बिल को लेकर चर्चा का एक ऑडियो क्लिप वायरल है. इस ऑडियो में राजेश सिंघानिया की आवाज़ होने का दावा किया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस और नागपुर महानगर पालिका मामले की जांच कर रही है.


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