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क्या गलवान में पीछे हटकर चीन 1962 वाली चाल दोहरा रहा है?

भारत और चीन के बीच लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव कम होने की खबरें हैं. 5 जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई. बातचीत 2 घंटे तक चली. इसके बाद से LAC पर तनाव थोड़ा सा कम होता दिख रहा है. सूत्रों के हवाले से आई खबरों के अनुसार, चीनी सेना गलवान घाटी में पेट्रोलिंग पॉइट 14 और 15 पर पीछे हटी है. पीपी 14 पर ही 15 जून वाली हिंसक झड़प हुई थी. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी सतर्क रहने की जरूरत है. क्योंकि 15 जून को लड़ाई भी तनाव कम करने की प्रक्रिया के बीच ही हुई थी. साथ ही कुछ लोग 1962 और अभी की समानताएं भी बता रहे हैं. उनका कहना है कि 1962 में भी गलवान में चीन पीछे हटा था. लेकिन उसके तीन महीने बाद ही उसने जंग छेड़ दी थी. ऐसे में एक बार जान लेते हैं कि 15 जून की खूनी झड़प के बाद अभी तक क्या हुआ है?

मई के महीने से शुरू हुआ तनाव

दरअसल यह पूरा वाकया मई के महीने से शुरू हुआ था. सिक्किम के नाकू ला में भारत-चीन सैनिकों में हाथापाई और धक्कामुक्की हुई. इसमें दोनों ओर के सैनिक घायल हुए. बाद में सामने आया कि लद्दाख में LAC पर भी माहौल गर्म है. चीन LAC पर भारतीय हिस्से में घुस आया है. उसके सैनिक भारत के सड़क निर्माण पर ऐतराज जता रहे थे. इसके बाद तीन जगहों पर चीनी सेना ने डेरा डाल दिया. जवाब में भारत ने भी अपनी तैनाती बढ़ा दी. LAC पर तनाव की खबरें छन-छन कर आ रही थीं. लेकिन मई के आखिरी सप्ताह में सब साफ हो गया. सैटेलाइट इमेजेस और डिफेंस पत्रकारों ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मामला काफी गंभीर है. और चीन LAC को बदलने की फिराक में है.

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एक भारतीय जवान आर्मी के ट्रक के साथ खड़े हुए, ये ट्रक लद्दाख जा रहा है. (फोटो- PTI)

सात बार मिलिट्री लेवल की बातचीत, मगर सब बेनतीजा

खबरें आईं कि पैंगोंग लेक के आसपास चीनी सेना ने डेरा डाल दिया है. इस लेक के फिंगर 8 तक भारत का इलाका है. लेकिन भारत फिंगर 4 इलाके तक ही गश्त करता रहा है. चीन ने दावा किया कि फिंगर 4 से आगे का इलाका उसका है. यह दावा 1962 की लड़ाई के बाद तय हुई LAC से उलट था. ऐसे में सोशल मीडिया पर लद्दाख में सैनिकों के बीच हाथापाई के कई वीडियो और फोटो सामने आए. लेकिन इनके बारे में पुष्टि नहीं हो पाई. पहले पहल स्थानीय लेवल पर ही मामले को सुलझाने की कोशिशें की गई. सात बार मिलिट्री लेवल की बातचीत हुई. इसमें चार बार ब्रिगेडियर और तीन बार मेजर जनरल रैंक ऑफिसर की बातचीत बेनतीजा रही.

तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के कमांडर लेवल की बातचीत का उपाय निकाला गया. यह बातचीत चुशूल सेक्टर में चीनी इलाके में पड़ने वाले मोल्डो में हुई. 6 जून को मीटिंग के बाद खबरें आईं कि तनाव कम करने पर सहमति बनी है. भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों देशों के बीच पहले जो समझौते हुए हैं, उन्हीं के हिसाब से आगे बढ़ा जाएगा. यह 10 जून के आसपास का समय था.

भारत और चीन सेना के जवान. यह फोटो साल 2006 की है. (File Photo:AP)
भारत और चीन सेना के जवान. यह फोटो साल 2006 की है. (File Photo:AP)

लेकिन 16 जून को दोपहर में गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच लड़ाई की खबर आई. बताया गया कि 15 जून को गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकों में हिंसक झगड़ा हुआ. पहले एक कर्नल सहित तीन फौजियों के शहीद होने की खबर आई. शाम होते-होते यह आंकड़ा एक कर्नल सहित 20 जवानों का हो गया. झगड़े में चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबरें आईं. लेकिन चीन ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने नुकसान की पुष्टि नहीं की है.

चीन ने नहीं मानी मीटिंग की बात, फिर भारत को ही ठहराया लड़ाई का जिम्मेदार

गलवान में लड़ाई की वजह भी सामने आई. कहा गया है कि सहमति के अनुसार, चीन ने गलवान घाटी में अपनी चौकी हटा ली थी. लेकिन बाद में फिर लगा ली. उसने नए सैनिक तैनात कर दिए. जिन्होंने चौकी हटाने की बात कहने पर हमला कर दिया. मारे गए कर्नल और जवान 16 बिहार रेजीमेंट के थे. चीन ने इस हिंसा का ठीकरा भारत पर फोड़ा. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सेना ने एलएसी का उल्लंघन किया और चीनी सेना को उकसाया. भारत ने इसे नकारा. पीएम नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. लद्दाख के बारे में जानकारी दी. लेकिन कहा कि कोई भारतीय सीमा में नहीं घुसा है. उन्होंने चीन का नाम नहीं लिया. इस पर विवाद हुआ. प्रधानमंत्री कार्यालय को सफाई देनी पड़ी. कहा कि पीएम के बयान की गलत व्याख्या की जा रही है.

गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों में 15 जून की रात को लड़ाी हुई थी. इसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे.
गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों में 15 जून की रात को लड़ाई हुई थी. इसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे.

गलवान हिंसा के बाद लद्दाख और दिल्ली में तनाव बढ़ गया. भारत ने LAC पर सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा दी. साथ ही एयरफॉर्स को भी LAC के पास तैनात कर दिया. वहीं चीन ने कहा कि गलवान घाटी LAC पर उसके इलाके में पड़ती है. भारत ने 21 जून को जवाब दिया. कहा कि गलवान घाटी में भारत बिना किसी घटना के लंबे समय से गश्त कर रहा है. भारत ने जो भी निर्माण किया है, वह उसने LAC पर अपनी साइड में ही किया है. गलवान घाटी को लेकर चीन का दावा सरासर गलत है.

इसके बाद भारत ने LAC पर हालात को देखते हुए सेना को गोली चलाने, जरूरत के मुताबिक हथियार खरीदने जैसी छूट दी. 22 जून को एक बार फिर से तनाव कम करने को लेकर पहल हुई. 11 घंटे तक मोल्डो में फिर से कमांडर लेवल की मीटिंग हुई. इसमें भी तनाव कम करने को लेकर दोनों पक्षों में सहमति रही. लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा.

28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में भी लद्दाख में तनाव का जिक्र किया. लेकिन फिर से चीन का नाम नहीं लिया. एक दिन बाद यानी 29 जून को भारत सरकार ने चीन के 59 ऐप्स को बैन कर दिया. इनमें टिकटॉक. बिगो, शीन, क्लब फैक्ट्री जैसे नाम थे. सरकार ने इस कदम को डिजिटल स्ट्राइक के रूप में पेश किया. साथ ही कई सरकारी ठेकों में चीनी कंपनियों से काम वापस ले लिया गया.

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लेह में पीएम नरेंद्र मोदी जवानों को संबोधित करते हुए. (फोटो- ट्विटर BJP)

पीएम की यात्रा के 3 दिन बाद सहमति की खबर

3 जून को अचानक प्रधानमंत्री मोदी लेह पहुंच गए. वहां उन्होंने हालात का जायजा लिया और सैनिकों को भाषण दिया. साथ ही बिना नाम लिए (एक बार फिर से) चीन को निशाने पर लिया. उसे विस्तारवादी ताकत कहा. पीएम की यात्रा के तीन दिन बाद 6 जून को LAC पर तनाव कम होने की खबरें आईं. भारत की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया. केवल सूत्रों से जानकारी मिली. बताया कि पैट्रोलिंग पॉइंट 14 में दोनों सेनाएं करीब दो किलोमीटर तक पीछे हटी हैं. दो किलोमीटर के इलाके को बफर जोन बनाया गया है. यानी यहां कोई पोस्ट और सैनिक नहीं रहेगा. चीन ने जरूर आधिकारिक बयान दिया. कहा कि तनाव कम करने के लिए दोनों देशों में आज कुछ प्रोग्रेस हुई है. हालांकि क्या प्रोग्रेस हुई है ये चीन ने नहीं बताया है.

अगले कुछ दिनों तक भारतीय सेना LAC पर जांच करेगी कि क्या वाकई चीनी सेना पीछे हटी है? और क्या उसने अपने टेंट वगैरह भी हटा लिए हैं. इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी. हालांकि अभी तक तनाव कम करने की कोई टाइमलाइन तय नहीं हुई है. ऐसे में यह साफ नहीं है कि LAC पर टेंशन और सेना कब कम होगी?

इन सबके बीच एक अखबार की कटिंग काफी वायरल हो रही है. इसमें 1962 की एक खबर दिख रही है. लिखा है कि ‘गलवान पोस्ट से चीनी सेना पीछे हटी, भारतीय सैनिकों ने गज़ब का साहस दिखाया’ इसे शेयर करते हुए लिखा जा रहा है कि साल 1962 में भी ऐसा ही कुछ हुआ था. इसके 100 दिन बाद ही चीन ने हमला बोल दिया था. इसमें भारत को काफी नुकसान हुआ था. इसलिए भारत को सावधान और सतर्क रहने को कहा जा रहा है. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने इंडिया टुडे से कहा,

ऐसा नहीं है कि दोनों पक्षों में पहले कभी तनाव कम करने पर सहमति नहीं बनी. ऐसा पहले 6 जून को भी हुआ था. इसलिए वेट एंड वॉच अच्छा रहेगा.


Video: गलवान घाटी के जिस इलाके में लड़ाई हुई थी वहां नया क्या हो रहा है?

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