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दिल्ली दंगे: हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल मौत मामले की चार्जशीट में योगेंद्र यादव का नाम

फरवरी, 2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों में दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की जान चली गई थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव का भी नाम है. उनके अलावा छात्र नेता कवलप्रीत कौर और वकील डीएस बिंद्रा के नाम चार्जशीट में शामिल हैं. हालांकि तीनों का नाम 17 आरोपियों की लिस्ट में नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 8 जून को फाइल की गई चार्जशीट में कहा गया है,

चांद बाग प्रदर्शन आयोजित करने वालों से डीएस बिंद्रा (AIMIM), कवलप्रीत कौर (AISA), देवांगना कलिता (पिंजड़ा तोड़), सफूरा, योगेंद्र यादव का लिंक बताता है कि हिंसा के पीछ छिपा हुआ एजेंडा था. पुलिस के मुताबिक, चांद बाग प्रोटेस्ट मिड-जनवरी से चल रहा था.

चार्जशीट के मुताबिक, 24 फरवरी को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में गंभीर सांप्रदायिक दंगे हुए, जिसमें 750 से ज़्यादा केस दर्ज किए गए. 53 लोगों की मौत हुई, जिसमें हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल भी शामिल हैं.

हेड कॉन्स्टेबल की मौत पर क्या है चार्जशीट में?

चार्जशीट कहती है,

रतन लाल एसीपी (गोकलपुरी) और डीसीपी (शाहदरा) और कुछ दूसरे पुलिस अफसर चांद बाग प्रदर्शन स्थल के सबसे पास मौजदू थे. जब भीड़ ने हमला किया तो वो (रतन लाल) वज़ीराबाद रोड पर पांच फीड ऊंचा डिवाइडर फांद नहीं सके. गोली लगने और पत्थर लगने के बाद वो गिर गए.

चार्जशीट में कहा गया है कि रतन लाल को डंडों और रॉड से पीटा गया. उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. उनका पोस्टमॉर्टम 25 फरवरी को हुआ और चार्जशीट के मुताबिक, उनकी मौत गोली लगने से हुई. कुल मिलाकर उनके शरीर पर 21 चोट के निशान थे.

चार्जशीट में कहा गया कि हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल (फोटो में) पर हमला हुआ. उन्हें काफी चोट आई. रतन लाल को गोली भी लगी थी. रतन लाल की इलाज के दौरान ही मौत हो गई. फोटो: India Today
चार्जशीट में कहा गया कि हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल (फोटो में) पर हमला हुआ. उन्हें काफी चोट आई. रतन लाल को गोली भी लगी थी. रतन लाल की इलाज के दौरान ही मौत हो गई. फोटो: India Today

17 आरोपी, ज्यादातर स्थानीय

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने रामपुरी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट राकेश कुमार के सामने 8 जून को चार्जशीट फाइल की. रतन लाल मौत मामले में 17 आरोपी 18 से 50 साल तक के हैं और ज्यादातर चांदबाग इलाके के रहने वाले हैं. कुछ पड़ोस के प्रेम नगर, मुस्ताफाबाद और जगतपुरी जैसे इलाकों के हैं.

योगेंद्र यादव ने कहा- सब कुछ पब्लिक डोमेन में

चार्जशीट में योगेंद्र यादव का नाम चांद बाग प्रदर्शन स्थल के एक गवाह के बयान में है. इसमें लिखा है,

”….प्रदर्शन यहां शुरू हुआ. लोग बाहर से बुलाए गए और वकील भानु प्रताप, डी एस बिंद्रा, योगेंद्र यादव और कई जेएनयू, जामिया और डीयू के छात्र आए, जो एनआरसी और सरकार के खिलाफ बोल रहे थे और कहते थे कि मुसलमानों को परेशान होना चाहिए. ये 10 जनवरी से 24 फरवरी तक 50 दिनों तक चला.”

योगेंद्र यादव के खिलाफ चार्जशीट में धाराएं दर्ज हैं. चार्जशीट में कहा गया है, ”…कवलप्रीत कौर, देवांगना कलिता, सफूरा, योगेंद्र यादव प्रदर्शन स्थल पर आते थे और हेट स्पीच देते थे. पब्लिक को हिंसा के लिए भड़काते थे.”

योगेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया,

मैंने जो भी कहा वो पब्लिक डोमेन में है. प्लीज एक ऐसा वाकया बताइए, जहां मैंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर हिंसा भड़काई हो.

कवलप्रीत कौर का कहना है कि वो चार्जशीट देखने के बाद इस पर अपनी टिप्पणी करेंगी. वहीं, वकील डीएस बिंद्रा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

मैं पांच साल से लंगर आयोजित करता आया हूं. मुझे चांद बाग के लिए भी बुलाया गया. मुझे तारीख याद नहीं है. मैंने केवल लंगर आयोजित किया. मैं हिंसा के लिए कैसे जिम्मेदार हूं.

दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा ने चार्जशीट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.


अन्ना आंदोलन के बाद योगेंद्र यादव एंटी CAA प्रोटेस्ट में एक्टिव नज़र आए, स्वराज इंडिया को कितना फायदा?

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