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वकील साहब भूल गए थे कि वो वकील हैं हक़ीम नहीं, बार काउंसिल ने याद दिला दिया

दीवारों पर विज्ञापन अक्सर देखे होंगे आपने. काफी आम बात है. नीम हकीमों के विज्ञापनों से लेकर राजनीतिक पार्टियों तक के विज्ञापन दीवारों पर दिखते हैं. लेकिन एक वकील साहब को अपना विज्ञापन करना काफी महंगा पड़ गया है. दिल्ली बार काउंसिल ने वकील का लाइसेंस आठ हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है. 1994 से बार काउंसिल में इन वकील साहब का नामांकन था.

साउथ दिल्ली में कई सार्वजनिक दीवारों पर अपना प्रचार करने वाले वकील पर दिल्ली बार काउंसिल ने ऐक्शन लिया है. दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम कहते हैं कि कोई भी वकील काम मांगने के लिए इस तरह का प्रचार नहीं कर सकता. बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम के मुताबिक वकील काम मांगने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन नहीं कर सकते हैं.

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दिल्ली बार काउंसिल का आदेश.

इस मामले पर हमने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट विजयालक्ष्मी से बात की. उन्होंने कहा,

“नियमों के मुताबिक वकील अपना प्रचार नहीं कर सकते. वे अपनी लीगल फर्म की वेबसाइट बनवा सकते हैं लेकिन उसका प्रचार नहीं करेंगे. वे अपने घर या ऑफिस पर नेम प्लेट लगा सकते हैं लेकिन उसका भी एक साइज फिक्स है. वकालत के पेशे में प्रचार की गुंजाइश नहीं है. हालांकि हम देखते हैं कि जब एसोसिएशन आदि चुनाव होते हैं तब काफी प्रचार किया जाता है.”

मानकों के खिलाफ है प्रचार

वकीलों के पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के लिए जो मानक निर्धारित किए गए हैं, प्रचार इन मानकों के खिलाफ है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वकील का नंबर दीवार पर लिखा पाया. फोन किया तो साफ हो गया कि ये विज्ञापन वकील का ही है. बार काउंसिल ने पाया कि वकील ने इस तरह विज्ञान करके बार नियमों को तो तोड़ा ही, साथ ही दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी ऐक्ट, 2007 का भी उल्लंघन किया है.

दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2007 की धारा 3 के मुताबिक कोई भी शख्स अगर किसी दीवार को इस तरह पेंट करता है या फिर उस पर स्याही, चॉक आदि से लिखता है तो उसे एक साल की सजा या फिर 50 हजार का जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है. काउंसिल का कहना है कि वकालत एक ऐसा काम है, जिसके नैतिक मानदंड और नियम होते हैं.

दिल्ली बार काउंसिल ने कहा कि वकालत कोई व्यापार नहीं है, बल्कि ये एक महान काम है और वकील शकील अहमद ने नैतिक मानदंडों का उल्लंघन किया है. बार ने उनसे यह भी पूछा कि क्यों ना उनकी सदस्यता को स्थाई रूप से खत्म कर दिया जाए. हमने वकील साब से इस सब बारे में पूछने के लिए फोन लगाया, लेकिन उधर से कहा गया कि वो कोई दूसरा शकील होगा, वो मैं नहीं हूं.


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