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पीएम केयर्स फंड से दिए गए वेंटिलेटर को लेकर ऐसी लापरवाही चौंका देगी!

केंद्र सरकार ने पंजाब और राजस्थान को दिए गए वेंटिलेटर्स का ऑडिट शुरू कर दिया है. इन राज्यों को ये वेंटिलेटर पीएम केयर्स स्कीम के तहत दिए गए थे. कोविड-19 महामारी के बीच कबाड़ में पड़े वेंटिलेटर की तस्वीरें सामने आने के बाद से इन्हें लेकर दोनों राज्यों और केंद्र के बीच घमासान छिड़ा हुआ है. राज्य इन वेंटिलेटर्स को खराब बता रहे हैं, जबकि केंद्र आरोपों को खारिज कर रहा है. अब पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश पर राज्यों के आरोपों को वेरिफाई किया जा रहा है.

राज्य सरकार के क्या आरोप हैं?

पंजाब और राजस्थान की सरकारों के आरोप हैं कि PM Cares फंड से उन्हें जो वेंटिलेटर दिए गए हैं, वो या तो खराब हैं या फिर बहुत ही साधारण स्टैंडर्ड के हैं. राजस्थान के मंत्री ने तो इन वेंटिलेटर को कबाड़ तक बता दिया है.

पंजाब सरकार का कहना है-

PM Cares Fund से हमें 320 वेंटिलेटर मिले. पंजाब मेडिकल कॉलेजों में से तीन के प्रमुखों ने दावा किया है कि इनमें से 237 वेंटिलेटर या तो डिफेक्टिव हैं या फिर काम ही नहीं कर रहे. टेक्नीशियन इन वेंटिलेटर्स की रिपेयरिंग के बाद भी काम करने लायक नहीं बना पा रहे.

इससे पहले, पंजाब के कोविड-19 रिस्पॉन्स और प्रोक्योरमेंट कमेटी के प्रमुख डॉ. राज बहादुर ने बीते हफ्ते कहा था-

पटियाला मेडिकल कॉलेज को PM Cares Fund से 98 वेंटिलेटर मिले थे. इनमें से 48 ठीक करने के बाद काम चलाने लायक हो पाए. लेकिन अब भी उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. डर है कि कहीं मशीनें टूट ना जाएं, या फिर मरीज़ों की जान खतरे में ना पड़ जाए.

केंद्र सरकार का क्या कहना है?

राज्यों के इन आरोपों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय खारिज कर चुका है. मिनिस्ट्री का कहना है कि इन राज्यों ने मशीनों को छह महीनों से भी अधिक समय तक स्टोर में बंद रखा, जबकि कोविड-19 के मरीज वेंटिलेटर की कमी के चलते सांसों के लिए तड़पते रहे.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने इस बाबत सभी राज्य के मुख्य सचिवों को एक कड़ा पत्र लिखा, कहा-

जो वेंटिलेटर राज्यों को दिए गए और जो इंस्टॉल किए गए, उनमें बड़ा गैप है. ज़्यादातर वेंटिलेटर गोदामों में पड़े हैं. उन्हें लगाने में देरी हुई. इसकी वजह अस्पतालों में कनेक्टर्स न होना, पाइप्ड ऑक्सीजन व बिजली की फिटिंग न करवाना प्रमुख है. प्रशिक्षित लोगों की कमी भी एक वजह रही है.

इस बारे में इंडिया टुडे ने छानबीन करने की कोशिश की. इंडिया टुडे के मुताबिक, केंद्र की तरफ से 43,778 वेंटिलेटर डिस्पैच किए गए. इनमें से 6 अप्रैल तक 38,803 वेंटिलेटर ही इंस्टॉल किए गए. लगभग 5000 वेंटिलेटर को लगाने का काम अभी बाकी है.

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केंद्र ने राज्यों को कितने वेंटिलेटर भेजे, और उनमें से कितने इस्तेमाल हुए. इस डाटा से साफ हो जाता है.

बाकी राज्यों का भी हाल बुरा

केंद्र की ओर से दिए गए वेंटिलेटर को इस्तेमाल करने सिर्फ पंजाब और राजस्थान ही पीछे नहीं हैं. इनके अलावा आंध्र प्रदेश को पीएम केयर्स फंड से 63 वेंटिलेटर दिए गए थे, जिनमें से 28 इंस्टॉल नहीं हुए. उत्तर प्रदेश को अक्टूबर में 4,016 वेंटिलेटर्स मिले थे. इनमें से 192 वेंटिलेटर 6 अप्रैल तक लगाए ही नहीं गए. इसी तरह ओडिशा को मिले 567 वेंटिलेटर में से 23 प्रतिशत यानि 133 का इस्तेमाल नहीं किया गया. केंद्र की ओर से पहुंचाए गए वेंटिलेटर को इस्तेमाल न करने वाले राज्यों की लिस्ट में सबसे ऊपर कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान हैं.

पंजाब के आरोपों में कितना दम?

पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से दिए गए वेंटिलेटर की क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं. लेकिन इंडिया टुडे टीवी की पड़ताल में नया मामला निकलकर आया. केंद्र की तरफ से पंजाब को 25 वेंटिलेटर्स का पहला बैच 8 अक्टूबर 2020 को मिला था. उसके बाद 75 वेंटिलेटर और मिले. हेल्थ मिनिस्ट्री के सूत्र बताते हैं कि वेंटिलेटर बनाने वाली गुजरात की कम्पनी Jyoti CNC ने पंजाब सरकार से कई बार इन वेंटिलेटर्स को इंस्टॉल करने के लिए कहा. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पंजाब सरकार के अधिकारी कहते रहे कि इन वेंटिलेटर्स को वापस ले लें, इनकी जरूरत नहीं है.

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कोरोना काल में तमाम अस्पतालों में वेंटिलेटर की मारामारी मची है. (फाइल फोटो)

इसी साल अप्रैल में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी विनी महाजन को चिट्ठी लिखी थी. इसमें 809 वेंटिलेटर्स में से 251 को जल्दी इंस्टॉल करने के लिए कहा था. सप्लाई के छह महीने बाद पिछले महीने से पंजाब सरकार ने वेंटिलेटर आवंटित करना शुरू किया. 23 अप्रैल को पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉर्पोरेशन ने पटियाला और अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को 50 वेंटिलेटर जारी किए.

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Govt Medical College.

 

पंजाब की तरफ से ये भी कहा जा रहा है कि जो मशीनें अक्टूबर 2020 में सप्लाई की गईं, उन्हें इंस्टॉल करने के लिए अप्रैल के आखिरी हफ्ते में कॉन्टैक्ट किया गया. अप्रैल में जब टीम मशीनों को इंस्टॉल करने पहुंची, तो पता चला कि अस्पतालों के पास पाइप ऑक्सिजन सिस्टम को मशीनों से कनेक्ट करने वाले कनेक्टर्स ही नहीं थे.

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इस मामले में हेल्थ मिनिस्ट्री के अधिकारी ने कहा-

हर अस्पताल के पाइप ऑक्सिजन सिस्टम का एक अलग कनेक्टर होता है. ऐसे में ये अस्पताल की ज़िम्मेदारी होती है कि वो इसे उपलब्ध करवाए. लेकिन छह महीनों में राज्य सरकारों ने कनेक्टर्स के बारे में सोचा तक नही.

इन वेंटिलेटर्स को इंस्टॉल करने वाली कम्पनियों का ये भी कहना है कि अस्पतालों के पास मेडिकल ऑक्सीजन का इतना प्रेशर नहीं है कि वो इनमें से 50 वेंटिलेटर्स को भी चला सकें.

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Jyoti CNC report

केंद्र सरकार का ये भी कहना है कि कोरोना की पहली लहर के बाद PM Cares के तहत 50,000 वेंटिलेटर और खरीदने की योजना बनाई गई थी. लेकिन राज्य सरकारों ने यहां भी ढिलाई बरती. अक्टूबर तक ज्यादातर राज्यों ने वेंटिलेटर की मांग ही नहीं की. अब जब कोविड की दूसरी लहर से हालात हाथ से निकलने लगे, तब जाकर राज्यों ने और वेंटिलेटर मांगे. इसके बाद अप्रैल में केंद्र ने 12,000 वेंटिलेटर भेजे.

अस्पतालों ने खड़े किए हाथ

उत्तर प्रदेश में फिरोज़ाबाद के मेडिकल कॉलेज को 65 वेंटिलेटर भेजे गए थे. लेकिन लगभग छह महीनों तक वो यूं ही पड़े रहे. अब मेडिकल कॉलेज ने ये कहकर मना कर दिया है कि उसके पास इन्हें इंस्टॉल करने के इंतजाम नहीं हैं.

महाराष्ट्र में नासिक नगर निगम के कैलाश जाधव ने भी कहा कि शहर की मेडिकल फैसिलिटी के पास इन वेंटिलेटर्स को फिट करने के लिए कनेक्टर ही नहीं हैं.

बिहार के सुपौल में सरकारी अस्पतालों तक वेंटिलेटर्स पहुंचे, लेकिन उनका कहना है कि उनके पास इन मशीनों को चलाने के लिए स्टाफ नहीं है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में विस्तृत सर्वे कराया है. इसमें पता चला कि कई राज्य केंद्र की ओर से दिए गए वेंटिलेटर का उपयोग करने में नाकाम रहे हैं. कई राज्यों के अस्पतालों के पास टेक्नीशियन ही नहीं हैं, जो वेंटिलेटर की देखरेख कर सकें. उनके अलार्म और अलर्ट को समझ सकें.

ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि वेंटिलेटर्स को खराब बताने की पंजाब की शिकायत दरअसल उनके रखरखाव और देखरेख में कमी का मामला है.

भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के एक अधिकारी ने बताया कि पीएम केयर्स के अंतर्गत दिए गए इन वेंटिलेटर्स पर राज्यों की अलग-अलग अप्रोच रही. BEL के अधिकारी ने इस बारे में केरल की तारीफ की. कहा-

इस मामले में सिर्फ केरल बेहद खास रहा. उनके अधिकारियों ने हर एक मशीन को चेक किया. उनके टेक्नीशियंस ने वेंटिलेटर्स को लेकर ऑनलाइन कोचिंग ली. इसकी वजह से केरल से इन्हें लेकर मामूली शिकायतें ही आईं.

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वेंटिलेटर को लेकर भले ही जो खींचतान हो, लेकिन इसका खामियाज़ा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. कोविड की दूसरी लहर से निपटने में तैयारियों की कमी के जो आरोप सामने आ रहे हैं. ये उसका जीता-जागता उदाहरण है.


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