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यूपी में कोरोना के शक़ में लाश सड़क पर छोड़कर चले गए गांव वाले !

मुम्बई से यूपी के प्रतापगढ़ अपने गांव आये एक शख्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. सांस फूलने की दिक्कत के बाद युवक को गांव वाले इलाज के लिए स्वरूप रानी मेडिकल कालेज प्रयागराज ले गए थे, जहां से वापस प्रतापगढ़ जिला अस्पताल के लिए भेज दिया गया. रास्ते मे ले आते समय युवक की मौत हुई. लेकिन गांव वालों को जब लगा कि मौत कोरोना की वजह से हुई होगी, तो युवक का शव बीच रास्ते छोड़ दिया और गांव वापस लौट गए.

# क्या हुआ था?

पांच दिन पहले प्राइवेट वाहन से रामनरेश अपने गांव आया था. मुंबई में रहने वाला रामनरेश वहां होटल में काम करता था. गांव आते ही रामनरेश को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई. जब समस्या बढ़ गई तब गांव के लोग और रिश्तेदार रामनरेश को लेकर ज़िला अस्पताल पहुंचे. परिजन बता रहे हैं कि वहां कोरोना की कोई जांच किए बिना ही रामनरेश को प्रयागराज स्वरूपरानी अस्पताल रेफर कर दिया गया.

वहां भी उसकी हालत में सुधार नही हुआ. डॉक्टरों ने उसे फिर से प्रतापगढ़ जिला अस्पताल में इलाज कराने की सलाह देकर वापस भेज दिया. रामनरेश की रास्ते मे ही मौत हो गई. जिस गाड़ी से परिजन उसे ले आ रहे थे. वो लाश को सड़क के किनारे ही छोड़कर चली गई. इधर मौत की वजह कोरोना न हो इसके लिए गांव और घर के लोग शव के नजदीक जाने से और उसे छूने से डरने लगे. सूचना पाकर स्वास्थ्य, पुलिस और राजस्व की टीम मौके पर पहुंची लेकिन उपयुक्त संसाधन मौजूद न रहने से सभी उस शव के परीक्षण नहीं कर पाए और बिना पोस्टमार्टम और कॅरोना टेस्ट के शव का अंतिम संस्कार के लिए कह दिया.

# नायब तहसीलदार ने कहा –

इस मामले में क्षेत्र के नायब तहसीलदार ने भी घटना की जानकारी दी है. उन्होंने कहा-

कल रात को पता चला की दमदम में एक व्यक्ति की मौत हो गयी है. पूरी घटना की जानकारी पर हमने CSC अधीक्षक से बात की. हम लोगों ने अपने लेखपाल को भी लगा रखा था, ये व्यक्ति 27 मई को मुम्बई से आया था. उसको दमे की बिमारी थी. जिला अस्पताल वाले उसको प्रयागराज रेफर कर दिए जब प्रयागराज पंहुचा तो इलाज हुआ. वहां वालों ने कहा की अब ये ठीक है, इनको जिला अस्पताल ले जाइए. जिला अस्पताल आते समय रास्ते में इनकी डेथ हो गई.

इस मामले में रामनरेश की पत्नी सुनीता ने बताया कि वो रामनरेश के साथ ही मुम्बई में रहती है, लेकिन रामनरेश से 7 दिन पहले ही आ गयी थी. मुम्बई में होटल में काम करके अपना गुजारा करता था. मुम्बई से घर आने के पहले बिल्कुल ठीक था.

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और ज़िला प्रशासन ने मरीज़ की सांस फूलने पर भी जांच कराना ज़रूरी क्यों नहीं समझा, ये सवाल सामने आ रहा है.


ये वीडियो भी देखें:

UP में कोरोना की वजह से जमानत मिली थी, जेल से बाहर आया तो लोगों ने जलाकर मार डाला

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