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महाराष्ट्रः मजदूरों के पास टिकट के पैसे नहीं थे, तो घर जाने वाली ट्रेन में बैठने नहीं दिया

लॉकडाउन में 4 मई से थोड़ी ढील मिली है. अपने घरों से दूर फंसे प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए श्रमिक ट्रेनें चलाई जा रही हैं. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने मजदूरों के घर पहुंचाने का ज़िम्मा उठाया है. महाराष्ट्र के भिवंडी से भी एक ट्रेन चली. गोरखपुर के लिए. इस ट्रेन से घर जाने के लिए पहुंचे करीब 100 मजदूरों को लौटा दिया गया. क्योंकि इनके पास टिकट खरीदने के पैसे नहीं थे.

द क्विंट में छपी रिपोर्ट मुताबिक़, इस ट्रेन की करीब 90 सीटें खाली रह गईं. दरअसल, लॉकडाउन की वजह से प्रवासी मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है. ऐसे में वो टिकट खरीद पाने की हालत में नहीं थे.

इस मामले को लेकर कांदिवली ईस्ट से बीजेपी विधायक अतुल भातकालकर ने कहा,

लॉकडाउन की वजह से फंसे मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुचाने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है. किसी के पास पैसे नहीं हैं, ऐसे में उसे जाने से वंचित रखना ठीक नहीं, सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी.

64 फीसद प्रवासी मजदूरों के पास 100 रुपये भी नहीं

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट मुताबिक़, लॉकडाउन में काम नहीं होने से प्रवासी मजदूरों के पास 100 रुपये से कम की पूंजी बची है. यह खबर ‘स्ट्रैंडेड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क (SWAN)’ की रिपोर्ट के हवाले से है. पिछले 32 दिनों में मदद को लेकर आए फोन कॉल के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई गई है. 16,863 लोगों से बातचीत करके इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है.

सिर्फ एर्नाकुलम में भारतीय रेलवे ने 32 लाख रुपये के टिकट बेचे

हाल में एर्नाकुलम से दो ट्रेनें ओडिशा और तीन ट्रेनें बिहार के लिए चली हैं. इन पांच ट्रेनों से कुल 5,592 प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाया गया है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट मुताबिक़, भारतीय रेलवे ने इन ट्रेनों के लिए 32 लाख 40 हज़ार 860 रुपये के टिकट बेचे हैं.


विडियो- कोरोना वायरस महामारी के दौरान पलायन करते मजदूरों की ताकतवर तस्वीरें

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