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सिब्बल और थरूर सहित कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी भेजी है, पर लिखा क्या है?

कांग्रेस के 23 सीनियर नेताओं ने कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखा है. इस लेटर में पार्टी में ऊपर से नीचे तक बड़े बदलाव करने और पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व की मांग की गई है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, ये लेटर 15 दिन पहले लिखा गया था. हालांकि खबर कांग्रेस वर्किंग कमिटी (सीडब्ल्यूसी) की मीटिंग से ठीक एक दिन पहले आई है. लेटर लिखने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य हैं.

लेटर में किन-किनके नाम हैं

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि पत्र पर राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, राज्य सभा सांसद आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर, विवेक तन्खा, मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद, रेणुका चौधरी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजेंदर कौर भट्टल, एम वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चव्हाण, पीजे कुरियन, अजय सिंह, मिलिंद देवड़ा, राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, अखिलेश प्रसाद सिंह, कुलदीप शर्मा, योगेंद्र शास्त्री और संदीप दीक्षित के साइन हैं.

कांग्रेस में काफी समय से नेतृत्व को लेकर शिकायत चल रही है. लेकिन अब सामूहिक रूप से बदलाव की मांग उठी है.
कांग्रेस में काफी समय से नेतृत्व को लेकर शिकायत चल रही है. लेकिन अब सामूहिक रूप से बदलाव की मांग उठी है.

क्या लिखा है लेटर में

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, पत्र में कांग्रेस नेताओं ने माना है कि बीजेपी काफी तेजी से ऊपर गई है. युवाओं के वोट निर्णायक रूप से नरेंद्र मोदी को मिले हैं. इससे युवाओं का पार्टी से भरोसा डिगा है और समर्थन में कमी आई है. ऐसे में पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व की जरूरत है जो सक्रिय रहने के साथ जमीन पर दिखाई भी दे. इसके लिए कांग्रेस वर्किंग कमिटी के चुनाव कराए जाएं. संस्थानिक नेतृत्व तंत्र बनाया जाए जो मिलकर पार्टी में जान फूंक सके.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पत्र में जोर दिया गया है कि कांग्रेस का पुनरुत्थान ‘एक राष्ट्रीय अनिवार्यता’ है, जो लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. पत्र में लिखा है कि देश आजादी के बाद से इस समय सबसे गंभीर राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. देश में डर और असुरक्षा है. बीजेपी और संघ परिवार का साम्प्रदायिक और बांटने का एजेंडा चल रहा है. ऐसे में पार्टी को तेजी से कदम बढ़ाने की जरूरत है.

Sonia Gandhi And Rahul Gandhi
सोनिया गांधी और राहुल गांधी. संसद के सामने CAA और NRC के विरोध में प्रदर्शन करते हुए. तस्वीर 31 जनवरी 2020 की है. क्रेडिट- PTI.

समस्याओं और सुझावों का भी जिक्र

पत्र में देश की कुछ समस्याओं का भी जिक्र किया गया है. जैसे- आर्थिक मंदी, बढ़ती बेरोजगारी, कोरोना महामारी के चलते आई मुसीबत, सीमा पर मौजूद चुनौतियां और अप्रभावी विदेश नीति.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पत्र में कांग्रेस में कुछ सुधारों के लिए सुझाव भी दिए गए हैं. इनमें पार्टी में बड़े बदलाव, सत्ता का विकेंद्रीकरण, राज्य इकाइयों को सशक्त करने, सभी स्तरों पर कांग्रेस संगठन में चुनाव और केंद्रीय संसदीय बोर्ड का तुरंत गठन जैसे सुझाव प्रमुख हैं. पत्र में विपक्ष को एकजुट करने और कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों को अपने साथ लाने का सुझाव भी दिया गया है.

कहा- कार्यकर्ता निराश तो पार्टी हुई कमजोर

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि नेताओं ने नेतृत्व में अनिश्चितता के चलते कार्यकर्ताओं में निराशा की बात लेटर में कही गई है. कहा गया है कि केंद्रीय वर्किंग कमिटी भी पार्टी को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने और बीजेपी सरकार के खिलाफ जनता को एकजुट करने में नाकाम रही है. कहा गया है कि सीडब्ल्यूसी की बैठकें राजनीतिक घटना की प्रतिक्रिया के रूप में ही हो रही है. संसदीय बोर्ड की बैठकें भी औपचारिक भाषणों तक सिमट गई है. वहां अब कोई चर्चा नहीं होती.

प्रियंका गांधी वाड्रा, राहुल गांधी और सोनिया गांधी.
प्रियंका गांधी वाड्रा, राहुल गांधी और सोनिया गांधी.

ढेर सारी शिकायतें भी कीं

पत्र में नेताओं ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 में हार के एक साल बाद भी पार्टी ने अभी तक ईमानदारी से आत्मविश्लेषण नहीं किया है. राज्य कांग्रेस इकाइयों में अध्यक्षों और पदाधिकारियों की नियुक्ति में बेवजह की देरी की गई. जिन नेताओं की अपने राज्य में पकड़, आदर और स्वीकार्यता है उन्हें समय पर जिम्मेदारी नहीं दी गई. साथ ही राज्य कांग्रेस अध्यक्षों को संगठन से जुड़े फैसलों में छूट भी नहीं दी गई. यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में चुनाव कराने से विवाद और गुटबाजी बढ़ी है. कई नेताओं ने शिकायत की है कि इन संगठनों में चुनाव से धनबल और राजनीतिक संरक्षण वाले नेताओं का राज्य इकाइयों पर कब्जा हो गया.

पत्र में कहा गया है कि नेहरू-गांधी परिवार हमेशा नेतृत्व का अभिन्न अंग रहेगा. पत्र में सोनिया गांधी के नेतृत्व की तारीफ की गई है. साथ ही राहुल गांधी के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है.

बीजेपी ने साधा निशाना

कांग्रेस नेताओं के पत्र पर बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा कि विडंबना यहां है कि कांग्रेस में आलाकमान ही निचला पायदान भी है.

वहीं कांग्रेस से सस्पेंड चल रहे नेता संजय झा ने इस खबर को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला पर हमला बोला. कहा,

और रणदीप सुरजेवाला ने मुझे बीजेपी की कठपुतली कहा था. उन्होंने पत्र के बारे में इनकार किया था.

बता दें कि संजय झा भी लगातार नेतृत्व बदलाव और कांग्रेस में सुधारों की मांग कर रहे थे.


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