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चीन के इस बैंक ने भारत को 5700 करोड़ रुपये का लोन दिया है

दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत कोरोना से जंग लड़ रहा है. भारत की मदद के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं आगे आई हैं. एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक- AIIB चीन समर्थित बैंक है. इसने 750 मिलियन डॉलर यानी करीब 5700 करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दी है, ताकि भारत कोरोना से जंग लड़ सके. लोन देने का उद्देश्य कमजोर तबके को सहायता देना है. साथ ही कारोबारियों को आर्थिक सहायता मुहैया कराना है. इस लोन का मकसद सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क को भी मजबूती देना और हेल्थकेयर में सुधार करना है.

मई में भी दिया था लोन

मई में AIIB ने कोरोना से निपटने के लिए भारत को 50 करोड़ डॉलर का लोन दिया था. यह लोन 10 अरब डॉलर के उस लोन का हिस्सा है, जिसकी घोषणा बैंक ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए की है.

AIIB के वाइस प्रेसिडेंट डीजे पांडियन ने कहा,

‘दुनिया के कई कम या मध्यम आय वर्ग के देश अब भी इस संकट से निपटने के शुरुआती चरण में हैं और वे इस महामारी का असर महसूस करने लगे हैं. इस मदद से यह सुनिश्चित होगा कि भारत ऐसी आर्थिक गतिविधियां चला सके, जिससे उत्पादक क्षमता को लॉन्ग टर्म नुकसान न हो पाए.

AIIB आमतौर पर इस तरह के लोन नहीं देता, लेकिन वह वर्ल्ड बैंक या एडीबी के साथ सह-वित्तपोषण में अपने सदस्य देशों की कोरोना से निपटने में मदद के लिए असाधारण कदम उठा रहा है.

2016 में बना था बैंक

न्यूज एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक, चीन की अगुवाई वाले एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट बैंक की शुरुआत जनवरी, 2016 में हुई थी. भारत इस बैंक में दूसरा बड़ा शेयरधारक है. बैंक में 26.06 प्रतिशत मतदान हिस्से के साथ चीन सबसे बड़ा शेयरधारक है. इसके बाद 7.5 प्रतिशत के साथ भारत दूसरा, 5.93 प्रतिशत के साथ रूस तीसरा, जबकि जर्मनी के पास 4.5 प्रतिशत मतदान का अधिकार है.

57 संस्थापक सदस्य

अमेरिका और जापान इस बैंक से बाहर हैं. इन दोनों देशों की वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और एडीबी जैसे बहुपक्षीय वित्तीय एजेंसियों में अहम भूमिका है. अमेरिका और जापान ने एआईआईबी के खुलने पर एतराज जताया था. AIIB ब्रिक्स देशों के नव विकास बैंक के साथ ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए फंडिंग की बेहतर सुविधाएं देता है. AIIB में 57 संस्थापक सदस्य हैं.


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