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पाकिस्तानी चीफ जस्टिस ने खदीजा सिद्दीकी के लिए जो किया, वो भारत के सभी जजों के लिए नज़ीर है

याद है अगस्त 2017 में हमने आपको एक पाकिस्तानी लड़की के बारे में बताया था, जिस पर चाकू से 23 वार किए गए थे! खदीजा सिद्दीकी. खदीजा लाहौर की रहने वाली हैं. 3 मई 2016 को जब वो अपनी छोटी बहन को स्कूल से लेने पहुंचीं, तो उनके साथ पढ़ने वाले शाह हुसैन ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ हमले किए. शाह लाहौर के नामी वकील सैयद तनवीर हाशमी का बेटा था, जिसकी वजह से पूरा सिस्टम खदीजा के खिलाफ खड़ा हो गया. उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए और उन पर हुए जानलेवा हमले को जस्टिफाई करने की कोशिश की गई. आखिरकार मीडिया और सोशल मीडिया की कवायदों के बूते खदीजा इंसाफ के नज़दीक पहुंचीं.

खदीजा सिद्दीकी
खदीजा सिद्दीकी

लेकिन जैसा हमने आपको पिछले आर्टिकल में बताया कि पाकिस्तान में भी इंसाफ की वही हालत है, जो हमारे मुल्क में है. 29 जुलाई 2017 को लाहौर की मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने हुसैन को 7 साल की जेल और 3.34 लाख रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई. हुसैन के पाले में खड़ी वकीलों की फौज ने हाईकोर्ट में अपील की और 4 जून 2018 को लाहौर हाईकोर्ट से हुसैन को बरी करा लाए.

अब खदीजा के पास एक ही रास्ता बचा था. सुप्रीम कोर्ट. और यहीं पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार ने दिल जीत लिया. 10 जून को इतवार के दिन जस्टिस निसार ने शाह हुसैन की रिहाई के खिलाफ खदीजा की अपील सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच को फॉरवर्ड कर दी. अब इस केस की सुनवाई जस्टिस आसिफ सईद खोसा करेंगे.

पाकिस्तान के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार
पाकिस्तान के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार

खदीजा के वकील सलमान सफदर ने बताया, ‘चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली दो जजों की एक बेंच ने हुसैन के बरी होने पर स्वत: संज्ञान लिया. ये फैसला लाहौर हाईकोर्ट ने सुनाया था, जिसके खिलाफ हमने पहले ही अपील दायर कर दी थी.’ यहां एक और बात जानने लायक है कि मार्च 2018 में एक ट्रायल कोर्ट ने हुसैन की सज़ा सात साल से घटाकर दो साल कर दी थी.

कौन हैं खदीजा सिद्दीकी

23 साल की खदीजा LLB की स्टूडेंट हैं और इस साल फाइनल इयर के एग्ज़ाम दे रही हैं. मई 2016 में हमले के बाद उनका तीन हफ्ते तक इलाज चला था. हमला करने वाली पार्टी में बाद में खदीजा के परिवार पर भी चुप बैठने और पीछे हटने का दबाव बनाया. अपने पुरुष दोस्तों के साथ खदीजा की तस्वीरें उनके घर भेजी गईं, जिनके साथ लिखा था, ‘ये तो बस शुरुआत है’. परिवार को छोड़ दें, तो खदीजा के आसपास के लोगों ने भी उन्हें ही दोषी ठहराया. कोर्ट में उनसे कहा गया, ‘तुम पॉश इलाके में रहती हो, कार चलाती हो, मॉर्डन हो… वगैरह’.

इलाज के दौरान खदीजा की तस्वीर
इलाज के दौरान खदीजा की तस्वीर

और हुसैन कौन है, जिसने हमला किया

वो भी खदीजा के साथ ही लॉ की पढ़ाई कर रहा था. खदीजा बताती हैं कि बहुत मैनिपुलेटिव होने की वजह से 2015 के आखिर में उन्होंने हुसैन से बात करना बंद कर दिया. वो इसी बात से नाराज़ था और बार-बार खदीजा से मिलने के लिए कह रहा था. इस बीच उसने खदीजा को खूब डराया-धमकाया भी. खदीजा बताती हैं कि उनकी बड़ी बहन की शादी के दौरान हुसैन ने फोन करके मिलने के लिए दबाव डाला. जब खदीजा ने मना किया, तो वो बहुत गुस्सा हुआ.

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खदीजा कहती हैं कि उन्होंने हुसैन से 10 महीने से बात नहीं की थी, ऐसे में उन्हें ऐसे किसी हमले की आशंका नहीं था. लेकिन, जब वो खून से सनी पड़ी थीं और उनकी आंखें भी नहीं खुल रही थीं, तब उन्हें पता था कि ये हमला किसी और ने नहीं, हुसैन ने ही किया है.

हुसैन के पिता ने उसे बचाने के लिए क्या नहीं किया

हुसैन के पिता सैयद तनवीर हाशमी शहर के बड़े वकील हैं. यही वजह थी कि खदीजा का साथ देने के बजाय पहुंच वाले लोग उसके खिलाफ खड़े हो गए. जहां खदीजा को एक वकील मिलना मुश्किल हो रहा था, वहीं हुसैन की खिदमत के लिए ये लोग खड़े थे-

# हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तीन भूतपूर्व प्रेसिडेंट
# पाकिस्तान बार काउंसिल के कई सदस्य
# लाहौर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के सदस्य
# कई रिटायर्ड जज
# एक्स डेप्युटी अटॉर्नी जनरल
# सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का करंट सेक्रेटरी

29 जुलाई 2017 को सात साल कैद की सज़ा सुनाए जाने के बाद शाह हुसैन (चश्मा लगाए)

लाहौर की समूची वकील बिरादरी हत्या की कोशिश करने वाले को बचाने के लिए बेशर्मी से खड़ी थी. इसके बाद इस केस को पूरे पाकिस्तान में ‘खदीजा बनाम बार असोसिएशन’ कहा जाने लगा.

तनवीर हाशमी लाहौर हाईकोर्ट बार असोसिएशन (LHCBA) से ताल्लुक रखते हैं. यही वजह थी कि जब सुप्रीम कोर्ट ने खदीजा केस में स्वत: संज्ञान लिया, तो LHCBA ने एक रेज़ॉल्यूशन पास किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के इस कदम की निंदा की गई. रेज़ॉल्यूशन के मुताबिक जब खदीजा के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा था, तो सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान नहीं लेना चाहिए था, जो कि सोशल मीडिया के दबाव से प्रेरित है.

खदीजा
खदीजा

चीफ जस्टिस साकिब निसार ने LHCBA के इस कदम पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, ‘आप सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ रेज़ॉल्यूशन कैसे पास कर सकते हैं? आप कोर्ट के खिलाफ कैंपेन कैसे चला सकते हैं. अगर ये हादसा किसी वकील की बेटी के साथ हुआ होता, तब भी आप यही करते?’

हुसैन को बरी करने वाले जज ने क्या कहा था

4 जून को हुसैन को बरी करते समय लाहौर हाईकोर्ट के जज सरदार अहमद नईम एक अजीबोगरीब बात कही, ‘आमतौर पर घायल गवाहों पर संदेह नहीं किया जाता है, लेकिन इस केस के हालात मुझे प्रॉसिक्यूशन पक्ष के घायल गवाह पर शक करने के लिए मजबूर कर रहे हैं.’

जस्टिस आसिफ सईद खोसा, जो अब खदीजा केस की सुनवाई करेंगे
जस्टिस आसिफ सईद खोसा, जो अब खदीजा केस की सुनवाई करेंगे

अब आगे क्या होगा

अब ये मामला जस्टिस खोसा के सामने होगा, जो अकेले इसकी सुनवाई करेंगे. सुनवाई के लिए वो अगले सप्ताह की कोई तारीख देंगे, जिसके बाद एक बार फिर वकीलों के दांव-पेच का सिलसिला शुरू होगा. खदीजा का कहना है कि चीफ जस्टिस ने उनके मामले में संज्ञान लिया है, तो उन्हें इंसाफ ज़रूर मिलेगा. हमारे मुल्क में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में जुडिशल सिस्टम का जो रवैया है, उसे ज़रूर पाकिस्तान के चीफ जस्टिस से सीखना चाहिए.


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