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छत्तीसगढ़: 48 घंटे के अंदर अलग-अलग क्वारंटीन सेंटर में तीन बच्चियों की मौत हो गई

छत्तीसगढ़. यहां 48 घंटे में अलग-अलग क्वारंटीन सेंटर में तीन बच्चियों की जान जा चुकी है. घर लौटे प्रवासी मज़दूरों की तीन बच्चियां. इंडियन एक्सप्रेस  ने अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि इनमें से दो बच्चियों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है.

एक बच्ची चार महीने की थी. उसकी मौत गुरुवार, 28 मई को हुई. पिछले कुछ दिनों से वो बीमार थी. उसकी कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट आनी बाकी है. बाकी दो की मौत 27 मई को हुई. इनमें से एक 18 महीने की थी और एक तीन महीने की. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि तीन महीने की बच्ची काफी कुपोषित थी. इन तीनों के प्रवासी मज़दूर माता-पिता राज्य लौटकर आए थे.

अधिकारी बता रहे हैं कि क्वारंटीन सेंटर में गर्मी और भीड़ की वजह से ऐसा हुआ. राज्य के हेल्थ मिनिस्टर हैं टीएस सिंहदेव. उन्होंने ‘कमियां’ पाए जाने पर उस कार्रवाई की बात कही है, जो काफी ‘कठोर’ होती है. ये भी जोड़ दिया कि बड़ी संख्या में प्रवासी लौट रहे हैं, इससे व्यवस्था पर बोझ भी बढ़ा है.

‘अस्पताल में किसी ने पूरे दिन बच्ची को नहीं देखा’

28 मई को चार महीने की बच्ची की मौत बालोद ज़िले में हुई. बच्ची के पिता का नाम युवराज निषाद है. वो 14 मई को महाराष्ट्र के चंद्रपुर से अपने गांव तेंगा लौटे थे. पत्नी, तीन साल के बेटे और चार महीने की बच्ची (जो अब नहीं है) के साथ.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, युवराज निषाद के बड़े भाई योगेश्वर निषाद ने कहा,

‘बच्ची की हालत ठीक नहीं थी. लोकल स्वास्थ्यकर्मी उसे देख रहे थे. 26 मई को उन्होंने बच्ची को अस्पताल ले जाने को कहा. परिवार 27 मई को अस्पताल गया लेकिन किसी ने पूरे दिन बच्ची को नहीं देखा. आज भाई ने बताया कि बच्ची मर गई.’

श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलने के बावजूद बहुत से मजदूर ट्रकों और साइकिलों से अपने घर अभी भी पहुंच रहे हैं. फोटो: PTI
श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलने के बावजूद बहुत से मजदूर ट्रकों और साइकिलों से अपने घर अभी भी पहुंच रहे हैं. फोटो: PTI

स्थानीय अधिकारी कहते हैं कि माता-पिता बच्ची के शव से अलग नहीं हो रहे थे. बाद में पुलिस ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए शव उन्हें लौटाया जाएगा. तब पीपीई किट्स के साथ स्वास्थ्यकर्मी शव को बाहर लेकर आए. बच्ची के पिता और भाई क्वारंटीन सेंटर के गेट पर खड़े ये ‘देख’ रहे थे. एक अधिकारी ने बताया कि परिवार ट्रक के जरिए महाराष्ट्र से आया था. 25 मई को बच्ची का सैंपल कोरोना टेस्ट के लिए भेजा गया. अभी रिपोर्ट नहीं आई है.

दूसरी बच्ची भोपाल से आई थी

18 महीने की दूसरी बच्ची परिवार के साथ भोपाल से लौटी थी. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था. प्रशासन ने कहा कि उसकी मौत तब हुई, जब खाना खिलाते समय उसके गले में खाना फंस गया. कथित तौर पर उसे ऑक्सीजन की कमी हो गई.

तीसरी बच्ची कुपोषित थी

वहीं, तीसरी बच्ची, जो कि तीन महीने की थी, उसकी मौत कबीरधाम ज़िले के क्वारंटीन सेंटर में हुई. अधिकारियों ने कहा कि परिवार 11 मई को नागपुर से लौटा था. रिपोर्ट के मुताबिक, वो बुरी तरह कुपोषित थी और उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. दूध पिलाते वक्त ऑक्सीजन की कमी से उसकी मौत हो गई.

ये तीनों बच्चियां महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ पहुंची थीं. परिवारों को बाकी लोगों के साथ क्वारंटीन किया गया था. सांकेतिक फोटो: PTI
ये तीनों बच्चियां महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ पहुंची थीं. परिवारों को बाकी लोगों के साथ क्वारंटीन किया गया था. सांकेतिक फोटो: PTI

स्वास्थ्य मंत्री क्या कह रहे हैं?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा,

मज़दूरों के आने को और रेगुलेट किया जाना चाहिए था. व्यवस्था की भी सीमाएं हैं. अब तक बहुत सारी टेस्टिंग होनी बाकी हैं क्योंकि पर्याप्त लैब नहीं हैं. हम नई लैब बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसमें हफ्तों लगेंगे. हम क्वारंटीन सेंटर में लोगों को हर सुविधा देने की कोशिश कर रहे हैं. मौसम को देखते हुए पानी और ओआरएस के घोल भी देने चाहिए.

गर्मी ने बढ़ाई दिक्कतें

रिपोर्ट के मुताबिक, 14 मई से राज्य में 10 मौतें क्वारंटीन सेंटर में हो चुकी हैं. अलग-अलग वजहों से. हर गांव में सरकारी बिल्डिंग को क्वारंटीन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और इनमें भीड़ बहुत है. गर्मी भी बढ़ गई है, जिससे समस्याएं भी बढ़ी हैं.

देखिए, कोरोना के कहां कितने मामले:


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