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कोरोना से हो रही मौतों पर 4-4 लाख मुआवजा देने की बात पर सरकार ने क्या कहा है?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सरकार देश में सभी कोविड-19 मौतों पर 4-4 लाख रुपये मुआवजा नहीं दे सकती क्योंकि इससे आपदा कोष पर भारी दबाव आ जाएगा. ये बात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर कही. याचिका में मांग की गई है कि कोविड-19 मौतों पर सरकार की तरफ से एक न्यूनतम सहायता राशि दी जाए. इसी याचिका पर सरकार ने अपना जवाब दर्ज कराया. कोर्ट में गृह मंत्रालय की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने 189 पेज में जवाब दाखिल किया.

सरकार ने कहा –

“मुआवजा या सहायता राशि केवल प्राकृतिक आपदाओं में ही दिया जाता है. जैसे कि भूकंप, बाढ़ आदि. कोविड-19 न तो इस तरह की आपदाओं की श्रेणी में आता है न ही ये कोई वन टाइम डिज़ास्टर है. ये एक महामारी है, जो अभी चल रही है और आगे भी कई अलग-अलग वेव्स में आकर हमला कर सकती है. ये कोई छोटे या तय समय की आपदा नहीं है. अब तक करीब 3.85 लाख लोगों की इससे मौत हो चुकी है और चूंकि अभी महामारी ख़त्म नहीं हुई है इसलिए ये आंकड़ा बढ़ेगा भी. और फिर प्रभावित होने वालो में सभी श्रेणियों के लोग हैं- अमीर और ग़रीब, प्रोफेशनल और अनप्रोफेशनल, श्रमिक और अन्य वर्ग भी.”

सरकार ने मुआवजे की मांग पर कहा कि अगर सभी कोविड मौतों पर सरकार की तरफ से मुआवजा दिया गया तो आपदा प्रबंधन कोष पूरी तरह खाली होने का अंदेशा रहेगा. बल्कि इस पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ सकता है. ऐसे में केंद्र और राज्यों के पास कोविड प्रबंधन के लिए संसाधन जुटाने के लिए भी पैसे का अभाव हो जाएगा और फिर इस कोष में पर्याप्त धन नहीं रहा तो भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप वगैरह का सामना कैसे किया जाएगा.

सरकार ने बताया कि कोविड केसेज़ में इंश्योरेंस क्लेम ज़रूर लगातार लोगों को दिए जा रहे हैं. बताया कि 2019-20 में सरकारी ने करीब 442.4 करोड़ रुपये इंश्योरेंस कंपनीज़ के लिए रिलीज़ किए. साथ ही नेशनल हेल्थ मिशन के तहत करीब 1113.21 करोड़ रुपये राज्यों को कोविड प्रबंधन के लिए दिए गए हैं.

6-8 हफ्ते में तीसरी वेव

कोविड-19 के ज़िक्र के बीच बताते चलें कि AIIMS निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चेतावनी दी है. तीसरी लहर के अगले 6 से 8 हफ्ते में दस्तक देने की बात कही है. उन्होंने 19 जून को कहा कि –

“अगर कोरोना से जुड़ी गाइडलाइन को फॉलो नहीं किया गया तो तीसरी लहर 6-8 हफ्तों में आ सकती है. जरूरत है कि वैक्सीनेशन होने तक हम आक्रामक तरीके से कोरोना के खिलाफ जंग जारी रखें. अगर लोगों ने मास्क और सोशल डिस्टेन्सिंग जैसी जरूरी गाइडलाइन को फॉलो नहीं किया तो मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं. कोरोना के केस बढ़ने पर सर्विलांस और जिस क्षेत्र में केस बढ़ते हैं उसकी पहचान कर वहां लॉकडाउन लगाने की भी जरूरत पड़ सकती है.”


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