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मोदी ने CM रहते जो सिफारिशें कीं, 9 साल बाद सीतारमण ने उन्हें लागू किया

केंद्र सरकार कोरोना वायरस के चलते आर्थिक पैकेज से जुड़े ऐलान कर रही है. 15 मई को किसानों की मदद को लेकर घोषणाएं की गईं. इनमें से एक आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में बदलाव को लेकर थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आलू, प्याज, दालों और तिलहन जैसे उत्पादों को नियंत्रणमुक्त करने का फैसला किया गया है. यानी मार्केट में इनके भावों को लेकर सरकार दखल नहीं देगी. इसके लिए जल्द ही आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया जाएगा.

सीतारमण ने क्या कहा

सीतारमण ने कहा कि जब यह कानून लाया गया तब देश में इस तरह के उत्पादों की कमी थी. लेकिन अब ऐसी पाबंदियों की जरूरत नहीं है. सरकार कृषि मंडी से जुड़े सुधार भी लाएगी. इनसे किसान अपने उत्पाद आकर्षक मूल्य पर दूसरे राज्यों में भी बेच सकेंगे. अभी किसान सिर्फ लाइसेंसी को ही बेच सकता है. अगर किसान के पास किसी को भी बेच सकने का विकल्प होगा, तो उसे मनचाही कीमत मिलेगी.

सरकार की ओर से उठाए गए इन कदमों की सिफारिश काफी समय पहले हुई थी. लेकिन ये अब तक ठंडे बस्ते में पड़े थे. दिलचस्प बात है कि नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री रहते इस तरह की सिफारिशें की गई थी.

मनमोहन सिंह ने बनाई थी कमिटी

CNBCTV18 की खबर के अनुसार, मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्रियों की एक कमिटी ने यह सिफारिशें की थीं. तत्कालीन प्रधानमंत्री महमोहन सिंह ने यह कमिटी बनाई थी. उन्होंने पांच राज्यों के सीएम को शामिल कर उपभोक्ता मामलों के लिए कमिटी बनाई थी.

महंगाई कम करने के लिए उपाय सुझाने का जिम्मा इस कमिटी को दिया गया था. बता दें कि उस समय देश महंगाई की मार से जूझ रहा था. मुख्यमंत्रियों के पैनल ने साल 2011 में अपनी रिपोर्ट दे दी थी. इन्हीं में से कुछ सुझावों को अब सरकार ने अपनी घोषणाओं में जगह दी है.

कमिटी की कुछ मुख्य सिफारिशें इस प्रकार थीं

– खेत से ग्राहक तक की वितरण प्रणाली क्षमता को ठीक करने के लिए कृषि मंडियों का उदारीकरण. यानी फसल या खेती के उत्पाद बेचने के लिए किसानों के पास आजादी हो.
– कृषि मंडियों में संगठित क्षेत्र या कॉपरेटिव की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए.
– उत्पादों को खराब होने से बचाने के लिए प्रोसेसिंग, स्टोरेज और कोल्ड चैन को बढ़ाया जाए. खेती के उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सुविधाओं को बढ़ाना
– किसानों के लिए सक्रियता से मौद्रिक नीति बनाई जाए. यानी किसानों के हाथ में पैसा पहुंचाने पर काम हो.
– वायदा मार्केट पर अस्थायी तौर पर प्रतिबंध लगाना.

हालांकि उस समय इस रिपोर्ट पर कुछ खास काम नहीं हुआ था. बाद में 2014 में एनडीए सरकार बन गई. इसमें महंगाई कम हो गई तो इन सिफारिशों को लागू ही नहीं किया गया.


Video: आर्थिक पैकेज: तीसरे दिन किसानों के लिए मोदी सरकार ने किए 11 फैसले

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