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'मैं दिखने में अलग थी, मेरी आवाज अलग थी इसलिए मुझे एग्जाम में सेलेक्ट नहीं किया गया'

‘कुछ साल पहले मैं तमिलनाडु यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड के एग्जाम में पास हो गई थी. लेकिन उस समय ‘हाइट कम है’ मुझे बोलकर डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था. लेकिन बाद में मुझे पता चला कि मेरी लुक और आवाज की वजह से मुझे सेलेक्ट नहीं किया गया. ये बहुत बुरा था. मैं कभी दोबारा एग्जाम नहीं देना चाहती थी. लेकिन कन्नगी नगर की पुलिस ने मुझे दोबारा फॉर्म भरने को कहा और ये भी कहा कि मैं सही कैंडिडेट हूं’.

ये कहानी 24 साल की दुर्गाश्री की है, जो कि एक ट्रांसजेंडर हैं. दुर्गाश्री ने फिर से तमिलनाडु यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड का एग्जाम दिया है. और उम्मीद करती हैं कि इस बार वो सेलेक्ट हो जाएंगी.  दुर्गाश्री अगर इस एग्जाम में सेलेक्ट होती हैं, तो पृथिका यशिनी के बाद देश की दूसरी ट्रांसजेंडर पुलिस ऑफिसर होंगी.

पृथिका यशिनी को अपना आदर्श मानने वाली दुर्गाश्री दोबारा एग्जाम देने का पूरा श्रेय कन्नगी नगर पुलिस को देती हैं. जिन्होंने इनको हमेशा ही मोटिवेट किया. इंस्पेक्टर विवेकानंदन, अधिकारी पनीर और कन्नगी पुलिस क्लब कोऑर्डिनेटर थमिज ने मिलकर दुर्गाश्री को ट्रेन किया है.

दुर्गाश्री एक एनजीओ के लिए काम करती हैं, जो ट्रांसजेंडरों की पढ़ाई-लिखाई में हेल्प करता है. 5 साल पहले इन्होंने अपना घर छोड़ दिया था क्योंकि दुर्गाश्री को ट्रांसडेंजर के रूप में अपनाना परिवारवालों के लिए बहुत मुश्किल था. इसके बावजूद ये अपने परिवारवालों से बहुत प्यार करती हैं.

दुर्गा कहती हैं: ‘मैं उनसे मिलने जाती हूं तो मर्दों के कपड़े पहन लेती हूं. मुझे पता है कि मैं सेलेक्ट हो गई तो मुझे ट्रेनिंग करने के लिए कहीं और जाना होगा लेकिन ये जगह मेरे लिए हमेशा स्पेशल होगी. पुलिस में भर्ती होकर अपने पिता का सपना पूरा करना चाहती हूं.’

पृथिका यशिनी कौन हैं:

26 साल की पृथिका यशिनी भारत की पहली ट्रांसजेंडर सब इंसपेक्टर हैं. और इस बात के लिए इनका नाम इतिहास में दर्ज हो चुका है. 2 अप्रैल को पृथिका ने तमिलनाडु के धरमपुरी जिले का चार्ज संभाला. इनका अगला टारगेट आईपीएस ऑफिसर बनना है. ड्यूटी के बाद खाली समय में वह एग्जाम की तैयारी करती हैं.

पृथिका यशिनी
पृथिका यशिनी

जिस तरह की दिक्कतों का सामना अभी दुर्गाश्री कर रही हैं, वही सब कुछ पृथिका ने भी झेला था. इस मुकाम को हासिल करने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है. तमिलनाडु यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज रिक्रूटमेंट बोर्ड एग्जाम, जिसको पास करके यशिनी यहां पहुंची हैं, इसी बोर्ड ने यशिनी को एग्जाम में बैठने नहीं दिया था. बोर्ड वाले तरह-तरह के बहाने बना रहे थे. जैसे कि यशिनी के सर्टिफिकेट मैच नहीं कर रहे थे वगैरह वगैरह. कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें बोर्ड ने लिखित परीक्षा देने दी. जब बारी फील्ड टेस्ट की आई. तो सिर्फ 1.1 सेकंड देरी की वजह से उन्हें डिस्क्वॉलीफाई कर दिया गया. यशिनी दोबारा कोर्ट पहुंचीं. कोर्ट ने उन्हें पूरा समर्थन दिया. और फैसला उनके हक में सुनाया.

ज्वॉइनिंग के वक्त हुई परेड के बाद यशिनी ने कहा था,

‘मुझे अपनी ट्रेनिंग खत्म करके बहुत अच्छा लग रहा है.वहां पर सब मेरी मदद करते थे. माहौल भी काफी अंडरस्टैंडिंग था.’


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