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ठीक होने के बाद दोबारा कोरोना इंफेक्शन हो सकता है, अब क्या पता चला है?

जब किसी इंसान को एक बार कोविड-19 हो गया. वो इससे रिकवर हो गया. तो क्या उसके शरीर में हमेशा के लिए एंटीबॉडी बन जाती है? अब उसे कभी कोविड इंफेक्शन नहीं होगा? कोरोना की वैक्सीन की तरह ही इस सवाल का जवाब भी अभी खोजा ही जा रहा है.

अभी कुछ दिन पहले ही हॉन्ग कॉन्ग में एक केस सामने आया था. 33 साल के व्यक्ति में दोबारा इंफेक्शन का केस. वो व्यक्ति मार्च में कोविड इंफेक्टेड होकर ठीक भी हो चुका था. लेकिन अब फिर उसके कोविड इंफेक्टेड होने की बात सामने आई. इस केस के आने के बाद लोगों में ये डर भी पनप गया कि एक बार इंफेक्टेड होकर रिकवर हो गए, फिर भी वो महफूज़ नहीं हैं.

लेकिन अब वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का इस बारे में कहना है कि इस व्यक्ति की जेनेटिक सिक्वेंसिंग की गई है. इससे पता चला है कि उसे जो दो बार इंफेक्शन हुए हैं, वो अलग-अलग वायरस से हुए हैं.

क्लीनिकल इंफेक्शस डिसीज़ नाम का एक मेडिकल जर्नल है. इसमें मेडिकल से जुड़े अध्ययन प्रकाशित होते हैं और ये अध्ययन ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की निगरानी में होते हैं. क्लीनिकल इंफेक्शस डिसीज़ ने हॉन्ग कॉन्ग के इंफेक्टेड व्यक्ति पर अध्ययन किया. इसके मुताबिक –

“हमारी स्टडी में पाया गया है कि इस व्यक्ति के पहले और दूसरे इंफेक्शन के बीच 142 दिन का अंतर था. लेकिन ये दोनों इंफेक्शन अलग-अलग किस्म के वायरस से थे.”

एंटीबॉडीज़ बनती हैं, लेकिन कब तक? 

स्टडी में ये भी कहा गया है कि ये तो सच है कि वायरस से रिकवर होने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं. लेकिन अभी ये कन्फर्म नहीं हो पाया है कि कोविड से रिकवर होने के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी कब तक शरीर में रहती हैं. एक महीने, दो महीने, या उससे भी ज़्यादा?

इस बीच यूएस सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी कुछ अहम बातें बताई हैं, जो हमें-आपको जाननी चाहिए –

# घबराएं नहीं. सामान्य तौर पर कोविड इंफेक्शन औसतन 10 दिन में ठीक हो जा रहा है. गंभीर केसेज़ में रिकवरी टाइम औसतन 20 दिन का है.

# वायरस को आए आठ महीने से ज़्यादा समय हो गया है. अभी भी सबसे कारगर बचाव तीन ही हैं- मास्क, डिस्टेंसिंग और हैंड हाइजीन.

# मान लीजिए कोई इंसान कोविड से रिकवर हो गया. उसका टेस्ट भी नेगेटिव आ गया. फिर भी ये मुमकिन है कि उनके शरीर में कुछ वायरस रह गए हों. ऐसे में रिकवर हुए व्यक्ति का अगर दो-तीन महीने में दोबारा टेस्ट करा दिया जाए तो संभव है कि टेस्ट फिर पॉज़िटिव आ जाए.

# लेकिन ये बचे हुए वायरस अधिकतर केसेज़ में रिएक्टिव नहीं होते और अब इनसे संक्रमण फैलने का ख़तरा भी नहीं होता.

डॉक्टर्स ये भी देख रहे हैं कि क्या ऐसा भी मुमकिन है कि कोई इंसान दो बार कोविड इंफेक्टेड हो, जिसमें से एक बार सिंप्टोमेटिक (लक्षण दिखें) हो और दोबारा एसिंप्टोमेटिक (बिना लक्षण).


कोरोना वायरस से असली संकट अब आएगा?

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