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रेमडेसिविर या किसी दूसरी दवा के लिए बेसिर-पैर के दाम जमा करने के पहले ये ख़बर पढ़ लीजिए

देशभर में कोरोना विस्फोट की स्थिति है. रोजाना 3 लाख से अधिक नए केस सामने आ रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अभी पीक की स्थिति आना बाकी है. यानी केस और बढ़ सकते हैं. इस बीच जो लोग कोरोना की वजह से गंभीर रूप से बीमार हैं, उनको भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कहीं अस्पतालों में बेड्स की समस्या है तो कहीं एंबुलेंस की, कहीं ऑक्सीजन की समस्या है तो कहीं दवाईयों की. ये वो दौर है जब 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश के श्मशानों और कब्रिस्तानों में लाशों की लाइनें लगी हैं, लेकिन महामारी के इस दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो पैसे कमाने के लिए, किसी की जान से खेलने तक में संकोच नहीं कर रहे हैं. किसी की जान खतरे में है, वो पूरी हिम्मत बटोर कर मौत से लड़ रहा है. उसका परिवार जैसे-तैसे करके पैसों का जुगाड़ करता है. तीमारदार से अस्पताल कहता है कि रेमडेसिविर (Remdesivir) का इंतजाम कर लो.

मेहनत से कमाए गए पैसे से या फिर उधार मांगे गए पैसे से परिवार के लोग इंजेक्शन खरीदने निकलते हैं, लेकिन बाजार में उन्हें मिलता है धोखा. जी हां, कहीं इंजेक्शन बहुत अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, तो कहीं पैसे लेकर पानी भरी शीशी थमा दी जा रही है और कहीं तो ठग, पैसे लेने के बाद कुछ भी नहीं दे रहे.

Pune
पुणे में रेमडेसिविर के लिए परेशान लोगों की भीड़. फोटो- PTI

सबसे पहले बात मुनाफाखोरी की

– रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की जमाखोरी और मुनाफाखोरी की खबरें देशभर से सामने आ रही हैं.

– 25 अप्रैल को मध्यप्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया, जो 1 रेमडेसिविर को 30 हजार रुपये में बेच रहे थे. इनके पास से 5 इंजेक्शन बरामद हुए. पुलिस ने बताया कि ये लोग ऐसे 25 से 30 इंजेक्शन बेच चुके थे.

– 25 अप्रैल को ही छत्तीसगढ़ के रायपुर में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया, जो एक रेमडेसिविर को 25 हजार में बेच रहे थे. इनके पास से पुलिस ने 7 इंजेक्शन और 1 लाख 38 हजार रुपये भी जब्त किए.

– इसी तारीख को महाराष्ट्र के पुणे में भी पुलिस ने ऐसे 3 लोगों को गिरफ्तार किया जो रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहे थे. इन लोगों के पास से 6 इंजेक्शन बरामद हुए. 32 हजार से लेकर 45 हजार तक में ये लोग एक इंजेक्शन बेच रहे थे.

ये तो कुछ मामले हैं और वो भी ऐसे जिनमें आरोपी पकड़े गए हैं. देश भर से ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं. वहीं ऐसे मामले भी हैं जिनमें पैसे लेने के बाद भी पीड़ित को नकली इंजेक्शन थमा दिए गए, या पैसे लेने के बाद भी ऑक्सीजन का आधा भरा सिलेंडर ही थमा दिया गया.

– इंदौर के रहने वाले गणेशराव थोरात ने पुलिस को बताया कि उसने 2 इंजेक्शन 20-20 हजार में खरीदे थे. लेकिन जब डॉक्टर ने इन इंजेक्शनों को देखा तो बताया कि ये नकली हैं. इनमें दवा नहीं बल्कि पानी भरा हुआ है. 40 हजार खर्च करने के बाद हाथ में आए इन नकली इंजेक्शनों की शिकायत गणेश ने पुलिस में की. पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया. जांच जारी है.

– ग्वालियर में भी पुलिस ने नकली इंजेक्शन बेचने वाले 3 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से पुलिस को 2 इंजेक्शन बरामद हुए हैं. एक कोरोना पीड़ित के परिवार को ठग रहे ये लोग, डॉक्टर की सक्रियता के कारण पकड़े गए. पुलिस पूछताछ कर रही है कि कितने और लोगों को इन्होंने चूना लगाया था.

– 22 अप्रैल को तो महाराष्ट्र के बारामती में नकली इंजेक्शन के कारण एक शख्स की जान चली गई. 35 हजार का इंजेक्शन पीड़ित परिवार को दिया गया था और वो भी नकली. पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. जांच जारी है कि और कहां-कहां इस गिरोह ने नकली इंजेक्शन बेचे हैं.

Noida
नोएडा में पिता के लिए रेमडेसिविर नहीं मिल पाने पर रोता युवक. फोटो-आजतक

ठगी भी हो रही पीड़ितों के साथ

रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन बहुत ऊंचे दामों में बेचे जा रहे हैं, नकली इंजेक्शन के जरिए पीड़ित को चूना लगाया जा रहा है, और अब आपको बताते हैं ठगी का वो तीसरा तरीका जिसे ठगी का ‘जामताड़ा’ स्टाइल भी माना जा सकता है. अभी तक आपने सुना, देखा और पढ़ा होगा कि कभी लॉटरी और कभी KYC के नाम पर लोगों से फोन पर उनके खाते से जुड़ी जानकारियां पूछकर ठगा गया. अब रेमडेसिविर के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है. जरूरतमंद शख्स जब इन फर्जी दवाईवालों से संपर्क करता है, तो ये उसे भरोसा देते हैं कि आप पैसे ट्रांसफर करो दवाई मिल जाएगी, लेकिन पैसे देने के बाद भी पीड़ित के हाथ कुछ नहीं आता और तब उसे अहसास होता है कि उसे ठग लिया गया है.

– हरियाणा के हिसार में रहने वाले परविंदर सिंह ने ‘दी लल्लनटॉप’ को बताया कि उनके एक दोस्त के भाई को कोविड हुआ. रेमडेसिविर की जरूरत पड़ी. उन्हें ऐसे में किसी ने एक नंबर दिया. इस पर परविंदर से संपर्क किया और 6 इंजेक्शन मांगे. दूसरी तरफ बैठे शख्स ने 3 हजार रुपये प्रति इंजेक्शन की दर से 18 हजार की मांग की. परविंदर ने 18 हजार रुपये भी उसके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए. लेकिन इसके बाद ना तो कभी उस शख्स ने फोन उठाया और ना ही कभी किसी मैसेज का रिप्लाई किया.

Remdecivir
पैसे भी गए, इंजेक्शन भी नहीं मिला.

– लखनऊ की प्रगति श्रीवास्तव ने ‘दी लल्लनटॉप’ को बताया कि उनकी सहेली की माताजी बीमार थीं, हालत खराब थी. अस्पताल में बेड चाहिए था. 18 अप्रैल को उन्होंने गोमती नगर इलाके के एक अस्पताल में उन्हें भर्ती कराना चाहा. अस्पताल का नंबर इंटरनेट से मिला. फोन किया तो दूसरी ओर बैठे शख्स ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कहा. फॉर्म भरते वक्त UPI डिटेल्स भी ले ली. फॉर्म कन्फरमेशन के लिए लिंक भेजा, लेकिन इस पर क्लिक करते ही प्रगति के बैंक खाते से 2600 रुपये कट गए. इसके बाद उस नंबर पर संपर्क नहीं हो सका.

– लखनऊ की ही इज्या तिवारी से साथ भी यही घटना हुई. उनसे साढे 7 हजार रुपये कोविड बेड के नाम पर ठग लिए गए. हालांकि अच्छी बात ये रही कि उन्होंने बैंक में कंप्लेन दर्ज कराई जिसके बाद बैंक ने कार्रवाई करते हुए उनके पैसे वापस कराए.

– दिल्ली की रहने वाली छवि मित्तल ने बताया कि उन्हें एक इंजेक्शन Tocilizumab की जरूरत थी. उन्हें किसी ने एक नंबर दिया. बात 40 हजार में तय हुई. 20 हजार एडवांस ले लिए गए. इसके बाद दूसरी ओर बैठे शख्स ने 10 हजार और मांगे तो छवि को शक हुआ. उन्होंने ऑफिस का पता पूछकर ड्राईवर को मौके पर भेज दिया. लेकिन कोई ऑफिस होता तो मिलता. छवि की समझ आ गया कि उनके साथ ठगी हुई है. उन्होंने पैसे वापस मांगे लेकिन ठग ने अपना फोन बंद कर लिया.

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20 हजार देकर भी छवि को कुछ नहीं मिला.

सावधान रहें, सुरक्षित रहें

लल्लनटॉप को और भी बहुत से लोगों ने अपने साथ हुए फ्रॉड के बारे में बताया. सबका जिक्र करना यहां संभव नहीं. लेकिन आपको यही बताना चाहते हैं कि चाहे जितनी इमरजेंसी हो, सावधानी बरतें. केवल सरकारी जानकारी पर ही भरोसा करें. सरकार की ओर से लगातार ट्विटर आदि सोशल मीडिया पर हेल्पलाइन नंबर दिए जा रहे हैं. राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर जानकारी जनता तक पहुंचा रही हैं. जिलों में जिलाधिकारी भी ऐसे नंबर जारी कर रहे हैं. सिर्फ वैरीफाईड जानकारी पर भरोसा करें. गूगल पर मिली हर जानकारी सही नहीं होती.

ये सावधानी इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ऐसे मुश्किल दौर में भी कुछ ऐसे लोग हैं जो आपदा में अवसर की तलाश में लगे हैं, लेकिन गलत रास्ते पर चलते हुए.  इस कोरोना के दौर में कुछ लोग ऐसे हैं जो गिद्ध बन चुके हैं. वो महंगी दवा देते हैं, नकली दवा देते हैं, या बिना दवा दिए पैसे ऐंठना चाहते हैं और कहीं तो किसी की मौत के बाद भी उसे कभी श्मशान में लकडी के नाम पर ठगा जा रहा है तो कभी पर्ची और टोकन के नाम पर.


 

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