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UP चुनाव से पहले BJP ने एके शर्मा को बनाया प्रदेश उपाध्यक्ष

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि पार्टियां अभी से कमर कस चुकी हैं. 19 जून को भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश पदाधिकारियों और अलग-अलग मोर्चे के अध्यक्षों की सूची जारी की.

इसमें सबसे बड़ा नाम MLC एके शर्मा का है, जिन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी गई है. वहीं दो नेताओं को प्रदेश मंत्री का पद दिया गया है. ये नाम हैं- अर्चना मिश्रा और अमित वाल्मीकि. भाजपा के 7 मोर्चों के अध्यक्षों के नाम भी आ गए हैं. प्रांशुदत्त द्विवेदी को युवा मोर्चा, गीता शाक्य को महिला मोर्चा, कामेश्वर सिंह को किसान मोर्चा, नरेंद्र कश्यप को पिछड़ा वर्ग मोर्चा, कौशल किशोर को अनुसूचित जाति मोर्चा, संजय गोण्ड को अनुसूचित जनजाति मोर्चा और बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है.

भाजपा की इस नई टीम पर कांग्रेस की तरफ से भी फौरन रिएक्शन आया. प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा –

“प्रधानमंत्री कार्यालय जैसा शक्तिशाली कार्यालय छोड़कर क्या एके शर्मा जी उपाध्यक्ष बनने लखनऊ आए थे? क्या प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रधानमंत्री कार्यालय से बड़ा है? यह नियुक्ति कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी में जो सत्ता संघर्ष चल रहा है, इसको दर्शा रही है. योगी और मोदी के बीच जो संघर्ष की परिणीति है, ये वही है. कहीं ना कहीं योगी जी, मोदी जी की कैबिनेट से जीतते हुए दिखाई दे रहे हैं. आप लोग सत्ता संघर्ष करें लेकिन नियुक्ति के लिए नहीं, जनता के हितों के लिए. 6 महीने चुनाव के हैं, जनता आपको जवाब देगी.”

कौन हैं एके शर्मा, जिन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी गई है. और जिनको लेकर विपक्ष कह रहा है कि इनकी नियुक्ति तो योगी-मोदी का टसल दिखाती है.

नरेंद्र मोदी के गुजरात के साथी हैं शर्मा

अरविंद शर्मा 1988 बैच के गुजरात काडर के IAS अधिकारी हैं, लेकिन रहने वाले हैं यूपी के मऊ के. कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी ने अरविंद शर्मा को अपनी आंख के तारे की तरह रखा. जहां-जहां गए, अरविंद शर्मा को भी साथ ले गए. अपने गुजरात के कार्यकाल के दौरान अरविंद शर्मा ने दो चार गेम चेंजर क़िस्म के काम किए. एक तो टाटा के नैनो प्लांट के लिए रास्ता साफ़ करना. दूसरा काम है साल 2001 में भुज में आए भूकंप में राहत कार्य. फिर आया साल और तीसरा गेम चेंजर काम. वाइब्रेंट गुजरात. साल 2003 में शुरू हुआ ये गुजरात सरकार का ऐसा जलसा है, जिसकी मदद से गुजरात सरकार निवेशकों को लुभाती है. अरविंद शर्मा ने वाइब्रेंट गुजरात के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई. अरविंद शर्मा वाइब्रेंट गुजरात के प्रमुख योजनाकार रहे.

2002 में हुए गुजरात दंगों की वजह से नरेंद्र मोदी और अमरीका के संबंध बहुत दिन तक खटाई में थे. मोदी बहुत समय तक अमरीका नहीं जा सके थे. वीज़ा पर रोक थी. लेकिन जानकार बताते हैं कि अरविंद शर्मा ही वो व्यक्ति थे, जो साल 2014 में अमरीकी ऐम्बैसडर नैन्सी पावल गांधीनगर लेकर आए थे. और धीरे-धीरे नरेंद्र मोदी और अमरीका के रिश्तों के बीच जमी बर्फ़ पिघलने लगी.

VRS के 2 दिन बाद भाजपा में

मोदी जब पीएम बने तो अरविंद शर्मा को दिल्ली ले आए. प्रधानमंत्री कार्यालय में अरविंद शर्मा ने 3 जून को ज्वाइंट सेक्रेटरी का कार्यभार सम्हाला. फिर 22 जुलाई 2017 को एडिशनल सचिव बना दिए गए. 30 अप्रैल 2020 को अरविंद कुमार शर्मा को माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज़ (MSME) मंत्रालय में सचिव बना दिया गया. और आख़िर में उन्होंने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर बीजेपी ज्वाइन कर ली.

अरविंद कुमार शर्मा ने 12 जनवरी 2021 को अपने रिटायरमेंट से दो साल पहले ही VRS ले लिया. 2 दिन बाद ही भाजपा जॉइन कर ली और जल्द ही MLC भी बन गए. जब एके शर्मा को पार्टी जॉइन कराके UP भेजा गया, तभी से ये हवा गरम थी कि नरेंद्र मोदी UP में चले रहे सियासी समीकरणों से खुश नहीं हैं और इसी को ‘मैनेज’ करने के लिए एके शर्मा को भेजा गया है. तब ये कहा जा रहा था कि इन्हें डिप्टी CM जैसी ज़िम्मेदारी भी दी जा सकती है. लेकिन अब जब एके शर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है तो इसी बात पर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि इतने बड़े अधिकारी को लेकर उपाध्यक्ष बना दिया माने कुछ गड़बड़ है.


पंचायत चुनाव में वो काम हो गया है कि भाजपा चक्कर में पड़ जाएगी!

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