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20 साल के इस लड़के की कहानी सुनकर आप डॉक्टर के पास जाने से डरेंगे

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मान लीजिए आपका पेट दर्द हो रहा हो. होता है. कभी ना कभी सबका पेट दर्द होता है. पहले तो मोहल्ले के झोलाछाप से कोई चूरन छाप दवा ली जाती है. और जब दर्द अझेल हो जाता है तो आदमी जाता है अस्पताल. अस्पताल में मिलता है डॉक्टर. करता है जांच.

अब अगर जांच इलाज करा के लौटे इंसान को पता चले, कि सब ख़तम. तो ? अरे खत्म समस्या नहीं, उम्मीद ख़त्म. भविष्य में अपना घर बसाने और बाल बच्चेदार बनने की उम्मीद. तो कैसे झटका लगेगा.

# ऐसा ही झटका लगा 

मामला है बिलासपुर छत्तीसगढ़ का. राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ तहसील के रहने वाले 20 वर्ष के एक युवक के पेट में दर्द हो रहा था. वह 26 सितंबर 2011 को डोंगरगांव के सरकारी अस्पताल पहुंचा. यहां उसे भर्ती तो कर लिया. लेकिन उससे कुछ काग़ज़ों पर दस्तखत करवाए गए. क्योंकि युवक पढ़ा-लिखा नहीं था तो कागज़ पढ़ नहीं सका. उसे एनेस्थीसिया दिया. युवक बेहोश हो गया. ऑपरेशन किया गया. उसे डिस्चार्ज करने के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों ने बाकायदा 1100 रुपए और एक प्रमाणपत्र भी दिया. युवक गांव पहुंचा तो मामला ठीक था.

कुछ दिनों बाद गांव वालों में से ही किसी ने उसका सर्टिफ़िकेट देखकर बताया कि उसकी तो नसबंदी कर दी गई है. उसने 17 नवंबर 2011 को थाने में एफआईआर दर्ज करवाई. इसमें कहा कि डॉक्टरों ने बगैर उसकी सहमति के नसबंदी कर दी. उसने जिम्मेदार डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इधर, मामले की विभागीय स्तर पर भी जांच शुरू हुई.

# होती क्या है नसबंदी 

वैसे डॉक्टरी भाषा में समझाएं तो आपमें से ज़्यादातर को समझ नहीं आएगा. क्योंकि सब लोग डॉक्टर तो हैं नहीं. ऐसे आसान भाषा में समझिए. नसबंदी में दो शब्द हैं. नस और बंद. आदमी के अंडकोष से एक नस जाती है पेनिस के साथ. इससे होकर ही स्पर्म यानी शुक्राणु मादा अंडाणु से मिलते हैं जिसकी वजह से बच्चा होता है.

अब जब ये नस ही बंद कर दी गई तो समझो ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी. मतलब मुहावरे का ग़लत ना लीजिएगा. ना रहेंगे शुक्राणु, ना होगा बच्चा. ऐसे समझिए.

यही हुआ इस युवक के साथ भी.

# अब मामले पर फैसला आया है 

युवक इतने साल अदालत में लड़ता रहा. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला आ गया है. कोर्ट ने युवक को 2 लाख 50 हज़ार रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया है. जुर्माना अस्पताल को देना होगा. और इस जुर्माने की भरपाई दोषी अधिकारियों से की जाएगी.

लेकिन सवाल अब भी वही है. क्या इस जुर्माने या सज़ा से युवक के साथ हुआ हादसा वो भूल जाएगा? क्या अब वो वापस आम ज़िंदगी बिता सकेगा?


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