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पूजा के लिए फूल तोड़ रहे थे, पुजारी को कुल्हाड़ी से काट दिया

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बांग्लादेश पड़ोसी देश है. वही देश है जिसे 1971 में इंदिरा गांधी ने आजाद कराने में मदद की. वो बांग्लादेश जो आज भारत के मित्रों में शुमार किया जाता है. लेकिन वहां हिंदू अल्पसंख्यकों, नास्तिकों और इस्लाम विरोधियों की बुरी गत है.

शुक्रवार को वहां एक और हिंदू पुजारी को कुल्हाड़ी से काट दिया गया. पुजारी श्यामनंदो पर उस वक्त हमला किया गया, जब  वो पूजा के लिए फूल तोड़ रहे थे. बांग्लादेश में बीते 14 हफ्तों में 12 लोग इस कट्टरपंथ की भेंट चढ़ चुके हैं.

Bangladesh
बांग्लादेश में पुजारी की हत्या के बाद मौका-ए-वारदात की तस्वीर .

राजधानी ढाका से 300 किलोमीटर दूरी पर है झिनाइदा जिला. जिले के मुख्य इलाके में एक मंदिर है. मंदिर के सामने पुजारी श्यामनंदो पूजा के लिए फूल तोड़ रहे थे. जिला प्रशासन के चीफ महबूबुर रहमान ने बताया, ‘जब पुजारी श्यामनंदो फूल तोड़ रहे थे. तब तीन लड़के वहां आए. बाइक पर थे. उन्होंने कुल्हाड़ी से काटकर उनका मर्डर कर दिया और फरार हो गए. इस हत्या का तरीका भी स्थानीय आतंकियों के तरीके जैसा ही था. लेकिन इस बारे में कुछ ज्यादा नहीं कह सकते.’

बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से कट्टरपंथी हमलों में इजाफा हुआ है. लिबरल, सेक्युलर ब्लॉगर और और दूसरे मजहब के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. 2014 में ‘डिफेंडर्स ऑफ इस्लाम’ नाम के एक संगठन ने 84 बांग्लादेशियों की हिट लिस्ट बनाई थी. इनमें से ज्यादातर सेक्युलरिस्ट थे. इस लिस्ट के 10 लोगों की हत्या की जा चुकी है और कई पर हमले हुए हैं. यह लिस्ट बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के पास भी है. लेकिन सरकार कुछ भी रोक पाने में नाकाम रही है.

पुलिस के मुताबिक, पुजारी श्यामनंदो की हत्या के पीछे हत्यारों की क्या मंशा थी, इस बारे में पता नहीं चल पाया है. अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई है. न ही किसी ने समूह ने हत्या की जिम्मेदारी ली है.

ISIS लेता रहा है जिम्मेदारी

बांग्लादेश में हाल में इस तरह की कुछ हत्याओं की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है. लेकिन बांग्लादेश सरकार ISIS की मौजूदगी से इनकार करती रही है. सरकार के मुताबिक, इन हत्याओं के पीछे बंगलादेशी कट्टरपंथियों का हाथ है. सरकार जो भी मानती हो लेकिन असल बात ये है कि वो ऐसी वारदात रोक नहीं पाती.

जो हमले पहले हुए

7 जून को इसी (झिनाइदा) जिले में एक 70 साल के पुजारी को मार डाला था. तब भी तीन हमलावर बाइक से आए थे और मंदिर जाते गोपाल गांगुली को धारदार हथियार मारकर फरार हो गए. उनकी सिरकटी लाश मंदिर के पास पाई गई थी.

5 जून को गिरजाघर के करीब एक ईसाई पर हमला हुआ था. बिल्कुल इसी तरीके से. इसी दिन पुलिस ऑफिसर की हत्या कर दी गई, वो भी महज कुछ घंटे पहले ही.

फरवरी में भी एक हिंदू पुजारी की हत्या कर दी गई थी. एक श्रद्धालु मदद को आया तो उसे भी गोली मारकर जख्मी कर दिया. ISIS ने इसकी जिम्मेदारी ली, लेकिन सरकार ने उनका हाथ होने से इनकार किया. अप्रैल में राजशाही शहर में आईएस आतंकवादी ने एक सेक्युलर प्रोफेसर का गला रेत दिया. इसी महीने आईएस ने एक हिंदू दर्जी को उसकी दुकान पर मार डाला. इस्लामी कट्टरपंथियों ने समलैंगिक पत्रिका के एडिटर और उनके मित्र की ढाका में हत्या कर दी थी.

बांग्लादेश का स्टेट रिलीजन इस्लाम है. देश के सेक्युलर एक्टिविस्टों ने कुछ महीनों पहले हाई कोर्ट में अर्जी देकर देश के औपचारिक धर्म के स्टेटस को चैलेंज किया था. पर कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया. मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में इस अर्जी से पॉलिटिकल तनाव बढ़ने की आशंका थी.


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