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जातिवाद की क्रूर सच्चाई दिखाती बलिया के प्राइमरी 'इंग्लिश' स्कूल की ये तस्वीर देखिए

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उत्तर प्रदेश में एक ज़िला है बलिया. यहां एक गांव है रामपुर. इस गांव में है इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल नंबर 1. इस स्कूल में अनुसूचित जाति/जनजाति यानी SC/ST, अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC और सामान्य वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं. इस स्कूल से एक खबर आई है, जिसे सुनकर सबसे पहला सवाल मन में ये आता है कि क्या आज भी ऐसा हो रहा है?

खैर, ज़्यादा नहीं घुमाएंगे. मुद्दा ये है कि इस स्कूल में बच्चे मिड डे मील के टाइम पर अलग-अलग बैठकर खाना खाते हैं. कुछ बच्चे तो अपने घर से ही थालियां लेकर आते हैं. स्कूल से मिलने वाली थालियों में नहीं खाते हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक ओबीसी और सामान्य वर्ग के बच्चे घर से थाली लाते हैं. खाना लेने के बाद वो SC/ST बच्चों से अलग बैठ जाते हैं. उनके साथ घुलते-मिलते नहीं हैं. कुछ बच्चे तो ऐसे हैं जो खाना ही नहीं खाते हैं. स्कूल के एक बच्चे से जब पूछा गया कि ऐसा क्यों. तो उसने जवाब दिया, ‘स्कूल की थाली में कोई भी खा लेता है. इसलिए हम घर से अलग थाली लेकर आते हैं.’

रामपुर के प्राइमरी स्कूल में पढ़ते-खाते बच्चे.
रामपुर के प्राइमरी स्कूल में पढ़ते-खाते बच्चे.

स्कूल के प्रिंसिपल हैं पुरुषोत्तम गुप्ता. उनसे जब सवाल किया गया कि स्कूल में ऐसा क्यों हो रहा है. इसे रोकने के लिए कुछ किया जा रहा है या नहीं. उन्होंने जवाब दिया,

‘हम बच्चों से कहते हैं कि वो साथ में बैठकर खाना खाए, लेकिन हम लोग जैसे ही वहां से हटते हैं, बच्चे अलग बैठ जाते हैं. हमें लगता है कि शायद बच्चे ये सबकुछ अपने घर से सीख रहे हैं. हमने बच्चों को कई बार ये सिखाने की कोशिश की है कि वो सब एक हैं. एक बराबर हैं, लेकिन सामान्य वर्ग और ओबीसी बच्चे SC/ST बच्चों से दूर ही रहते हैं. साथ बैठते ही नहीं हैं. बच्चे साथ में रहना ही नहीं चाहते. दूरी बना लेते हैं. पता नहीं चाहे घर से संस्कार मिला हो, चाहे कुछ हो, बच्चे भेदभाव को खत्म नहीं कर रहे. दलित बच्चों की थाली में खाना नहीं चाहते.’

बलिया के जिलाधिकारी (डीएम) हैं भवानी सिंह खंगारौत. खबर मिलने के बाद डीएम ने कहा था कि इस मामले की जांच होगी. स्कूल में बच्चों का चरित्र निर्माण होता है, अगर वहां इस तरह की कोई बात होती है, तो जांच करवाई जाएगी. इस प्रथा को खत्म किया जाएगा. इसके बाद भवानी सिंह 29 अगस्त को रामपुर के प्राइमरी स्कूल नंबर 1 गए, दौरा करने के लिए. दौरे के बाद उन्होंने भेदभाव वाली खबर को पूरी तरह से खारिज कर दिया. कहा कि स्कूल में ज्यादा बच्चे तो SC/ST वर्ग के ही हैं. वहां भेदभाव नहीं होता है.

अब खबर सामने आई है, तो बवाल मचा हुआ है. इसके खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी ट्वीट किया. लिखा,

‘यूपी के बलिया जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्रों को अलग बैठाकर भोजन कराने की खबर अति-दुःखद व अति-निन्दनीय. बीएसपी की मांग है कि ऐसे घिनौने जातिवादी भेदभाव के दोषियों के खिलाफ राज्य सरकार तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे, ताकि दूसरों को इससे सबक मिले व इसकी पुनरावृति न हो.’

मायावती का ट्वीट.
मायावती का ट्वीट.

स्कूल में जातिगत भेदभाव हो रहा है या नहीं. ये तो जांच का विषय है, क्योंकि डीएम ने तो इस खबर को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. लेकिन आपको बता दें कि बलिया से इस तरह की खबर पहले भी सामने आ चुकी है.

बलिया के चौकिया के स्कूल से इस तरह का मामला सामने आया था. कहा गया था कि यहां के स्कूल में मुस्लिम बच्चों को पत्तल में खाना परोसा गया था. जबकि बाकी बच्चों को थाली में खाना मिला था. वीडियो भी वायरल हुआ था. खंड शिक्षाधिकारी निर्भय नारायण सिंह को सफाई भी देनी पड़ी थी. कहा था कि बच्चों ने अपने मन से पत्तल में खाना खाया था.

क्या है मिड डे मील?

एक मकसद है कि ज़्यादा से ज़्यादा बच्चे स्कूल आएं और पढ़ें. देश के कई घरों के बच्चे गरीबी की वजह से पढ़ नहीं पाते हैं. वो काम करने जाते हैं. इसलिए स्कूल नहीं जाते हैं. तो ऐसे बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए सरकार ने एक स्कीम शुरू की. नाम दिया ‘मिड डे मील’, यानी मध्याह्न भोजन योजना.

इस स्कीम के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को फ्री में दोपहर का खाना दिया जाता है. ताकि बच्चे खाने के मकसद से ही सही, लेकिन कम से कम स्कूल तो आएं. खाने का जुगाड़ करने के लिए काम पर जाने के बजाए स्कूल आएं.


वीडियो देखें:

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