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यूपी के खेत में मरी हुई मां के बगल में 4 दिनों तक ज़िंदा बची रही 1 साल की अकेली बच्ची

एक खेत. खेत में एक साल की बच्ची. बगल में मां की लाश. चार दिन बीत गए. मां की लाश सड़ने लगी. मगर बच्ची ज़िंदा रही. भूखी-प्यासी. दो दिन बारिश भी हुई. बच्ची उसे भी झेल गई. किसी की नज़र नहीं गई उसपर. आखिरकार बच्ची घुटने के बल चलती-लुढ़कती कुछ दूर बने एक मंदिर तक पहुंची. वहां लोगों ने उसे देखा. उसे अस्पताल पहुंचाया. पुलिस को इत्तला की गई. अमिल भटनागर की बायलाइन से ये खबर इंडियन एक्सप्रेस के मार्फ़त पहुंची है हम तक. बागपत पुलिस का मानना है कि शायद किसी धारदार हथियार से महिला और बच्ची पर हमला किया होगा. महिला की मौत हो गई, मगर बच्ची बच गई.

उत्तर प्रदेश के बागपत में बरौत पुलिस थाना है. ये इसी इलाके की घटना है. बच्ची की पहचान नहीं हो पाई है. न खेत में मिली महिला की लाश की पहचान खोजी जा सकी है. कोई भी नहीं जानता कि बच्ची का नाम क्या है. सो आस्था मल्टी-स्पैशलिटी हॉस्पिटल, जहां बच्ची का इलाज चल रहा है, के स्टाफ ने उसका नाम ‘गुड़िया’ रख दिया है. अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है-

हमने बच्ची का CT स्कैन किया. उसके माथे के बाएं हिस्से पर किसी धारदार चीज से हमला किया गया था. इसकी वजह से वहां जख़्म है. सिर की हड्डियों में भी डैमेज है. ऐसा तब होता है, जब किसी का सिर बहुत जोर से किसी बेहद ठोस चीज पर पटका गया हो. सिर के घाव में संक्रमण हो गया है. इस वजह से हम इसमें टांके नहीं लगा सकते. कीड़ों ने उसके जख़्म की हालत और खराब कर दी है. मगर हमें उम्मीद है कि बच्ची ठीक हो जाएगी.

फिलहाल तो अस्पताल वालों ने उसे एक नाम दिया है
अस्पताल की नर्सों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बच्ची जब वहां लाई गई, तो कई घंटों तक बेहोश रही. जैसे ही वो जगी, उसने दूध और पानी की पूरी एक बोतल पी ली. डॉक्टर ऐंटिबायोटिक का डोज़ देकर संक्रमण का इलाज करने की कोशिश कर रहे हैं. बरौत पुलिस थाने की कॉन्स्टेबल रेखा नागर फिलहाल गुड़िया की अभिभावक हैं. गुड़िया रोती है, तो रेखा उसे गोद में लेकर घुमाती हैं. उसे थपकियां देती हैं. गुड़िया अपना छोटा सा हाथ रेखा के गले में लपेटकर चुपचाप सो जाती है.

रेखा खुद एक पांच साल के बच्चे की मां हैं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया-

मैं सुबह 10 बजे आती हूं यहां. रात 9 बजे तक रुककर फिर अपने घर जाती हूं. गुड़िया बहुत बहादुर और प्यारी बच्ची है. उसने इतना कुछ झेला. हम तक उम्मीद करते हैं कि वो पूरी तरह ठीक हो जाए. जब वो अस्पताल लाई गई थी, उस समय से अब तक उसकी हालत काफी सुधरी है.

काफी कोशिश के बाद भी पुलिस को बच्ची की पहचान नहीं मिल रही है
कॉन्स्टेबल रेखा ने बताया कि कुछ लोग गुड़िया को गोद लेने के लिए आगे आए हैं. इस बारे में कोई फैसला लेने के लिए बाल कल्याण आयोग से संपर्क किया गया है. इधर अस्पताल प्रशासन और रेखा बच्ची की देखभाल में जुटे हैं. दूसरी तरफ बरौत पुलिस थाने खेत में मिली महिला के शव की पहचान करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है. इस मामले के जांच अधिकारी धर्मेंद्र संधु ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया-

मैं खुद आसपास के तकरीबन 25 गांवों में गया. वहां मैंने ग्राम प्रधानों को महिला के शव की तस्वीर दिखाई. मगर अब तक कोई कामयाबी नहीं मिली है. दिल्ली से दो लोग बच्ची के बारे में पूछते हुए आए, मगर उन्होंने बच्ची की पहचान से जुड़ी जो चीजें बताईं वो मेल नहीं खाती. हमने स्थानीय मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाकी पुलिस थानों से भी संपर्क किया है.

बच्ची की पहचान कब हो पाएगी, उसकी क्या कहानी है, वो उस खेत तक कैसे पहुंची, उसकी मां को किसने मारा, किसने इतनी छोटी बच्ची को कत्ल करने की कोशिश की, इन सबका जवाब शायद पुलिस आज नहीं तो कल खोज लेगी. मगर उस बच्ची के बारे में एक सबसे बड़ी चीज हम सब जान गए हैं. वो सर्वाइवर है. एक साल की बच्ची का इतना कुछ झेलना और फिर भी सर्वाइव करना, चमत्कार कुछ होता है तो ऐसा ही होता होगा.


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