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क्या लॉकडाउन के चलते बैंक्स और भी बर्बाद हो जाएंगे?

कोरोना वायरस के चलते भारतीय बैंकों की हालत बिगड़ने का अंदेशा जताया गया है. आशंका है कि बैंकों का फंसा हुआ लोन दोगुना हो सकता है. अभी बैंकों के करीब 9.35 लाख करोड़ रुपये फंसे हैं. यानी इतने पैसे का लोन वापस नहीं आ रहा. कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते यह रकम 18 लाख करोड़ रुपये के करीब हो सकती है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, चार बैंकरों और सरकार के एक सीनियर अधिकारी से बात करने के बाद यह अंदेशा सामने आया है. रॉयटर्स की इस रिपोर्ट पर वित्त मंत्रालय ने कमेंट करने से मना कर दिया है.

रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से लिखा गया है,

सरकार में इस बारे में विचार चल रहा है. इस वित्तीय वर्ष यानी मार्च 2021 तक बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी NPA दोगुना हो सकता है. बैंकों ने जो लोन दिया है उसका 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा बकाया रहने का जोखिम है.

लॉकडाउन के चलते थमे उत्पादन के पहिए

बैंकों का लोन फंसने से भारत की विकास दर को नुकसान हो सकता है. साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा. एक सरकारी बैंक के बड़े अधिकारी ने भी रॉयटर्स से बातचीत में एनपीए दोगुना होने का अंदेशा जताया. साथ ही कहा कि ऐसा समय पहले कभी नहीं आया है.

भारत में कोरोना वायरस के चलते 25 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ था. अब यह 17 मई तक बढ़ चुका है.
भारत में कोरोना वायरस के चलते 25 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ था. अब यह 17 मई तक बढ़ चुका है.

भारत में 25 मार्च से लॉकडाउन है. इस वजह से औद्योगिक उत्पादन अटका हुआ है. लॉकडाउन की मियाद 17 मई तक कर दी गई है. हालांकि अब सरकार ने धीरे-धीरे फैक्ट्रियों को खोलने की अनुमति दी है.

बड़े शहरों में अभी भी काम शुरू नहीं

बैंकों को डर है कि जून या जुलाई तक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से शायद ही खुले. साथ ही लोन का करीब 20 प्रतिशत छोटे और मंझोले उद्योगों को दिया गया है. लॉकडाउन का ज्यादा बुरा असर इन पर ही पड़ा है. इसके साथ ही देश के 10 बड़े शहर रेड जोन में हैं. यानी यहां पर कोरोना का सबसे ज्याद असर है. इस वजह से यहां काम-धंधे शुरू नहीं हो पाए हैं. एक्सिस बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में इन 10 बड़े शहरों का योगदान भी बड़ा है. साथ ही बैंकों ने इन्हीं इलाकों में करीब 83 फीसदी लोन दे रखा है.

एक सरकारी बैंक के अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में लिखा है कि कोरोना वायरस से हालात सुधरने पर भी जोखिम कम नहीं होगा. देश की अर्थव्यवस्था बुरी हालत में है. विकास दर काफी धीमी है. कोरोना वायरस ने मामला और बिगाड़ दिया. उन्होंने कहा,

अब हमारे सामने ब्लैक स्वान इवेंट यानी ऐसे हालात हैं जिनके बारे में किसी ने नहीं सोचा था. इसका मतलब है कि सरकार से किसी बड़ी आर्थिक मदद के बिना अर्थव्यवस्था आने वाले कई महीनों तक बुरे हाल में ही रहेगी.

भारतीय अर्थव्यवस्था में 20 प्रतिशत की कमी का अंदेशा

अर्थव्यवस्था का आंकलन करने वाली मैकिंसी एंड कंपनी. इसने अप्रैल में एक रिपोर्ट दी थी. इसमें कहा गया था यदि लॉकडाउन 15 मई तक रहा तो भारत की अर्थव्यवस्था 20 प्रतिशत तक सिकुड़ जाएगी. साथ ही अंदेशा जताया था कि अप्रैल, 2020 से मार्च, 2021 के दौरान भारत की विकास दर में 2 से 3 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है.

लॉकडाउन के चलते छोटे ओर मंझोले उद्योगों को बड़ा नुकसान हुआ है. बैंकों को डर है कि ऐसे उद्योग अपना लोन किस तरह चुका पाएंगे.
लॉकडाउन के चलते छोटे ओर मंझोले उद्योगों को बड़ा नुकसान हुआ है. बैंकों को डर है कि ऐसे उद्योग अपना लोन किस तरह चुका पाएंगे.

बैंकों ने आरबीआई से की नियमों में ढील देने की अपील

बैंकों का कहना है कि फंसे हुए लोन को बढ़ने से रोकने का एक तरीका है. इसके लिए रिजर्व बैंक यानी RBI को फंसे हुए लोन संबंधी नियमों में ढील देनी होगी. बैंकों ने आरबीआई से कहा है कि किसी लोन को फंसा हुआ लोन 180 दिन यानी छह महीने के बाद घोषित किया जाए. अभी यह अवधि 90 दिन यानी तीन महीने की है.

लॉकडाउन को लेकर एक प्राइवेट बैंक के अधिकारी ने कहा,

लॉकडाउन बाघ की सवारी करने जैसा है. जब हम उससे उतर जाते हैं तो हालात मुश्किल हो जाते हैं.

इसका मतलब है कि लॉकडाउन हटने के बाद भी समस्याएं कम नहीं होंगी. साथ ही मजदूरों का पलायन भी मुश्किलें बढ़ा सकता है.

भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस


Video: अर्थात: केंद्र सरकार अगर राज्यों की नहीं सुनती है, तो लॉकडाउन 3.0 के बाद देश का क्या होगा?

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