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मोदी सरकार ने वैक्सीन को लेकर कोर्ट में हैरान करने वाली बात कही है

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले हफ्ते हुई सुनवाई में केंद्र सरकार से कहा था कि वह बताए कि कोरोना की वैक्सीन (Corona Vaccines) पर सरकार का रुख क्या है. कोर्ट ने वैक्सीन की उपलब्धता और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों में सरकार की फंडिंग को लेकर भी सवाल किए थे. 9 मई यानी रविवार की रात केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके स्थिति से अवगत कराया. मोदी सरकार ने अगले 6 महीने में वैक्सीन की उपलब्धता पर हैरान करने वाला जवाब दिया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि उसे इस बात का अंदाजा नहीं है कि अगले 6 महीने में कितनी वैक्सीन भारत में उपलब्ध होगी. आइए जानते हैं मुख्य रूप से सरकार ने अपने हलफनामे में क्या-क्या कहा है.

# केंद्र सरकार ने साफ कह दिया है कि वह यह बताना बहुत मुश्किल है कि अगले 6 महीने में देश और विदेशों से कितनी वैक्सीन उपलब्ध करा दी जाएगी. सरकार का कहना है कि यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता क्योंकि बहुत सी चीजों में बदलाव आ सकता है. परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं.

सरकार ने वैक्सीन और उसके ट्रायल में शामिल कंपनियों पर भी अपनी बात रखी. डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलजी का कोविड 19 रिसर्च कंसोर्टियम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए तकरीबन 11 वैक्सीन कैंडिडेट के साथ काम कर रहा है. इसमें प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर दोनों की ही कंपनियां शामिल हैं.

# सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली दोनों ही कंपनियों के साथ अपने हिसाब-किताब की जानकारी भी कोर्ट को दी. कोविशील्ड (Covishield) बनाने वाली सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और कोवैक्सीन (Covaxin) बनाने वाली भारत बायोटेक को जितना भी पैसा दिया गया, वह वैक्सीन के अडवांस के तौर पर दिया गया है. भारत सरकार का कंपनियों में कोई इनवेस्टमेंट नहीं है.

# भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (Bharat Biotech International Ltd. ) और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कोवैक्सीन और कोविशील्ड बनाने के लिए अडवांस पेमेंट के तौर पर पैसे रिलीज किए गए थे. इसमें 1732.50 करोड़ रुपए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के लिए रिलीज किए गए थे. इसके बदले कंपनी को 11 करोड़ कोविशील्ड के डोज़ उपलब्ध कराने हैं. ये डोज़ मई, जून और जुलाई में उपलब्ध कराने हैं. इसी तरह से 787.50 करोड़ रुपए भारत बायोटेक के लिए रिलीज किए गए हैं. यह कंपनी मई, जून और जुलाई के महीने में 5 करोड़ डोज़ उपलब्ध कराएगी.

# केंद्र सरकार ने हलफनामे में यह भी कहा है कि दोनों ही कंपनियों को रिसर्च और डिवेलपमेंट के लिए किसी भी तरह की मदद नहीं दी गई है. हालांकि सरकार ने यह माना है कि क्लीनिकल ट्रायल करने में सरकार ने कंपनियों की मदद की है.

# कोवैक्सीन को पब्लिक प्राइवेट पार्टनर शिप के तहत बनाया गया है. इसके लिए भारत बायोटेक और Indian Council of Medical Research (ICMR) ने पार्टनरशिप की थी. इसके लिए जो एमओयू साइन हुआ था उसमें कुल सेल की 5% रॉयल्टी और भारत को पहले वैक्सीन उपलब्ध कराने जैसी शर्ते हैं. आईसीएमआर ने भारत बायोटेक को कोवैक्सीन बनाने के लिए कोई फंड नहीं दिया. जो भी खर्च हुआ है वह आईसीएमआर पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरॉलजी ने किया.

# कोवैक्सीन के तीसरे फेज़ के ट्रायल में ICMR ने मदद की. कुल मिलाकर ICMR का 35 करोड़ रुपए खर्च हुआ.

# सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड के ट्रायल में भी ICMR ने मदद की. इसमें 1600 लोगों ने भाग लिया था. वैक्सीन बनाने वाली कंपनी को कोई फंड नहीं दिया गया बल्कि पैसा सीधे 14 क्लीनिकल ट्रायल साइट को ट्रांस्फर किया गया.

बता दें कि केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन के अलावा कोविड प्रबंधन की ताजा और विस्तृत जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है. सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले रविवार शाम 218 पेज के हलफनामे में केंद्र सरकार ने कोर्ट के सभी सवालों के एक-एक कर जवाब दिए.


वीडियो – कोरोना की सिंगल और डबल डोज़ वैक्सीन लेने से पहले ये बातें जान लीजिए

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