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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर ओवैसी ने क्या कहा?

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अयोध्या ज़मीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. कोर्ट ने ज़मीन पर रामलला का दावा माना है. फैसला आने के बाद से ही पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और दूसरे लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. असदुद्दीन ओवैसी के बयान का सभी को इंतज़ार था. अब वो भी आ गया है.

 AIMIM प्रमुख इस फैसले से असंतुष्ट हैं. उन्होंने कहा,

“जिन वकीलों ने बाबरी मस्जिद का केस लड़ा, मुस्लिमों के पक्ष में, उन सबको मैं शुक्रिया कहना चाहता हूं. उन्होंने बहुत मेहनत की. मुस्लिम पक्ष के केस को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा. जैसा कि मैंने आपसे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का जो ऑफिशियल पोज़िशन आया है, बोर्ड ने कहा है कि हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. मेरा भी यही कहना है. मेरा मानना ये है कि सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम जरूर है, लेकिन इन्फैलिबल नहीं है. मेरी प्रतिक्रिया ये है कि अगर 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद नहीं गिरी होती, तो कोर्ट का क्या फैसला होता? मुझे नहीं मालूम. लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम है. लेकिन इन्फैलिबल नहीं है.”

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क्लिक करके पढ़िए दी लल्लनटॉप पर अयोध्या भूमि विवाद की टॉप टू बॉटम कवरेज.

इसके पहले ओवैसी ने ट्वीट भी किया था. एक तस्वीर पोस्ट की थी. हालांकि कहीं पर भी अयोध्या केस का जिक्र नहीं किया है, लेकिन जो तस्वीर डाली है, वो अयोध्या पर आए फैसले की तरफ इशारा करती हुई लग रही थी. ओवैसी ने ‘सुप्रीम, बट नॉट इन्फैलिबल’ किताब के कवर पेज की फोटो डाली है. पहले उनका ट्वीट देख लीजिए-

आपको बता दें कि इन्फैलिबल शब्द का हिंदी अर्थ अचूक यानी कभी गलती न करने वाला होता है. यानी ‘सर्वोच्च, लेकिन अचूक नहीं’. किताब ‘ऑक्सफोर्ड इंडिया पेपरबैक्स ने छापी है. इसमें सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के सम्मान में निबंध लिखे गए हैं. किताब के लेखक पूर्व सीजेआई बी.एन कृपाल, वरिष्ठ वकील अशोक देसाई, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन और राजू रामचंद्रन हैं.


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